00:00सेर एक नुमाईश में अपनी पेंटिंग्स पेश कर रही होती है जब अचानक वहाँ पराज आता है वही पराज तोड़ा बूला मगर आंकों में वेसी ही गहराई
00:11सेर उसे देखकर खामोश हो जाती है पराज बस इतना कहता है मैं गया था क्योंकि इस वक्त तुम्हें मेरे बजाए खुद की जरूरती और मैं वाबस आया हूँ क्योंकि अब तुम मुकमल हो चुक्य हो
00:22सेर जिसने दिल को लौह की तरह सक्क कर लिया था अब पर तूटने लगती है लेकिन इस बार आसो के साथ मुस्किराइड बे आती है लेकिन उसर बितना कहती है महबत अकर चौल जाए तो पलट के ना आए क्योंकि एतिजार सिरफ एक बार अच्छा लगता है पराज खामो�
00:52सेर जाती है लेकिन हमेशा दिल के कोने में जिन्दा रहती है लेकिन फिल्व वीवर्ड सेहर एक माडरन समझधार और खुदार लडकी है जो लाहूर के एक नामूर यूनिवस्टी में पानार्ट के स्टूडन है वह आज़ाद ख़याल जरूर है मगर दिल से बेहत वपाद
01:22वो कम बोलता है लोगों को से कम गुलता है
01:26मगर जब उस सहर से मिलता है
01:27तो देरे देरे जीने के अहुनर वापस आने लगता है
01:30दोनों एक ही केपी में अक्सर मिला करते
01:33किताबों और जिन्दगी पर गेंटों बाते होते
01:36सहर पराज से महबत करने लगती है
01:38और एक दिन वो खुद पराज को परपोस्ट कर देती है
01:42पराज हच कचाता है मगर हाग कर देता है
01:45लेकिन टीक अगले दिन पराज बगर बताए शेहर चोल देता है
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