00:00बहुत सबर पहले आंदर प्रतिश की नर्वत सित्र में राजा अकास राज का सासन था
00:05राजा तरम प्रायन और बर्चा वत्सल थे लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता थी कि उनके घर में कोई संतान नहीं थी
00:11राजा में समरिद्धी और स्यांती तो थी लेकिन उनके वन्स को आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं था
00:17राजा ने इस समस्या की समाधान के लिए एक भवे यक्य का आयोजन किया
00:21यह के समाधान के बाद राजा ने अपने खेत में हल चलाया और तभी धर्ती फटी और उसमें से एक अद्वुत तिवे कन्या परकट हुई
00:30वह कन्या किसी साथारन मानव की तरह नहीं अलगी तिवेता की आपाशी चमक रही थी
00:35राजा ने उसे अपनी बेटी के रूप में अपनाया और उसका नाम बदमावती रखा
00:40जैसे जैसे बदमावती बड़ी हुई उनकी सुन्दर था और उनका तेज पूरे संसार में परसित हो गया
00:46उनकी ख्याती स्वर्क तक पहुची और बगवान व्यंक्टेस्वर जो स्वम बगवान विष्णुक के अफ़तार थे
00:52उनसे विवा करने के लिए स्वम धर्ति पर आए
00:55पदमावती और व्यंक्टेस्वर का विवा देवे रितियों से संपन हुआ
00:59यह वा मानाव और देवताओं के बीच प्रेम और भक्ति का परतीक बना
01:04आज भी तिरूपती के पास इस्तित पदमावती देवी का मंदिर लागो भक्तों की आस्ता का केंदर है
01:10उनकी पूचाशी भक्तों को सुग, समरिती और स्यांती का असिरवाल राप्त होता है
01:15यह कता हमें सिकाती है कि सची भक्ती और धरम के मार्क पर चलने से सभी इच्छाए पूरन होती है
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