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"क्या हल चलाने से कोई देवी प्रकट हो सकती है? क्या यह संभव है

"धरती से माता पद्मावती का चमत्कारी प्राकट्य एक अद्भुत पौराणिक कथा है जो भक्तों को प्रेरित करती है। जानिए कैसे देवी लक्ष्मी ने माता पद्मावती के रूप में जन्म लिया और भगवान वेंकटेश्वर के साथ उनका दिव्य संबंध बना। इस कहानी में छुपा है धर्म, आस्था, और चमत्कार का संदेश। पूरी कथा सुनें और माता पद्मावती के दिव्य आशीर्वाद से अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भरें।


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00:00बहुत सबर पहले आंदर प्रतिश की नर्वत सित्र में राजा अकास राज का सासन था
00:05राजा तरम प्रायन और बर्चा वत्सल थे लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता थी कि उनके घर में कोई संतान नहीं थी
00:11राजा में समरिद्धी और स्यांती तो थी लेकिन उनके वन्स को आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं था
00:17राजा ने इस समस्या की समाधान के लिए एक भवे यक्य का आयोजन किया
00:21यह के समाधान के बाद राजा ने अपने खेत में हल चलाया और तभी धर्ती फटी और उसमें से एक अद्वुत तिवे कन्या परकट हुई
00:30वह कन्या किसी साथारन मानव की तरह नहीं अलगी तिवेता की आपाशी चमक रही थी
00:35राजा ने उसे अपनी बेटी के रूप में अपनाया और उसका नाम बदमावती रखा
00:40जैसे जैसे बदमावती बड़ी हुई उनकी सुन्दर था और उनका तेज पूरे संसार में परसित हो गया
00:46उनकी ख्याती स्वर्क तक पहुची और बगवान व्यंक्टेस्वर जो स्वम बगवान विष्णुक के अफ़तार थे
00:52उनसे विवा करने के लिए स्वम धर्ति पर आए
00:55पदमावती और व्यंक्टेस्वर का विवा देवे रितियों से संपन हुआ
00:59यह वा मानाव और देवताओं के बीच प्रेम और भक्ति का परतीक बना
01:04आज भी तिरूपती के पास इस्तित पदमावती देवी का मंदिर लागो भक्तों की आस्ता का केंदर है
01:10उनकी पूचाशी भक्तों को सुग, समरिती और स्यांती का असिरवाल राप्त होता है
01:15यह कता हमें सिकाती है कि सची भक्ती और धरम के मार्क पर चलने से सभी इच्छाए पूरन होती है
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