00:00महसे वाल में की जिने रामायन के रचलिता और आधिकवी के रूप में जाना जाता है का जीवन परिवर्तन वह इना दायक है
00:07उनका मूल नाम रतना करता और वे एक ढगो के रूप में जीवन यापन करते थे
00:13जो जंगल में यातरियों को लूट कर अपने परिवार का पालव पोसं करते थे
00:18एक दिन नार्द मुणी उसी जंगल से कुजर रहे थे जा रतना कर रहता था
00:23रतना कर ने उन्हें लूटने के लिए रोका लेकिन नार्द मुणी ने सांती पूर्वत पूचा
00:28तुम है पाप क्यों कर रहे हों? रतनाकर ने उतर दिया अपने परिवार के लिए, तब नारतमुनी ने जुजाव दिया कि वे अपने परिवार से पूछे कि क्या वे उनके पापों में इसिदार पनना चाते हैं? रतनाकर ने अपने परिवार से यह पर्शन हो किया, लेकिन स
00:58ने गहन तपस्या में लीन होकर राम नाम का जाप किया जिससे उनके सिरी पर दिन को ने बांबी बना ली इसलिए उन्हें वालमेकी नाम से जाना गया बाद में महरस्य वालमेकी ने संस्कृत के परतम महाकावर रामायम की रचना की जो आज भी 35 आहितर का महत पूरन इस्सा ह
01:28कर दो
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