#birha | समय का प्रकोप | Vishwanath Yadav | Bhojpuri Birha | Samay Ka Prakop
Song : समय का प्रकोप Album : Samay Ka Prakop Singer : Vishwanath Yadav Lyricist : Siyaram Yadav Producer : Sandeep Nishad Digital : Amarnath Prajapati Digital Partner : 7Sargam Digital Trade Inquiry : 7007149143 , 9696961705
05:11हमरे पहरा में जैसे हम चाहा वो इसे तुह कथा हो था कहे के परी
05:16अब वो धंग से रहे के परी कहे कल जुग
05:21कहें कल जुग हमारे राज का विधान यही
05:28बोला जूट नहीं ना लगी है ठेकान कही
05:33भूठ जापाट बोल चैन से रहो बाबा
05:39जुबा से रोज मेरी कता तू कहो बाबा
05:45बोले बाबा कभी जूट नहीं बोलूगा
05:49बाबा कभी जूट नहीं बोलूगा
06:06जान जाए परसत पंत नहीं बोलूगा
06:14बोले कल जूट तू हमसे ना बच पाओगे
06:31घमंड चूर करू ऐसा मैं रंग बाज हूँ पोजे कल जूट नहीं बच पाओगे
06:38कलन की सुना सुनाम अगर हमरे धंग से और कहले के अनुसार कथा ना कहबाम जूट जपात ना बोलबाम तरह ना मुश्किल कर दे तुहार
06:59पंडी जी कलन की सरकार सुनाम जूट हम नहीं बोलब सत्य के रास्ते से हम नहीं हतब भले ही हमार जान चल जाए
07:11पंडी जी वही धंग से अपन कथा का तो अंतर तर्ज बाते बहादा इस तर्ज वही बाम जोन भाई साब सुना उलंग
07:20के रतिया होले गरन या हो रतिया होले गरन या डोले ना पमाना वाना
07:30पंडीत कथा कहे लन हो अरे पंडीत कथा कहे लन माने ना कहा ना
07:54बंडीत कथा कहे लन माने ना कहा ना
08:06बर्गत का पेर रहल तो गाहं में बर्गत भारी जुटे सब नरनारी तो सिध्धा रुपया पामें हो
08:24सिध्धा रुपया पामें बाबा निशा दिनावाना
08:30बरी जत्रहल महराजी का तमाम लोग घुटके पास्परोश के रोज कथा सुनें
08:51दचमकल बाते पंडिताई बाबा या बरी पंडिताई उनकर चमकलल बढ़ाई जत करें लोग
08:59जत के नर नारी सब हो जत के नर नारी सब करें दरसानावाना
09:11फिर कल जूग महराज गेलन कालन की तोस्य कहत नहीं पंडिती की मांजा हमार बात
09:27जूड जबात ना बुलवाँ जोई बहिमानी के बात पबलिक के सुनाय के नाम भरमईबाँ तब तक तो के हम रहे ना दे भी हाँ
09:36महराज कलंग यह संत हमसे हो बेन करी तो यहाँ तरज बात
09:40तरज कोन बात
09:42तैसार बात
09:43कावन तरज
09:46वही तरज
09:47कहावा के खाया जूड़ावा
09:54अरे कहावा के हो पान
10:00कहावा कची कूली
10:03जैसे आप लोग यहूप डुबलीकेट बहु सुने ला
10:14कहावा के सुघर के हुआ
10:17अरे कहावा के हो धान
10:23कहावा के वो खाली
10:26कहावा के वो खाली
10:30मुसारवा खुटे हो जान
10:33कहावा के वो खाली
10:35कलजुग महराज ज्यान गईलन
10:39इपंडी जी हमार बात नामनी हैं
10:41ऐसे ही ठीक से जोन माम
10:43हमरे कहले के अनुसार काम ना करी हैं
10:45तुरंत कैलन का
10:47कलजुग बन उना तुरते
10:51अरे चिकवा के भेशा
10:56चिकवा नी गईलन तुरते
10:59कलजुग के हो नरे
11:05कलजुग के घुट ड़ते
11:19कशायरू बना ले लन
11:22और तुरंत पंडी जी का कथा खुब जमल हो
11:25तमाम पब्लिक सुना था
11:28भाया कैसा रास्ता आपलोग खली तक इलन काम
11:31जाए के एक हाथ रहले रहलें एक हथवा में उनके रहली देखा चुडिया दूसरे हथवा में बातें बकरा के मूडिया
11:52एक हाते में छूड़ी हो और दूसरे हाते में जोन बाएं एक ये बकरा का गर्दन ले ले ले ले ले खुब कथा महराज का जमल हो लोग सुने थुवन
12:04बरिगद के नीचे बाबा
12:08अबदेल उपदे सची कबानी गई लन तुरता
12:18कल जुगते हो नरे सची कबानी गई लन तुरता
12:27सर्यूग महरादी
12:37हाथ में ले ले बकरा कमूरी पहुंगे लें पंडी जी के सभा में
12:42कहे ना हो
12:43के यावाज मेरी ध्यान से सुने
12:47अरे यावाज मेरी ध्यान से सुनो
12:51कहा कल जुगे
12:53कहा कल जुगे
12:55अकड़बा तोडब तोहरो ना
12:59पंडी जी के लगे गई लें
13:03कारण की भेर करवा तो हार घमन धम चूर कर दें
13:06मा अवो समय कवाता वरन उहां के कारहल
13:09अर जमल रहली खुब कथा बैडली
13:15अब गाव पूर की जुटी यपा
13:23खूम ज्हांग के कथा कहल
13:29सबनर नारी सुनते मनमा
13:36फीक समय पर कल जुग पहुचा
13:42कल जुग महराज को जिलन अकालन
13:45आए बाबा यब सुनो हमा
13:48लाज नहीं तो हके लागत तू
13:55देदा पैसा मोर उधा
13:57जेदा पैसा मोर उधा
14:00जेदा पैसा मोर उधा
14:03जब हाथ में छुड़ी और बकरा के मुड़ी लेके कल जुग महराज व सभा में पहुचे लन
14:20सब लोग जाका लगने कि यह भाई यह कहां से आ गया लिहा कथा में यह बकरा काट के लगे तब तक कल जुग महराज कालन है तुरन
14:31ए पंडी जी कथा कया लुआ है यह बढ़का पंडीत बन के पहले काली के जुग मांस लिया लुआ कर हमां पैसा देदा लोग लगना मूह ताक है पंडी जी कि यह भाई मांसों खाना का रोज हमने इनके बड़ाई ज़द्ध थाई मानी ला एतना आई जो अन बाकाली को कर
15:01हुट का है बोलत हुआ नरकों में ठेकान न मिली का कि पैसा देबा की बात कर भाई यह दाहमाग पैसा पहले जब ले पैसा ना देबा तब ले कथा को है न दे लोग सोचे लगने कि यह भाई अगर इन देले रखते इतना धिठा के न बोलत इतना आदमिन के सामने जरूर �
15:31चल गे लेनों नहीं तो खाली जूट बनाना रहल पंडी जी के चल देलन वहां से फेर दूसरे दिंग वही बर्गत के नीचे महराज बैचल हुआ अजय महराज बैचलन ओ समय आवरत करूप पकड़के बेश्या करूप पकड़के कथा में कल्यूग महराग फिर पहुचलन
16:01अमा कैसेट रिकारडिन सेंटर सिधारी चवुक आजमगर से बार्वा नोशकारवा जाके कहलन है पंडी जी से जूट मूंकर सबके जुटा के यहां कथा कथा कथा बढ़का जयूबा संत बनल हुआ पंडी जी फेर घबरा गे लें कि ये भाई कलियों कथा मेंसे अमरे आ�
16:31तर्ज भाई इलाहबादी गीद भाई तई बढ़ादे मुन्ना हाँ यही गाना से तर्ज का सुरुवाद भाई कौने से हो जाउन गालत था ही वही से याउर कोंगे से
16:45करके कुछ प्रेम मुभबत का सिलसिला चालू हो गया हाँ तो के तो घेर जान का रही है प्रेम हो गया अब वह औरतिया के उन्हें बिरादरी करहा लोकर नाम नहीं बाँ मगर ओकर आदमी कुछ संका करे लगल अब बिगरे लगल
17:12तो दुलहीनिया यह दिन नाराज हो के करदवा की सुना धेर जान के जब हमरे परवाम तो सुन ला अरे जो करवाम वहे ज़्यादा तन पिया चली जई बगर रिया सन पिया जई बगर रिया सन पिया इलहा बादी पर ने
17:36जई बगर रियां सन पिया इरहल तरी कम न मुना मगर गनवा अब ám जाए के उबेश्या कहत बाद法
17:57मत बना सप्य वादी मत बना सथिय वादी मत बना सुना हमार जार हम्हार।
18:10गुरूं Eric
18:14ऑचैंट।
18:19भभान जवालियां के चाहर हुआ
18:22।
18:25अरे रात के कोठा पर गई ला और रोज तो पैसा जे देत रहला मगर काल तोरे लगे नहीं रहल पबलिक सारी ताकत हो इम बेश्या क्यों रही यह भाई पनितवाब बेश्याले में भी जाला का
18:55कालू एक्षे जोन बाब मांस वाला अगल उधारे खेले रहल आज देखते ही तही बेश्याया गेले से पैसा मांगे इता महा कु कर्मी आदमी बाब अब धीरे-धीरे कथा में से अगनी उठे लगें तो कहत बाब
19:11काहे पंडित बाबा बाता हमसे लुकाया
19:16काहे पंडित बाबा बाता हमसे लुकाया
19:28देदा तु पैसा जल्दी मन बाउराया अरे हमार पैसा काली वाला देदा आना मन बाउरा तो सुना नहीं
19:45बतियान मन बात पोलावा उगारा अब भेर बढ़के बोलवा तच्पला वैशे मारा
19:58पंडितो गरम होई लगलें कि अरे एतना जूट न बोला था ही कवने लोग में छेकाना तो के मिली
20:10कहिया हम तरह को ठापड़ा लली बेश्या का कि सुना बेश्या के रूप में कल्यूग महराज कलन की दिखान यह लोगन के जूट यपाट बोलके भर मुले हुआ यह जुट वले हुआ मगर हमसे जूट न लगी तो हर रोज जाला अब पैसा देके आवला हम तो स्वचली त
20:40कहें जादा बगारा जी नसान गुरू रात लुट लाज्या वानिया के चाल न लुट लाज्या वानिया के चाल अब तो
21:02इजो तीन दिन का केस देखा है में पबलीक जोनवा पूरे छेत्र में सुहरत मज गई
21:07ए भाई उजोन पंडी दी का कथा मने सुने जाई लाओ तो महा कुकरमी आदमी होन
21:12मांसो खाना दारूओ पियना आ बेस्याले में भी जाना
21:18तमाम सिकाई तो उनकर बावनकर कथा के हो ना सुनी
21:21बंद हो गई जनता सारी पंडीत के कथा में आना
21:29हो गए मुहतार लगेता ना के नहीं चिकाना
21:37तब या वाज मेरी ध्याज से सुनो
21:42एक दम जनता आना बंद कर दिल इस कथा में
21:47आब जोन शिद्धा रुपयाम रोज-रोज पंडीती पावतर अंद बंद हो गईल
21:52अई एक एक उनकर पेशा रहल एक उनकर धन्धा रहल
21:55धन्धा बंद हो गईल
21:56दाना बिना मरे लग लगेल
21:58यग महराज दाना बिना मरे लगेल
22:00कलन की का हो आप जूट जपाट बोलबा की ना का है महराज तब तो ही बेश्या करूप धै क्या लगा काम कहीं सब हमसे मत पुछा यह बतावा की जूट बोलबा की ना ही
22:25क्वंडी जी कलन की अब जूट न बोलब अरे दाना दाना की हमार बच्चा मरे लगलन यह एक्षे हमार पेशार आली एक्षे हमार धंदार आल आव वो दुआ कि जोर मादू दिल पबलिक के भरका दला कोई हमके मनते नाबा तब बतावा कैसे हमार रोजी-रोटी चली कैसे ज
22:55तब कल्जुग महराज कल्जुग महराज राय दिलंग के सुना जब ऐसन बात हो तो आ रोजी-रोटी हमरे वजे से बंद भाई तो हमार तो एक्षे मक्सद रहल कि तू जूड जपाट बैमानी चोई इधर उधर का सब बात कहा तुए पर तैयार हुआ तो तो हार धंदाम �
23:25तो हो गए लेको अदिमिया नयावत हों कि काल अच्छा चलिया हम आई कोड़ी रूप बना के आई और तोंके खोजद गाव और हला करताई की ओई पंडीरी से भेग करना हमरे पीछे हो सकला दुचार्दा सदमी जा आजब जैहन तो आपका पैर हम पकड़ब आम मुहें मे
23:55कलन की उपाय तो छीक बतो ला तब काम जूड़ जपाट बोलबे कर अब बाकि हमार हावा पानी फेर बना दा तो भैल का बढ़ावा आउर बढ़ावा
24:09अरे आपने आपने को हीरू बनाए अतुरत जना वहां से भाई अरहाम इलहाबादी में
24:23तुरते को हीरू बनाए अब तो चला वहां से भाई तब बनके अरह बनके अगदम से पूरा मिया जाला का लाई
24:39आपने के अगदम से पूरा मिया जाला का लाई
24:48आपने के अगदम से पूरा मिया जाला का लाई
24:58गेलन हैं चुए कोड़ तन बदन में उनके यर जर भाईल शरीर
25:07अरहात मेर की अगुरी जर गईम अरहन जाता गीर छेंगत जाला लेचे गूरिया रे जाला का लाई
25:17भेलना खे जा चाला लेच गूरिया जाला का ल माई
25:22पहुचल ने पहले पंडी थी के गाह में, तो गाह के अंदर गया, गाह वालंग से भूछे भाई, जल्दी बोना, ए भाईयां,
25:49कहे गाह में जाके, गाह वालंग से पूछे भाई, ए पंडी जी कदा कहा हूं, कहावा बात भाई, हुए पहुत गुड़ा खानी आर्या जाला कला,
26:03कहा हुआ अरे भी आऊ-ऊ-पंडी जी कहा रालंग, कल जूँ महराज को रीकरों बना के देलन है,
26:13अरे भीया उपन्डी जी कहा रहालन कल्जुग महराज को रही करूप बना के गेलन है कालन की उपन्डी जी के हम पूछाया लें कहा हुआ
26:28कालना की भाई सुनी ला ठीक होनु सत्यबादी होन जोन कादेलन ठीक हो जाला हम हमरे कोड़ भैलबा तो हम बड़ा नाम सुन ले ही उनकर यही से उनके यहां आयल है तो लोग कहलन है गावाले कहलन है
26:48कहें गावाले की मादा एकदम से तूपागल कोड़ी महराज से कलन लोग के सुना पगलागल हुआ का कहें कि रे भाई कहें के आई से कहें का तो लोगन बड़ा नाम हो पंदी जी का अतूलोग इसे कह तो आप
27:07कहें गावाले की बादा एकदम से तूपागल अरे महागु गर्मी बापली दवा अक्हावा जाला भागल अरे जूटे लोग बाग दर सनी अरे जाला कला
27:23जुटेलोग बादाता है तर लुटुटेलोग बादाता हुआ हा थैक हो जाई हुआ तो सकला क्यों को ओहर जा के ठीकले हो पंदी जी को जाई हूए पंदी जी हूं
27:46गाहँवाले करल लोगी एतना भिश्वास है कि एतना ना सुले हुआ तो हो सकला क्यों को ओहर जाकर ठीक कहिले हो।
27:52पंडी जी चला जब देखले जाल जाल जाए गाहां भर जूट गहां तमासा देखे बडे के कोधी महराधी पंडी जी के करीब जाये लगलन।
28:02तो बरगत के नीचे परणीती बैठे सरव लटकाई।
28:07जब बर्गत के पेर तर गेलें हैं तो देखलें कि सच्छो पंडी जी अखेले पर चलो उनकर कफ़े सुने के उनाई आले
28:14बर्गत के नीचे पंडी जी पैठे सर्वेटाई
28:19अरे जांके वोही गिरा तरन पे और कहन लगा भी लिखाई सोबरन
28:28जाए के कोडी महराज का प़ेर पकड़ के कोडी महराज पंडीजी की प़ेर पकड़ के कहे लगें
28:34के सरकार रसवरन कैदा मर बड़न आ जाला
28:40कलन की सरकार बड़ा नाम आपके सुन लेए
29:04कलजुग महराच पोड़ी करूप बनाएके
29:06पंडी दी से कलन की बड़ा नाम सुन के तो हरा आल है
29:10तो चाथ से कोड़ी हमरे छेतर में तु ठीक कई ले हुआ
29:13हमरो खल्यान आपके जरी हो जा तो ठीक रहा था अब पंडी जी से बतियो ले रहा ना कि
29:18जब हम आई तो मुहे में पानी लेके हमरे उपरा जो नो
29:21हम पानी लेके फेके सुन्डर भाई शरीर तुरन ओई ओजना के अनुसार बता लेके अनुसार पंडी जी मुहे में पानी लेके अव कोडिया के उपरा जो नो आप फेक देलन जब फेकलन हैं तो सोबरन शरीर हो गई लगाव को लोग देखे लगलन ये भाई सच्चों पं
29:51अब पबलिक के विश्वास हो गई अब पंडी जी का फेर कथा चमक गई ला जूर जपाथ बोले शुरू कर दो अरे गुरु रम्मन कहें पंडी जी के अब जा गई तकदीर हो आवाज मेरी ध्यां मेरी दियो अब लिखते नदान राखा विश्वनाद के लाज्य हो याव
30:21अबलिक मेरी ध्यां मेरी दियो अर्यवाण पंडी जी वखते नदान राखा विश्वनाद के लावाण के लाजद सक्वें लाजव।
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