00:00हम सब कहते हैं मैं आजाद हूँ लेकिन सच पूछिए क्या वाके में हम आजाद हैं अगर मुहोव आपको खिचता है गुसा आपको जला देता है आदेते आपको कंट्रोल करती है तो फिर आप आजाद काहूँ में असल में हम अपनी ही मन के बंदी है
00:26एक गाउं में सादू रहते थे एक दिन उन्होंने अपनी सिस्यों से कहा कल सुबह जल्दी आना मैं तुम्हें आजादी का राज बताऊँगा
00:38सुबह जब सब पोचे सादू ने हर किसी के पैर में एक मुट्टी रसी से बांदा बारी पत्थर बांद दिया
00:49फिर बोले चलो अब मुसे मिलने पाड़ी पर आओ
00:53इस से चन्दिल लगे लेकिन बारी पत्थर के साथ हर कदम मुस्किल था
01:00कोई गिरा कोई ठक गया कोई चिलाने लगा
01:04गुर्देव ये क्या सजा है सादू मुस्कराए और बोले
01:09ये पत्थर तुमारा गुस्सा है तुमारे बुरी आदिते हैं
01:15तुमारा मोह है जब तक इने डोते रहोगे आजादी सरफ एक सपना रहेगे
01:24सब सिश्य समझ गए और पत्थर छोड़ कर पाड़ी की चोटी पर पहुचे
01:30बिना बोज यतरासान थी सादू ने कहा ये है आजादी
01:37बोच छोड़ो और देखो सफर कितना सुन्दर हो जाता है
01:42हम भी अपने साथ ऐसे ही पत्थर डोते हैं गुस्सा, आदिते, मो, डर, लालच
01:50इन बोजों के साथ हम चाय कितनी भी दोड़ लगाएं मन की चोटी पर नहीं पो सकते
01:56आजादी का मतलब है इन पत्थरों को छोड़ना और इनी छोड़ने के तरीका है जागरुता और द्यान
02:03जब आप द्यान में बैठते हैं अपने विचारों को देखते हैं तो आप पैचानते हैं कि ये बोज असली आप नहीं है
02:15ये तो मन की आदिते हैं जो बचपन से लेकर अब तक इखटा हुई है असली आप वो हैं जो देख रहा है जो सुन रहा है जो मैसूस कर रहा है लेकिन उनमें फसा नहीं है
02:32जैसे आसमान बादलों से डक सकता है लेकिन बादल आसमान को गुंदा नहीं कर सकते वैसे ही विचार और बावनाई आपके उपरा आश सकती हैं लेकिन अगर आप उन्हें पकड़ेंगे नहीं को आपको गुलाम नहीं बना सकती
02:53लोग सोचते हैं कि आजादी पाने के लिए कहीं बागना पड़ेगा
02:58सब को छोड़ना पड़ेगा, मरना पड़ेगा
03:01नहीं, आपको बस अपने बितर लोटना है
03:05अपने मन के पत्थर को छोड़ना है
03:09जब आप देरे देरे इन बोजों को छोड़ते हैं
03:13तो आप पाते हैं कि जीवन हलका हो गया, चलना आसान हो गया, सास लेना आसान हो गया, उस सबसे बढ़कर जीना आसान हो गया, तो पिरया आत्मा, अगर आप सच में आजाद होने चाहते हैं, तो अपने पत्थरों को पैचाना, उन्हें दीरे दीरे निच्चे रख दो, ध्य
03:43जब आप उसे पा लेंगे तो कोई ताकत उसे छिल नहीं सकते।
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