00:00क्या आपने कभी सोचा है कि स्री किर्शन का जनम आधी रात को कारागार में चारों और अंधिकार और बंदनों के बीच क्यों हुआ
00:17यह सिर्फ एक अत्यासिक गटना नहीं है यह हमारे बीतर की आत्रा का परतिक है यह जनमाश्टमी सिर्फ एक त्वार नहीं बलकि हर इनसान की आत्मा की काहनी है
00:32अन्देकार से प्रकास की और, बंदन से मुक्ती की और, भै से प्रेम की और
00:38उस रात जब मुथ्रा की गलियों में सनाटा था, जब कंस का आतंक चरम पर था
00:45जब हर तरफ भै का माहुल था, ठीक उसी समय जिल के बीतर, देवकी की कोग से एक प्रकास का जनम हुआ
00:54वै प्रकास था किर्शन, प्रेम, आनंद, और संतरता का प्रतिक, यह कानी सिर्फ मुथ्रा की नहीं, यह हमारी बितर की भी कानी है
01:05हम भी अपने जिवन में कई बंदनों में फसे होती हैं, डर, कुरोध, इर्श्या, लोग
01:13और तभी बितर का किर्शन, तब जनम लेता है, जब हम अपने बितर की गरायों में सांती को मैसूस करते हैं
01:23कहते हैं, उस समय जब खिर्शन जनमें, तो पैरेदार सो गए, दरवाजों के ताले अपने आप खुल गए, और यमनों का पानी रस्ता देने के लिए अलग हो गया
01:37यह क्या है, यह कोई बारिच मतकारी नहीं, बलकि यह संकेत है, जब बितर का परकास जागता है, तो जिवन के ताले अपने आप खुल जाते हैं, डर का पानी अपने आप रस्ता देता है, और प्रिस्थितिया आपके पक्ष में हो जाती है
01:57हम सब के जिवन में जिर्माष्ट में आती है, जब हम अपने बितर बंदर मैसुस करते हैं, लेकिन साथ ही एक नई चेतना भी जागती है, उच चेतना को जिर्म देने के लिए जरूरी है धियान
02:13जब आप ध्यान में बैठते हैं, तो आप खुद अपने बितर के किर्सन से मिलते हैं, वे किर्सन जो आपके मन के अंदिकार को दूर करता है, जो आपके बितर प्रेम की बासूरी बजाता है
02:28जनमाष्टि में हमें यह याद दिलाती है कि हर अंदिकार का अंत होता है, चाहे कितनी भी लंबी रात हो, सुबह जरूर आती है, चाहे कितनी भी बंदन हो, बितर का प्रकास उन्हें तोड़ सकता है, और वे प्रकास कोई बाहर से नहीं आता, वे आपके बितर से ही है
02:51आज रात जब आप जनम मेश्टी में एक उत्सव बनाएं तो सिरफ बारिज जाकी, मटकी फोड और नर्तने देखे
03:01अपनी आखे बंद करें और देखें कि आपके बितर भी एक कारगर है
03:07मन का कारगर जिसमें आप खुद को कैद कर रखते हैं
03:12वह भी एक जनम के संभावना है अपके बितर का किर्शन जो प्रेम है, करूना है, जो सौत तुरता है
03:21जनमनष्ट में का असले अर्थ यही है अपने बितर के अंदकार को पहचानना, उस अंदकार में परकास को जनम देना
03:30और जब वह परकास जनम लेता है तो जिवन में चमतकार सुरू हो जाते हैं
03:35तो इस जनमनष्ट में सरफ बगवान के मुर्ति के सामने दिपक न जलाए बलकि अपने बितर भी एक दिपक जलाए
03:43यहीं सबसे बड़ा उत्सव है, यहीं सबसे बड़ी पोज्या है
03:47चनल स्वामित चेतना ध्यान साधना के साथ जुड़े रहे
03:50हम इसी तरह के अध्यात्मिक संदेज रोज साजा करते हैं
03:54जो जीवन को बितर से बदल देते हैं
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