00:00एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया
00:06मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था गुर्बत मा की बिमारी और एक बाई जो पड़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था
00:13अजलान ने जब महबत के जार किया तो एमन ने हसते हुए कहा
00:17मेरे जिसे लोग से दौव में याद रखे जाते हैं
00:20खौबों में नहीं बसाये जाते
00:22मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया
00:26लेकिन जाव में सिरफ, तंस, तजलील और साप इंकार मिला
00:30अजलान की वालदीने का अगर तुम ने उसे शादी की तो हमारे लिये तुम मर गए
00:36अजलान जो मा का लाला और बाप का पखर था अंदर से तूट गया
00:41मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा
00:44एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़ की
00:48उसने युनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया और वापस सरगोदा चली की
00:53दो साल गुजर गए अजलान ने बहुत तलाश किया मगर उसका पता न मिला
00:58पर एक दिन एक खेराती हस्पताल में जब एक अपनी कमपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया
01:04उसने एमन को देगा
01:06सुपीद कोड में मरीजों का इलाज करती हुई
01:09दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी
01:12अपने मा का इलाज करवा चुकी थी
01:14और अब दूसरों के खिद्मत कर रहे थी
01:17अजलान ने सब के सामने कहा
01:19मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं किरदार में होती है
01:23इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा
01:26और यह एक सादी सी लड़की जो खाबों से डिरती थी
01:29एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलंती
01:34ड्राम वसियल के हवाले से अपने राए के जार लाजमी कमेंट करें
01:38साथ में हमारे येटिव का चेनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
01:41तेंक्स पर वाचिंग, आलाह आफ़ेज
01:43हलो वीवर्ज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली
01:49नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की
01:53जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी
01:56वो खिताबों खामोशी और खौबों के दुने में रहने वाली लड़की थी
02:00जिसे अपने जाद पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं
02:04वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोड़ जाती
02:09जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई
02:13जो एक शौख मगर समझतार ललका था
02:16अमीर गराने से तालुक रखने वाला
02:18मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं
02:21अप्तिदा में के दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ
02:25पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोटे जूमले
02:28जो हिस्ता हिस्ता दिल के बादों में बदलने लगे
02:31अजलाम को एमन की साथगी, शर्म और आंकों में चुपी दर्द
02:35ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा
02:37एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया
02:44मगर उसके अंदर एक खौब चुपाता गुर्बत
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