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00:00पहलेज एफ गए जो चुछ आपकी किसमत में होता है, सिर्व वही आपको मिलते हैं.
00:15जैसे तुम मेरी किसमत में होता है.
00:18अबबड के नशे के आगे, सब नशे भूल जाओ.
00:23तो भूलना चाहता हूँ.
00:26लेकिन वने साइड़ लव में सिर्फ तकलीफ होती है.
00:30कर दो कर दो
01:00कर दो
01:01कर दो
01:02कर दो
01:03कर दो
01:04कर दो
01:05कर दो
01:06कर दो
01:07कर दो
01:08कर दो
01:09कर दो
01:10कर दो
01:11कर दो
01:12कर दो
01:13कर दो
01:14कर दो
01:15कर दो
01:16कर दो
01:17कर दो
01:18कर दो
01:19कर दो
01:20कर दो
01:21कर दो
01:22कर दो
01:23कर दो
01:24कर दो
01:25कर दो
01:26कर दो
01:27कर दो
01:28कर दो
01:29यार तुम बागल बागल तो नहीं हुगी है एक ही बात की रट लगाई भी है जब मैंने बोला है कि आराम से बैठकर इसमिनांदे बात करेंगे इतनी परिश्वाइब मुझसे इस तरीकी ही बात है करके तुम इसका मेरा रास्ता खोटा मत करें खुदा आफिस
01:59चाहे बरसों तलक वो आके ना मिले लेकिन हमको लाखों हजारों उससे होंगे लेकिन
02:17बेवफाओं से भी तो प्यार ही होता है यार ऐसा भी हो यार वैसा भी हो यार जैसा भी हो वो यार ही होता है
02:38यार को यार होता है बेवफाओं से भी तो प्यार होता है यार को यार होता है
02:58पर्दाव पर्दावच साथ सब्सक्राइब एक तरच परच जाएवी है, जब मैं भूल है कि अपर से प्रच्ण करें तरहे हैं, तरहे हैं तो फिर्च फिर्च की बादे करें, तो बारा स्थेटित पर रहुत हैं, तो बीड़ा रास्ते करें तो
03:28यार तो पागिल वाकल तो नहीं हुआ हुआ हुआ है
03:58चाह बरसों तलक वो आके ना मिले लेकिन हमको लाखों हजारों उससे होंगे लेकिन
04:10बेवफाओं से भी तो प्यार ही होता है
04:20यार जैसा भी हो यार वैसा भी हो यार जैसा भी हो वो यार ही होता है
04:30यार दो यार होता है
04:41हलो वीवेर्ज एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालू करकने वाली नहायत बावकार तालीमियपता और हसास लड़की
04:49जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी वो खिताबों खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाले ललकी थी जिसे अपने जात पर वखर तो था मगर दिखाने के शवक नहीं
05:01वो रोज यूनिस्टी आती अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई जो एक शौख मगर समझतार ललका था
05:12अमीर गराने से तालुक रखने वाला मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं
05:18अप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ फिर लाइबरिरी में सलाम पिर चोटे चोटे जूटे जूमले जो हैस्ता दिल के बादों में बदलने लगे
05:28अजलान को एमन की साथगी शरम और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा
05:34एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया
05:40मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था गुर्बत मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोड़कर मेहनत मजदूरी कर रहा था
05:47अजलान ने जब मौबत के जार किया तो एमन ने हसते हुए कहा
05:51मेरे जिसे लोग से दौव में याद रखे जाते हैं खौबों में नहीं बसाये जाते
05:56मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया
06:00लेकिन जवा में सिरफ तंस तजलील और साप इंकार मिला
06:04अजलान की वालदीने का अगर तुम ने उसे शादी की तो हमारे ले तुम मर गए
06:10अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था अंदर से तूट गया
06:15मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा
06:19एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़ की
06:22उसने युनिवरस्टी चोल दी पून बंड कर दिया और वापस सरगोदा चली की
06:27दो साल गुजर गए अजलान ने बहुत तलाश किया मगर उसका पता न मिला
06:32पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में जब अपनी कमपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया
06:39उसने एमन को देगा
06:40सुपीध कोड में मरीजों का इलाज किरती हुई
06:43दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी
06:46अपने मा का इलाज करवा चुकी थी
06:49और अब दुस्तों की खिदमत कर रहे थी
06:51अजलान ने सब के सामने कहा
06:53मुझे आज समझाए के इज़त नामे नहीं केरदार में होती है
06:57इस बर असलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा
07:00और यो एक साधी सी लड़की जो फ़ाबों से डिरती थी
07:03एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी
07:08ड्राम वसील के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें
07:12साथ में हमारे हैटूब का चीनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
07:15तेंक्स पर वाचिंग अल्हाफिस
07:17हलो वीवर्ज एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालुक रिकने वाली
07:23नहायत बावकार तालीम यपता और हसास लड़की
07:27जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी
07:30वो खिताबों खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाले लड़की थी
07:35जिसे अपने जाद पर वखर ता मगर दिकाने के शवक नहीं
07:39वो रोज यूनिस्टी आती अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती
07:43जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई जो एक शौख मगर समझतार ललका था
07:50अमीर गराने से तालुक रखने वाला मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं
07:56अप्तिदा में के दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ फिर लाइबरी में सलाम पिर चोटे चोटे चोटे जूमले जो हरस्त हरस्ता दिल के बादों में बदलने लगे
08:05अजलान को एमन की साथगी शर्म और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा
08:12एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया
08:18मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोड़कर मेहनत मजदूरी कर रहा था
08:25अजलान ने जब मौबत के जार किया तो एमन ने हसते हुए कहा
08:29मेरे जिसे लोग सिर्व दौब में याद रखे जाते हैं
08:32खौबों में नहीं बसाए जाते
08:34मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया
08:38लेकिन जाव में सिर्व तंस, तजलील और साफ इंकार मिला
08:42अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए
08:47अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था अंदर से तूट गया
08:53मगर अजलान के सामने मजबूत कड़ा रहा
08:56अजलान ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़की
09:00उसने युनिवरस्टी चोल दी पून बंड कर दिया और वापस सरगोदा चली की
09:05दो साल गुजर गए अजलान ने बहुत तलाश किया मगर उसका पता न मिला
09:10पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में जब अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया
09:16उसने एमन को देगा
09:18सुपीद कोड में मरीजों का इलाज करती हुई
09:21दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी
09:24अपने मा का इलाज करवा चुकी थी
09:26और अब दुस्तों की खिदमत कर रहे थी
09:28अजलान ने सब के सामने कहा
09:31मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है
09:35इस पर अजलान के वालदीन ने खुद रिष्टा मांगा
09:38और यूए एक साधी सी लड़की जो फ़ाबों से डिरती थी
09:40एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलंती
09:46ड्राम वसीरल के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें
09:50साथ में हमारा येटिव का चीनल सबस्क्राइब करना मत बूलिए
09:53तेंक्स पर वाचिंग, लाहाफिस
09:55हलो वीवर्ज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली
10:01नहायत बावकार, तालीम यपता और हसास लड़की
10:05जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी
10:08वो खिताबों, खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाले लड़की थी
10:12जिसे अपने जाद पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं
10:16वो रोज यूनिविस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोड़ जाती
10:21जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई जो एक शौख मगर समझदार ललका था
10:28अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं
10:33अप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरिरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोटे जूमले, जो हरस्ते हरस्ता दिल के बादों में बदलने लगे
10:43अजलान को एमन की साथगी, शर्म और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा
10:49एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था
11:03अजलान ने जब मौबत के जाहर किया तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग से दौव में याद रखे जाते हैं, खौबों में नहीं बसाये जाते
11:11मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जाव में सिर्फ, तंस, तजलील और साप इंकार मिला
11:20अजलान की वालदे ने का, अगर तुम ने उसे शादी की, तो हमारे लिए तुम मर गए
11:25अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर अजलान के सामने मजबूत कड़ा रहा
11:34एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़ की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पून बंड कर दिया और वापस सरगोदा चली की
11:42दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता न मिला
11:47पर एक दिन एक खेराती हस्पिताल में, जब एक अपनी कमपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा
11:55सुपित कोड में मरीजों का इलाज किरती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का इलाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी
12:06अजलान ने सब के साम ने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं किरदार में होती है
12:12इस बर असलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक साधी सी लड़की जो फ़ाबों से डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी
12:23ड्राम वसील के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे एक टूफ का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, अल्हाफ़ आफ़ेज
12:32हलो वीवर्ज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार, तालीम यपता और हसास लड़की, जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों, खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाली लड़की थी, जिसे अ�
13:02वी जो एक शौख मगर समझतार ललका था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं, अब्तिदा में के दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोटे जूमल
13:32महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोल कर महनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब महाबत के जार किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते है
14:02गए, अजलान जो मा का लाडला और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़ की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बन कर दिया, और वापस सरगोदा चली
14:32देखा, सुपीद कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामें नहीं केरदार में होती है, इस �
15:02अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारा एटूफ का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, लाहाफिज, अल्हाफिज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेहर से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार, तालीम यपता और हसास लड
15:32विस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोड जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, अब्तिदा में के
16:02ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोड़कर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौ
16:32तजलील और साप इंकार मिला, अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाड़ा और बाप का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी �
17:02पर एक दिन एक खेराती हस्पिताल में, जब अपनी कमपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीध कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खित्मत कर �
17:32दिर्टी थी, एक ऐसी महबत भागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्रॉम वसीरल के हवाले से अपने राए के जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे येटिव का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, अलाह आफ़िस, हलो वीवर्
18:02वीशी और खौबो की दुने में रहने वाले लड़की थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिविस्टी आती, अपना काम करती, और तरहा वापस लोड़ जाती, जब तक के उसके मुलाकात आजलान से नहीं हुई, जो एक श
18:32जो हैस्ता दिल के बातों में बदलने लगें, अजलान को एमन की साथगी, शर्म और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दड़कते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुप
19:02जाबों में नहीं बसाये जाते, मगर अजलान ने हार नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जाब में सिरफ तंस, तजलील और साथ इंकार मिला, अजलान की वालदेने का अगर तुम ने उससे शादी की, तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का
19:32कर दिया और वापस सरगोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता ना मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में, जब एक अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीद कोड में मरीजों का �
20:02के इज़त नामे नहीं किरदार में होती है, इस बर असलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यो एक साधी सी लड़की जो फ़ाबों से डिरती थी, एक एसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्राम वसील के हवाले से अपने राय के जार �
20:32तालीम यपता और हसास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खौबों की दुने में रहने वाले लड़की थी, जिसे अपने जात पर वखर ता, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करत
21:02मगरूर बिलकुल नहीं, अब्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे जूटे जूमले, जो हरस्ते हरस्ता दिल के बादों में बदलने लगें, अजलान को एमन की साहथगी, शरम और आंकों में
21:32रहा था, अजलान ने जब मौबत के जाहर किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खुआबों में नहीं बसाये जाते, मगर अजलान नहार नामा नहीं, अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवब में सिर्
22:02मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी तो खुद पीचे हड़ की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया और वापस सरकोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता न मिला, पिर एक दिन �
22:32मा का इलाश करवा चुकी थी और अब दूस्तों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के साम ने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक साधी सी लड़की जो खौब
23:02हेलो वीवर्ज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालुक रिकने वाली, नहायत बावकार तालीमी अपता और हसास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खौब के दुने में रहने वाली लड़की थी, जिसे अपन
23:32ही हुई जो एक शौख मगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, इब्तिदामें के दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे चोट
24:02थे महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक बाई जो पढ़ाई चोड़कर महनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे �
24:32मर गए, अजलान जो मा का लाडला और बाव का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बन कर दिया, और वापस सर गोदा च
25:02को देखा, सुपीद कोड में मरीजों का लाज किरती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामें नहीं किरदार में होती है, �
25:32के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे येटिव का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, अलाह आफिस, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार, तालीमी अपता और हसास लड�
26:02कोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोड जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई जो एक शौख मगर समझतार ललका था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, अब्तिदा मे
26:32कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, अमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलक ते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौ
27:02तजलील और साप इंकार मिला, अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उसे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाड़ा और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी द
27:32पर एक दिन एक खेराती हस्पिताल में, जब एक अपनी कंपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीध कोड में मरीजों का लाज करती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूस्तों के खिदम
28:02माबू से डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्राम वसीरल के हवाले से अपने राए के जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे येट्व का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तेंक्स पर वाचिंग, अल्हाफिज, थेंक्स
28:32खामूशी और खौबो की दुने में रहने वाले ललकी थी, जिसे अपने जात पर वखर तो था, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती, जब तक कि उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख म�
29:02जुमले जो हैस्ता हैस्ता दिल के बातों में बदलने लगें, अजलान को एमन की साहथगी, शरम और आंकों में चुपी दर्द ने कुछ ऐसा जुकला कि वो दिल दे बेटा, एमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक ख
29:32खवाबों में नहीं बसाये जाते, मगर अजलान ने हर नामा नहीं अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवाब में सिरफ तंस, तजलील और साप इंकार मिला, अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की, तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो
30:02पून बन कर दिया और वापस सरगोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता ना मिला, पिर एक दिन एक खेराती हस्पताल में, जब अपनी कमपनी की तरफ उसे इमदाद देने गया, उसने एमन को देगा, सुपीद कोड में मरीज
30:32जाए कि इज़त नामें नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक साधी सी लड़की जो खाबों से डिरती थी, एक ऐसी महबत पागी जो वक्त, जात और हैसियत से बुलन थी, ड्राम वसील के हवाले से अपने रा
31:02तालीम यपता और हसास लड़की जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों खामोशी और खाबों की दुन्या में रहने वाले लड़की थी, जिसे अपने जात पर वखर ता, मगर दिकाने के शवक नहीं, वो रोज यूनिस्टी आती, अपना काम कर
31:32पर मगरूर बिलकुल नहीं, अप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरीरी में सलाम, पिर चोटे चोटे जूटे जूमले, जो हैस्ते हैस्ता दिल के बादों में बदलने लगें, अजलान को एमन की साहथगी, शर्म और आंको
32:02कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जाहर किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग सिर्फ दौाओं में याद रखे जाते हैं, खवाबों में नहीं बसाय जाते, मगर अजलान नहार नामा नहीं, अपने वालदीन को इसे मिलवा लिया, लेकिन जवा में सिर्�
32:32मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़ की, उसने यूनिवरस्टी चोल दी, पौन बंड कर दिया, और वापस सिर्गोदा चली की, दो साल गुजर गए, अजलान ने बहुत तलाश किया, मगर उसका पता न मिला, पिर एक
33:02अपने मा का इलाश करवा चुकी थी, और अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए कि इज़त नामे नहीं केरदार में होती है, इस बर अजलान के वालदीन ने खुद रिश्टा मांगा, और यूए एक साधी से लड़की जो �
33:32हाफिज, खिलो वीवर्ज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिव करकने वाली, नहायत बावकार, तालीमी अपता और हसास लड़की, जो लाहूर में मास्टर की तालीम हासिल कर रही थी, वो खिताबों, खामोशी और खौबों के दुने में रहने वाली लड़की �
34:02नहीं ही हुई जो एक शौख मगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर महरूर बिलकुल नहीं, इप्तिदा में इनके दर्में सिर्फ एक नोट बुक का तबादला हुआ, पिर लाइबरिरी में सलाम, पिर चोटे चो
34:32करते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोड़कर महनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने जब मौबत के जार किया, तो एमन ने हसते हुए कहा, मेरे जिसे लोग से दौाओं में याद रखे जात
35:02तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशानी देखी, तो खुद पीचे हड़की, उसने यूनिवरस्टी चोड़ दी, पौन बंड कर दिया, और वापस सर
35:32ने एमन को देखा, सुपीद कोड में मरेजों का लाज किरती हुई, दो सालों में डाक्टर बन चुकी थी, अपने मा का लाज करवा चुकी थी, अब दूसरों के खिदमत कर रहे थी, अजलान ने सब के सामने कहा, मुझे आज समझाए के इज़त नामें नहीं केरदार में ह
36:02सिरल के हवाले से अपने राए की जार लाजमी कमेंट करें, साथ में हमारे एक्टिव का चीनल सब्सक्राइब करना मत बूलिए, तैंक्स पर वाचिंग, अलाहाफ़ेज, एमन सरगोदा के एक चोटे से शेह से तालिक रिकने वाली, नहायत बावकार, तालीमी अपता और हस
36:32और रोज यूनिविस्टी आती, अपना काम करती और तरहा वापस लोट जाती, जब तक के उसके मुलाकात अजलान से नहीं हुई, जो एक शौख मगर समझतार लड़का था, अमीर गराने से तालुक रखने वाला, मगर अपने नाम और दोलत पर मगरूर बिलकुल नहीं, �
37:02और ने कुछ ऐसा जुकला के वो दिल दे बेटा, अमन ने भी पहली बार अपने दिल को किसी के लिए दलकते महसूस किया, मगर उसके अंदर एक खौब चुपा था, गुर्बत, मा की बिमारी और एक वाई जो पढ़ाई चोल कर मेहनत मजदूरी कर रहा था, अजलान ने ज
37:32तन्स, तजलील और साप इंकार मिला, अजलान की वालदे ने का अगर तुम ने उससे शादी की तो हमारे लिए तुम मर गए, अजलान जो मा का लाला और बाब का पखर था, अंदर से तूट गया, मगर एमन के सामने मजबूत कड़ा रहा, एमन ने जब अजलान के परेशा
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