00:00माबारदियुद के बाद आश्वत हमा ने गरोध में आकर उत्राई गर्म में पल रहे अभी मन्यू के पूत्र पर ब्रम मास्तर ला दिया ब्रम मास्तर का उदिश से पंड़ वंस को समाप्त करना था उत्रा ने बैवीत ओकर स्रीकिसन से प्रातना की ए ब्रभू मेरी गरब मे
00:30अपनी माया से कौश परदान किया ब्रम मास्तर का बर्भा उनकी दिवे सक्ति के सामने निस्वल हो गया इस प्रकास रिकिसन ने ने के और उत्राई गर्म में पल रहे सिसो की रख्षा की पलकि बंड़ वंस को स्माप्त होने से भी पच्चा लिया यही सिसो आके चलकर रा�