00:00आपने सोचा कभी कि बारूत तो नई नई चीज है ये पटाखे कहां से आ गए परंपरा में सोचा कभी
00:07जाके आज पढ़िएगा कि पटाखे जुड़े ही कब दिवाली के साथ अभी हाल में जिसको हम जोड रहे हैं सनातन
00:14सनातन माने काला तीत आपको ऐसा लगने लगा जैसे
00:19दिवाली माने पटाखा पटाखा तो अभी हाल में बजना शुरू हुआ है पटाखा तो था ही नहीं कभी पर जब
00:25असली चीज नहीं पता होती है धर्म की गहराई नहीं पता होती है तो सतही चीज ही असली लगने लगती
00:31है लगता है दिवाली माने यही तो होता है जालर ल
00:49जो भी समझदारी या सेंस रखता हो, कि किसी अच्छी चर्चा में सम्मिलित हो सके, काम से अवकाश है, बैठिए
01:02और वो बाते करिए जो वास्तों में सत्संग कहलाती है.