00:00श्री राम चंदर चौधा साल तक शौपिंग कर रहे थे क्या तो उनके त्योहार पर आप शौपिंग करने कहाई निकल
00:08पड़ते तुक क्या है थोड़ा समझाईए
00:12उनको तो बैचारों को वस्तर भी न जाने कहां से उपलब्ध होते होंगे कुछ भरोसा नहीं
00:17थोड़ा सोचिए सोते कहां रहे होंगे बिजली तो छोड़ दीजे जंगल में तो दिये भी नहीं मिलते होंगे खाते पीते
00:27क्या रहे होंगे
00:28मिठाईया पाते थे वो गुजिया बर्फी रसकुला जब उन्होंने 14 साल तक मिठाई नहीं पाई
00:39तो आप ये मिठाई बाजी क्यों शुरू कर देते हैं दिवाली पे भाई कभी खयाली नहीं किया न और ऐसा
00:46नहीं कि वो जंगल में थे इसलिए भोग विलास से दूर थे वो लौट के भी आये महल में
00:52तो भी वो जीए वैसे ही जैसे जंगल में रहते थे राजा भी हो गए तो भी उन्होंने ये नहीं
00:59करा था कि लाओ रसमल आई
01:02जंगल में थे तो फिर भी सीता साथ थी राज्य मिला तो सीता भी छूट गई
01:09ऐसे थे राम
01:11और ऐसी थी सीता
01:15जानते हैं क्या
01:16अगर आप इमांदारी से अगली दिवाली की तैयरी करेंगे
01:19तो हर रात दिवाली हो जाएगी
01:22फिर दिवाली आपके लिए 365 दिन ही नहीं रहेगा
01:27364 रातें समझ लीजिए दिवाली हो गई
01:32एक दिन वाली दिवाली तो आती है चली जाती है
01:35इतनी दिवाली आई चली गई
01:38कुछ बदला?
01:41एक सच्ची दिवाली मना लेंगे सब कुछ बदल जाएगा
01:45क्योंकि उसको मनाने के लिए सब कुछ बदलना पड़ेगा
01:50सोयम को बदलना पड़ेगा
01:51एक दिवाली सब कुछ बदल देगी जो 40 दिवालिया नहीं बदल पाई
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