00:00बच्ची पैदा होती है, क्या जानती है, उसे कुछ नहीं पता, वो पैदा होने के कुछ दिनों, कुछ महीनों के
00:08भीतर हम उसके भीतर ना जाने क्या-क्या प्रभाव ठूस देते हैं, कैसी-कैसी माननेताएं उस पर आरोपित कर देते
00:16हैं, कई बार संसकारों के नाम पर, कई �
00:22शिक्षा बोल करके, अभी पर्मपरा बोल करके, ये सब जब तक वो लड़की धो रही है, तब तक उसको भी
00:32तरी आजादी संभव नहीं है, एकदम संभव नहीं है, वो अपने आपको दूसरों की निगाहों से देखती रहेगी, उसको बत
00:39ये पता है, कि मुझे अच्छा बन
00:51चुका रही है, अब बाहर से तो आप उसको कह देते हो कि तुम प्रोफेशनल एटायर वाली कॉपोरेट वूमन बन
00:58जाओ, और भीतर उसके बहुत सारा प्रदूशक तद तो अभी जमाही हुआ है, जिसका कोई तुक नहीं, जिसका कोई तर्क
01:09नहीं, ज्यादा तरिये हमार
01:20का रिष्टा बनाया है, जो पूरा धाचा है, जो परदाइम हमने तयार करा है, और वो कोई अध्याप में से
01:26थोड़ी आ रहा है, वो धर्म से थोड़ी आ रहा है, वो एक सामाजिक विक्रती है, पर उसको बच्ची को
01:33यह नहीं पता होता है, कि उसको एक विक्रती डाल दी �
01:35गई है, कि विकार उसके भीतर ठूस दिये गए है, वो उनको पूझना शुरू कर देती है, वो उनको शुद्ध
01:42मानना शुरू कर देती है, उसके लिए वो पवित्र जैसे हो जाते हैं, और जो चीज़ पवित्र जाती हो तो
01:48अब छोड़ोगे नहीं, तो उनको पकड़ के �
01:50रखती है अब बाहर से वो अंग्रेजी भी बोल रहे है बाहर से वो सकता है विदेश वुदेश घूम आई
01:55है प्रुफेसर बन गई है
01:59वेज्ञानिक बन गई है प्रशासनिक अधिकारी बन गई है राजनेता बन गई है लोकसभा पहुंच गई है लेकिन भीतर से
02:05वही बनी हुई है जो उसकी दादी पर दादी हुआ गरती थी लगभग होई कुछ बद्रा होगा थोड़ा बहुत जाधा
02:13नहीं बदल रहा आंख�
02:19इसे में फिर जिसको आप विमेंस लिबरेशन या एंपावर्मेंट सशक्ती करण बोलते हो वह बेमानी हो जाता है