00:00अगर अंजाम की बार बार याद आ रही है तो काम गड़बड़े अगर भविश्य की बार बार याद आ रही
00:07है तो वरतमान गड़बड़े
00:13भविश्य के सताई कितने बैठे हैं यहाँ पर हाँ उठा दो
00:20भविश्य तो आया नहीं तुमां क्या डर रहे हो
00:25डरो वरतमान से गड़बड वरतमान में है पर वरतमान को बदलना नहीं चाहते इसलिए आप डर को भी लंबित कर
00:35रहे हो
00:37आप अपने डर को भी प्रोकैस्टिनेट कर रहे हो
00:41डरने की जरूरत में संदे है
00:43इस पल जो हो रहा है उससे डरो
00:46पर इस पल जो हो रहा है उसको आप बदलना चाहते नहीं
00:50तो इसलिए आप अपने डर को आगे के लिए स्थखित कर देते हो
00:53आप कहते हो भविष्य से डर लग रहा है भविष्य से क्या डर होगे भविष्य तो अग्यात है उससे कौन
00:57डर सकता है जिसका कुछ पता ही नहीं उससे डर कैसे लगेगा
01:02आप डरे हुए निसंदे हो पर आपका डर वास्तव में आज जो है आपकी इस्थिति उससे है और इस बात
01:10को आप मानना नहीं चाहते, तशेले आप अपने डर को भी आगे स्थापित कर देते हो जैसे डर आगे का
01:15हो आगे का किसे डर नहीं होता है, डर अभी का होता है, अभी
01:19अपनी जिन्दगी जैसी चल रही है उस पे थोड़ा ध्यान दीजिए कुछ बदलेगा