00:00देखो भाई, ये सब जो हम अभी कर रहे हैं न, मैं ऐसे खड़े हुए हैं, ये आपत धर्म हैं,
00:09ये आपात काल की निशानी है, ये कोई ऐसा नहीं है कि अध्यात्म का मतलब ही होता है ये सब
00:16करना,
00:17ये सब उस समय की निशानी है कि जैसे समझ लो कि
00:23रड़ भूमे में सब खड़े हो गए हैं और
00:27सिनाएं तयार हैं ये वो वो चल रहा है सब
00:30लेकिन इसका मतलब नहीं कि जीवन अपनी सहजता में ऐसा ही होना चाहिए
00:37क्रिष्णी थोड़ी कहा रहे हैं कि हमेशा लड़ते ही रहो क्या कहा रहे हैं पर हां कौरोपक चितना आवी हो
00:46गया है तो लड़ो तो लड़ो ठीक है लड़ो नहीं तो जितने दुर्योधन है ये च्छाहेंगे भारत पर पूरी दुनिया
00:58पर इसलिए लड़ो
01:02समझ में आरी बात लेकिन ये कोई आखरी बात नहीं है कि लड़ते ही रहना है आपका जो सवभाव है
01:12वो संघर्ष का नहीं विश्राम का है भूलिएगा नहीं और इसलिए जब आप संघर्ष कर रहे होगे तो थोड़ा थोड़ा
01:21अखरेगा अखरना चाहिए वो
01:24अखरना ही आपको ये याद दिलाएगा कि इस संघर्ष के पार भी निकलना है कभी, लेकिन ये नहीं कि अखर
01:34रहा है तो आपने संघर्ष रोक दिया, ना, ना, ना, ना, जब तक गंदगी बाकी है, तब तक अगर सांस
01:42चल रही है तो संघर्ष चलेगा, भले ही हमें भीतर से
01:45ठकान हो रही हो, बुरा लग रहा हो, शरीर है, मन है, लेकिन फिर भी लगे रहेंगे