00:03दिवाली पंचपर्व के दूसरे दिन यानी नरक चतुरदशी पर जहां एक तरफ यम दीपदान और अभ्यांग स्नान का महत्व है
00:10तो वहीं इस दिन भगवान श्रेक्रश्न के साथ मातालक्षमे और भगवान गनी शीकी भी पूजा का विधान है।
00:54आईए बताते हैं।
01:00लड़ो, खीर या सफेद मिठाई, फल, पंचामरत, आचमनी, कलश, पंचमेवा, तामबूल और नारियल।
01:06नरक चतुरदशी के दिन सूर्योदे से पहले शरेर पर तिल के तेल और उप्टन की मालश करें।
01:11इसके बाद जल में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर सनान के बाद साफ या नयवस्त्र पहन ले उत्तरिया पूर विधिशा
01:18की और मुह करके बैठें।
01:43पूजा के लिए तीन शुब मुहरत हैं।
01:49थापित कर हाथ में जल और अक्षत लेकर पूजा का संखल पले।
02:20अकाल मृत्यू से भैक मुक्ति के लिए सूरदयर पूजन के बाद संध्याकाल में एक बड़ा चौमुखी दीपक ले।
02:38ये मिट्टी का हो या फिर आटे का भी हो सकता है।
02:56प्रक्षत के बाहर दक्षन दिशा की तरफ रखना चाहिए।
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