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Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। श्रीकृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसके कारण कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात में की जाती है। उस दिन आधी रात में खीरे के जरिये उनका जन्म करवाया जाता है, खासकर डंठल वाले खीरे से। खीरे से श्रीकृष्ण के जन्मदिन का क्या है सम्बन्ध, ये पहलू बहुत ही दिलचस्प है। साथ ही खीरे से उनका जनम कैसे कराया जाता है, उसकी सही प्रक्रिया भी जाननी जरूरी है।Janmashtami 2026: Laddu Gopal Ka Janm Kheere Se Kaise Karen ?

Lord Krishna's birthday is celebrated on the eighth day of the dark fortnight of the Bhadrapada month. Krishna was born at midnight under the Rohini Nakshatra. Consequently, Krishna Janmashtami puja is performed at night. At midnight, Krishna is born using a cucumber, specifically a cucumber with a stalk. The connection between Krishna's birthday and cucumber is a fascinating one. It's also important to understand the exact process of how he was born using a cucumber. So, let's understand both...

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~HT.318~ED.120~PR.111~VG.HM~
Transcript
00:03जन्माश्टमी पर आधी रात को भगवान श्री कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है
00:08भक्त वरत रखते हैं और रात में लड्डु गुपाल का जन्म कराकर उनका अभिशेक और श्रिंगार करते हैं
00:14इस साल जन्माश्टमी चार सतंबर को मनाई जा रही है
00:17अगर आप भी घर पर कान्हा का जन्म करने की तैयारी कर रहे हैं
00:21तो आईए इस विडियो में आपको बताते हैं कि जन्माश्टमी पर भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय
00:27पूजा की कौन सी विधी आपको अपनानी चाहिए और खीरे से कैसे कराएं श्री कृष्ण का जन्म
00:33श्री कृष्ण का जन्म डंठल वाले खीरे से कराया जाता है
00:38क्योंकि माननेता है कि जब बच्चे का जन्म होता है तो बच्चे का गर्बनाल काट कर उसे मा के गर्ब
00:44से अलग किया जाता है
00:45तिक उसी तरह डंठल वाले खीरे को भगवान श्रीकृष्ण का गर्बनाल माना जाता है
00:50और खीरे के डंठल को खीरे से काट कर अलग करना उसे श्रीकृष्ण को मादेवकी से अलग करने की रस्म
00:57के तौर पर मनाते हैं
00:59इस डंठल वाले खीरे को काटने की प्रक्रिया को नाल छेदन के नाम से जानते हैं
01:04कुछ जगहों पर खीरे को बीच से काटा भी जाता है
01:07ये जन्म की प्रक्रिया का एक प्रतिकात्मक रूप है जिसे लोग बड़ी ही श्रद्धा और हर्ष के साथ मनाते हैं
01:13और इस रस्म को निभाते हैं ये प्रक्रिया रात के 12 बजे के बाद शुरू होती है
01:19श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की रात बारा बजे के बाद गोपाल का जन्म हुआ था
01:24तो ठीक उसी वक्त खीरे के डंठल को एक सिक्के से काट कर अलग कर लें
01:28और बाल गोपाल के जन्म की खुशी मनाएं
01:30सबसे पहले सुबह खीरे को अच्छे से धो कर, साफ करके बीच से काट लें
01:36उसके बाद उसमें लड़ू गोपाल की मूर्ती को स्थापत करें
01:41और फिर खीरे को पूरे दिन के लिए ढखकर रग दें
01:44रात को 12 बजे के बाद शंखनाद करें
01:47धूप दीप दिखाएं
01:49आरती करें
01:51और फिर सिक्के से उस कटी हुई जगा को एक बार फेर दें
01:55और फिर उसे हटा कर गोपाल का जन्म कराएं
01:58विदिवत बाल गोपाल की पूजा करें
02:01डंठल वाला खीरा मिलना गर मुश्किल है
02:04तो कई लोग खीरे को बीच से ही काट कर भी
02:06श्री कृष्ण का जन्म कराते हैं
02:08आप ऐसा भी कर सकते हैं
02:10जन्म के बाद उनका जल से अभिशेक करें
02:14पंचामरित अर्पित करें
02:15इसके बाद उन्हें सुन्दर सुन्दर वस्त्र पहना कर
02:19उन्हें जूले में बठा कर जूलन जूलाएं
02:21प्यार से उन्हें दुलारें
02:23भोग अर्पित करें
02:24भोग में पंचीरी और चर्नामरित के साथ ही
02:27खीरा भी जरूर चड़ाएं
02:29उनके भोग में तुलसी दल का होना भी जरूरी होता है
02:33श्री कृष्ण का श्रिंगार करना भी ना भूले
02:37अब पूजा में इस्तमाल किये गए खीरे को प्रसाद के रूप में बाटा जा सकता है
02:41ऐसी माननेता है कि संतान की काम ना रखने वाले लोग जनमाश्टमी पर डंठल वाले खीरे का प्रसाद अगर गरहर
02:48करते हैं
02:49तो उन्हें जरूर अगले साल संतान की प्राप्ती होती ही है
02:53फिलहाल अस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
02:57साती चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले

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