00:07इस साल कल की जैनती 18 अगस्त 2026 दिन सोमवार को पड़ रहा है।
00:30पूजा करने का शुब मुहरत क्या है? साथी पूजा विधी क्या रहेगी? और भगवान कल की का जन कब कहां
00:36और कैसे और किस दुष्ट का विनाश करने के लिए होगा।
01:00पूजा करने के साथ साथ वरत भी रखते हैं। वो फलाहार ग्रहन करके इस वरत का पारण शाम के समय
01:06पूजा करने के बाद कर लेते हैं।
01:08आपको बता दें कि पूजा विधी भी बेहत सरल है।
01:12भगवान कल की या भगवान विश्नु की एक छोटी सी मूर्ती या तस्वीर को अपने पूजा घर में स्थापत करें।
01:18इसके बाद हल्दी, कुमकुम और चंदन का उन्हें लेप लगाएं।
01:22जल से स्नान कराएं। सुगंदित फूलों के साथ तुलसी पत्ते उन्हें अर्पित करें।
01:26मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं।
01:29चड़ाने के लिए अक्षत के दाने या फिर मखानी की खीर भी उन्हें अर्पित कर सकते हैं।
01:35साथी इस दिन ओम नमो कलकी देवाय क्लीम नमह या ओम श्री कलकी अवताराय नमह मंत्र का जाप भी किया
01:43जाता है।
01:44इस दिन दान पुन्य करने के साथ जरुत मंदों की सेवा करना भी शुब होता है।
02:14पौराणिक काल गणना के मताबिक कल्योग की कुल अवधी 4uded2 deuxièmeार वर्ष रह गई है।
02:21प्रारम वहनखार्व के समय माना जाता है जिसका आरट है कि अभी कल्योग की के कैवल 5100 साल ही पूरे
02:28हुए है।
02:29मैं कलकी का अवतार कल्योग के अंत और सत्योग के प्रारंब यनकी युग संधी के समय होगा।
02:35ग्रंथों की माने तो जन्म की तिथी वैशाक मास के शकल पक्षकी द्वादशी बताई गई है।
02:40जब प्रत्वी पर कल्योग अपने चरम पर हुगा सत्ति दया और पवत्रता नश्ट हो जाएगी और धूंगी राजा साशन करेंगे
02:48तब धर्म की पुनह स्थापना के लिए वो प्रकट होंगे
02:51कल की देवदत नाम के सफेद घोड़े पर सवार होकर और हाथ में रत्न जड़त तलवार लेकर कली और उनकी
02:59सेना या दुष्टों का संघार करेंगे
03:01भौतिक संदर्बों के अलावा सनातन दर्शन में अवतारों का एक गहरा प्रतिकात्मक और सूक्ष्म आध्यात्मिक अर्थ भी होता है
03:10संभल का शब्दिक अर्थ है जहां शांती, कल्यान और संतुलन होगा
03:15इसका अध्यात्मिक संदेश है कि भगवान का प्राकट्य बहरी जगह से पहले हमारे पवित्र अंतह करण में होता है
03:22कली बाहर का कोई दैत्ति नहीं बलकि मनुष्य के भीतर के काम, क्रोध, लोब, मुह, मद और मत्सर का प्रतीक
03:30है
03:30सफेद रंग यानी सत्व गुण और वशुद्द चेतना का प्रतीक, घोडा तीवर गती और चंचल मन को दर्शाता है
03:37सत्व गुण द्वारा मन को पूरी तरह वश में करना ही देवदत घोडे पर सवार होना है
03:43हाथ में चमकती हुई तलवार विवेक और आत्म ग्यान का प्रतीक है
03:47जिससे अज्ञानता और अंधकार की गाठों को काटा जाता है
03:51जब कल्योग का प्रभाव आपके मन में बढ़ने लगे
03:55अर्था जब कड़वाहट और अज्ञानता हावी हो
03:58तब विवेक और सत्व गुण के सहारे अपने भीतर के कली को समाप्त करना ही
04:04आध्यात्मिक रूप से कल की अवतार को अपने भीतर अनुभव करना होगा
04:09फिलहाल से विडियो में इतना ही
04:11विडियो को लाइक और शेयर करें
04:13साथी चानल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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