00:03नवश्कार दिवाली के इस पावन पंच पर्व में धंतेरस के ठीक बाद और बड़ी दिवाली से एक दिन पहले आती
00:10है कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुरदशी।
00:30चिपे धार्मिक, तांत्रिक और सौंदर से जुड़े पौरानिक कारण भी है।
01:06पहला, असुर राज नरकासुर ने अपनी शक्तियों के बल पर 16,100 कन्याओं को बंदी बना रखा था।
01:13भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से कार्तिक कृष्ण चतुरदशी के दिन नरकासुर का संगहर किया।
01:20और सभी कर्ण्याओं को उसके आतंक से मुक्त किया। इसी खुशी में दीपोट्सव मनाय जाते है।
01:25वहीं दूसरी कथा के नुसार धर्मात्मा राजा रख्ती देव को जब यमदूत नरक ले जा रहे थे तो उन्होंने पूछा
01:33की पिना पाप की नरक क्यों। यमदूतों ने बताय की एक बार आपके द्वार से एक ब्रामण भूका लोड़ गया
01:39था।
01:39राजा ने रिश्यों की सलहा पर कार्तिक क्रश्न चतुरदशी का वरत रखकर यमदेद की पूजा की जिससे वो धरक के
01:46कष्टों से मुक्त हुकर विश्णू लोग पहुँचें। वहीं काली चौदस और मुख्य काली पूजा में अंतर हैं।
01:53पूजरात, महराष्ट और पश्रिम भारत में कार्तिक क्रश्न चतुरदशी की रात को काली चौदस कहते हैं।
02:23जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। मानेता है कि नरका सुर्कावद करने के बाद भगवान श्री कृष्ण ने शरीर पर लगा
02:31तेल और रत्व साफ करने के लिए उप्टन से स्नान किया था।
02:35इस दिन उप्टन स्नान करने से तवचा तो निखरती ही है, शरीर की नकरात्मकता दूर होती है और सौंदर्य और
02:42स्वास्त की प्राप्ती होती है।
02:45फिलहालस से वीडियो में इतना ही, वीडियो को लाइक और शेयर करें, साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।