00:03हिंदू धर्म में धंतेरस का पर्व धन, सुक समरुद्धी और आरोग्य का संदेश देता है।
00:30पूजा कैसे करें? साथी पूजा में किन चीजों की आपको ज़रुत पड़ेगी? पूजा के लिए शुब मुहुरत क्या रहेगा? और
00:36जाडू की पूजा कैसे करनी है? सबसे पहले बात करते हैं शुब मुहुरत की तारीक रहेगी 6 नवंबर दिन शुक्रवार
00:44तिती की शु
01:13पूजा करें तो एक लकड़ी की चौकी लाल्या पीला कपड़ा, माता लक्ष्मी, कुबेर देव, भगवान धन्वंतरी और गणेशी का चित्रिया
01:25मूर्ती, रोली, अक्षत, कुमकुम, हल्दी, फूल,
01:28मौली, कपूर, धूप, बड़ा, चौमुखा, दीप, छोटे दिये, देसी गी और सरसो का तेल, तुलसी पत्र धनिया के बीच, पंचामरत,
01:38फल, मिठाई और कोडिया, धन्तेरस पर खरीदी गई नहीं जाड़ू, फूजास्तल को साफ करके उत्तरिया पूरुदिशा में �
01:45चौकी रखे, चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बचाकर, गनेश्वी, मातालक्ष्मी, कुबेरदेव और भगवान धन्तरी की प्रतिमा या चित्र की
01:52स्थापना करे, चौकी के सामने खरीदी गई नहीं जाड़ू, और नय बरतन या भूशन रखते, हाथ में जल अक्षत
02:11पीला फूल और तुलसी पत्र अर्पत करे, आरोगी की कामना करतेवे मंतर का जाप करे, ओम धन्तरै नमा, इसके बाद
02:18मातालक्ष्मी और कुबेर जी को रोली, हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाए, साबुत, धनिया, कौणिया और अक्षत चड़ाए, खीर, मिष्ठान
02:26औ
02:38इस मंतर का जाप करे, अब खरीदी गई नई जाड़ू पर कुमकुम और रोली का तिलक लगा कर, उस पर
02:44कलावा बांधे और अक्षत फूल अर्पत कर, दरदरता दूर करने और ग्रह लक्ष्मी के आगमन की प्रात्ता करे, शाम के
02:50समय, चौमुखी मिट्टी के दिये में सर
02:52और सोका तेल डालकर चार बत्तियां जलाएं, इस दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षन दिशा की और
02:58मुह करके अनकी धेरी के उपर रग दे, हात जोड कर यमराद से परिवार के सदस्यों की अकाल अम्रत्यू और
03:05भैसरक्षा की प्रार्तना करे, फिल हाल इस व