00:03आशान शुक्ल पक्ष की एकादशी को देव शैनी एकादशी कहा जाता है।
00:32अगर आप भी भगवान विश्नु को शैन कराना चाहते हैं तो आईए इस वीडियो में आपको बताते हैं कि किस
00:38तरह से आप घर पर भगवान विश्नु का शैन करा सकते हैं और किन साब्धानियों को आपको धान रखना होगा।
00:4525 जुलाई की सुबह प्रातस नान आदी से निवरत होकर पूजा स्थल को साफ कर भगवान विश्नु और माता श्री
00:52लक्ष्मी नराण की प्रतिमा को यच चित्र को स्थापत करें।
00:5625 तेवं गंगाजल से दोनों का विश्रेक करें। उन्हें पीले वस्त्र पहनायें, चंदन का तिलक लगायें, तुलसी दल, पीले, फून,
01:03धूप, दीप, नैवेद्य, मौसुमी फलर पित करें। इसके बाद भगवान को खीर या दूच से बनी मिठाई का भूग लगा।
01:10पूजा के अंत में भगवान के समक्ष एक स्वच्छ पीला या सफेद वस्त्र बचा कर उस पर छोटा तकिया या
01:17गंधी प्रतीक रूप में रखें। भगवान से प्रार्तना करें कि वो चार मास के लिए योग निद्रा में विराजमान हों
01:23और समस्त शृष्टी पर अपन
01:40पूजा में भगवान विष्णो को तुलसी दल जरूर चड़ है क्योंकि शास्त्रों में तुलसी के बिना विष्णो पूजन को अपूर्ण
01:47माना गया है। यथा शक्ती दान, जप और रात्री जागरन भी पुन्निदाई बताए गये हैं। शास्त्रों के नुसार भगवा
02:07कादशी के दिन चावल का सेवन परिवार जनों को नहीं करना है, तामसिक चीजों से दूरी बना कर रखें। ध्यान
02:13रहे पुराणों में वर्नत भगवान विष्णो की योग निद्रा का अर्थ सामान निद्रा नहीं, बलके शर्ष्टि के संतुलन और संरक्षर
02:21की दिव्य
02:21अवस्था है। देवशैन ये कादशी पर भगवान को श्रेन कराते समय भक्ति ये प्रात्ना करते हैं कि श्रीहरी की क्रपा
02:28से उनके जीवन में धर्मस्थों का समर्धी और मंगल बना रहे है।
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