00:00वो जो मैगी 50 का मिल गया
00:01साहब वो प्लास्टिक कभी पहाड से बाहर नहीं जाने वाला
00:05और अब वो जो पहाड पर नुकसान करेगा
00:08वो नुकसान हजारों का है
00:10एक छोटा सा पैकेट हवारों का हो नुकसान करेगा
00:13काईदे से वो मैगी हजारों की होनी चाहिए थी
00:15आपने पहाड को सिर्फ इसलिए बरबाद कर दिया क्योंकि आपको लगा मैगी सस्ता है खालो
00:20आम आदमी को चीजें बिना इकोलोजिकल प्राइसिंग के मिल रही है
00:27इसलिए आम आदमी लगातार उसका दुरूपयो करे जा रहा है करे जा रहा है
00:32हम गिन ही नहीं रहे कि हम जो कर रहे हैं उससे प्रक्रति को जो नुक्सान हो रहा है
00:37उसका क्या होगा ठीक वैसे जैसे आम ब्रिटेश आदमी नहीं गिनेगा
00:41कि उसकी संपन्नता में भारत की बर्बादी का क्या योगदान है
00:45वैसे ही आप आज मनुष्य नहीं गिन रहा है
00:47कि उसकी संपन्नता में प्रत्वी की प्रक्रती की बर्बादी का कितना योगदान है
00:53तो हम प्रक्रती को लूट लूट कर अमीर हो रहे हैं
00:57कोई जैसे अपनी मां के जहने बेच बेच कर अपना रोटी-पानी चला रहा हो और बोले
01:02देखा मेरी कितनी बड़ी आमदनी है यही तो हम प्रच्री के साथ कर रही है न और फिर कह रहे
01:09हैं
01:24झाल झाल