00:00मेरी माननेता है कि गन्ने का रस जो है नमकीन होता है कैसा होता है नमकीन होता है और इस
00:06माननेता के वीचे बहुत कारण हो सकते हैं एक कारण ही हो सकता है मेरे दादा जी बता गए है
00:11कि गन्ना नमकीन होता है तो अब दादा जी को गलत स्विकार करना मानने पूरा जो inherited pride है उसस
00:27सोचता था कि गन्ना नमकीन होता है तो मेरी पूरी पहचान मेरी पूरी आइडेंटिटी ही इस बात पर आश्ट्रित है
00:35कि हम तो साब अपनी परंपरा से ही मानते रहे हो मेरी महान गरोशाली प्राचीन परंपरा हम परंपरा से ही
00:40मानते रहे हैं कि गन्ना तो नमकीन होता वो �
00:46है और उनके हाथ में जायो नमकीन गन्ना हैं और उनके हाथ में जायो गन्ना इतना नमकीन होता था हुद
00:54कि सका हिस्सा ले लेकर। मसल करे सुखा करके लोग डाल में सबजी में ढलते थे।
01:01नमक डालने की ज़रोत ही नहीं पड़ती थी, गन्या डालने से डाल नमकीन हो जाती थी, ठीक, अब मैं निकला
01:07दुनिया के बाजार में, ये सब लोग है गन्ये का रस बेच रहे हैं, तो दीजेगा एक किलास गन्ये का
01:14रस,
01:17क्या यार, ये मीठा दे रहे हो तुम, अब आप दीजे, ने, आप दीजे, फिर मीठा है, थबके सब ये
01:28अधर्मी हैं, नरक में सड़सड़के मरेंगे, इनके गन्ये करा रस मीठा है,
01:34और मैं ये मानी नहीं सकता कि गण्णा नम्कीन होता नहीं
01:37क्योंकि उस से मेरी पहचान जुड़ गई है
01:39मेरी असमिता जुड़ गई है
01:40मेरी हस्ती जुड़ गई है
01:42कितनी जगए पर अब घिकराए गण्ने का रस
01:44अनंत जगहों पर बहौत बड़ा प्रहमांड है
01:47तो इनसे मांग लिए, इनसे मांग लिए, अब इनसे मांगूँगा, इनसे मांगूँगा, और जितने मुझे मीठा रस पिलाते जाएंगे, सब
01:55को ठुकराता जाओंगा, कि यही तो गलत है, पूरी दुनिया गलत है, और ठुकराने की कोई सीमा नहीं, आप यह
02:02नहीं कह सकते क
02:02एक दिन इन सब को ठुकराते ठुकराते तुमको अकल आई जाए कि गन्ना मीठाई होता है
02:06क्यों सीमा नहीं क्योंकि शरीर की सीमा है
02:09मैं इनको ठुकराता चलूँगा ठुकराता चलूँगा ठुकराता चलूँगा
02:32लिए है क्योंकि कोई भी विशय उसे संतोष्टी नहीं दे सकता क्योंकि भीतर अपने वो जो माननेता लेकर के चल
02:41रहा है वो माननेता तथ्यों पर आधारित नहीं है