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Transcript
00:00आपके चेहरे की जियोमेट्री क्या है इससे सौंदर नहीं तै होता है आपकी खाल का रंग क्या है इससे सौंदर
00:06नहीं तै होता है आपकी आखों के पीछे से अज्ञान तो नहीं जहांकरा इससे सौंदर नहीं तै होता है छोटे
00:15बच्चे देखा है सुंदर लगते हैं जातर
00:30पहाड इनमें सब में क्या साजा है अंकार नहीं है तो सुन्दर है नदी क्या है बिना किसी खाज विवस्था
00:39या आयोजन के बिना किसी विशिष्ट सीमा के बहता हुआ पानी पर उसके किनारे बैठ जाते हो विचित्र सी शांति
00:48अनुभव होती है क्यों होती है
00:51वो शांति तुम्हें मनुष्य द्वारा बनाई गई नहर कैनाल के बगलें बैठ के नहीं मिलेगी जबकि जो कैनाल है वो
01:00जिमेट्रिकली परफेक्ट है और नदी कैसी है इधर उधर ऐसे सरपीली बह रही है और वो भी अपना रास्ता भी
01:10बदल दे रही है कहीं उचा कहीं न
01:16नहरे बनाते हैं बड़ी बड़ी वो ऐसी नहीं होती वो कैसी होती है लेकिन उनमें आपको आनंद नहीं आता है
01:23क्योंकि नहर के डिजाइन में ही संगरचना में ही सोच में ही मनुष्य का स्वार्थ बैठा हुआ है मैंने नहर
01:36बनाई है ता कि नदी का पानी निकाल करके खे
01:39सीचूं और मुनाफ़ा बढ़ा लूँ
01:41तो इसलिए नहर में कभी
01:43वो सौंदर नहीं आएगा जो नदी में आता है
01:46नदी के पास सौर्थ
01:47नहीं है और
01:49नहर की सोच में ही
01:51सौर्थ बैठा हुआ था
01:53बात आ रही है समझ में
01:56खड़ी कर दो
01:57उची से उची हिमारत
01:58हिमाले से सुन्दर नहीं लगेगी
02:00बुर्ज खलीफा है
02:01और कई पहाड़ियां होती है
02:03उतनी उची
02:05बुर्ज खलीफा आपको मुनाफ़ा दे सकता है
02:08आपको प्रभावित कर सकता है
02:11उसकी चकाचौन्द देखकर
02:13आप हक्के बक्के रह सकते हैं
02:15पर जो काम
02:17आपके लिए
02:18एक बहुत साधारन सी प्राक्रतिक पहाड़ी करेगी
02:22उची बुर्ज खलीफा नहीं कर पाएगा
02:23हाँ उसका अपना काम है बिलकुल है
02:25हम समझते हैं बुर्ज खलीफा क्या काम करता है
02:28मावेवसाय हो रहा है वहाँ और चीज़ें हो रही है
02:30उसके लिए ठीक है
02:32समझ में आ रही है बहत
02:34सौंदर्य कहां है ये ढूड़ने मत निकलिए
02:37अहंकार कहां ये ढूड़ने निकलिए
02:39क्योंकि उसी में असौंदर्य है
02:41सौंदर्य का निर्मार नहीं करा जा सकता
02:44सौंदर्य को खोजा नहीं जा सकता
02:46हाँ भीतर जो असुंदर बैठा हुआ है
02:50उसको पहचान करके उसको छोड़ा जा सकता है
02:54यही छोड़ना सौंदर्य की यात्रा है

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