00:00जब हम दूसरों के लिए भी कुछ चाह रहे हैं, यह ऐसा तो नहीं कि उसमें अपने लिए ही कुछ
00:04चाह रहे हैं
00:04अचारी जी मेरे 6 साल की बच्ची है, तो जैसे एक बर आप मैंने कहीं सुना था कि आप प्रतिभागी
00:10को जवाब में कह रहे थे
00:11कि जैसे बच्चों को स्कूल के बाद हम एक्स्ट्रा एक्टिविटीज में बेशते हैं, लाइक कराटे, प्यानू, यह सब में भी
00:18एक मतलब इसक्रिप्टेड ट्रेनिंग होती है, मतलब रेपेटिव ट्रेनिंग दी जाती है, तो किया सर यह कोई प्रेशर है बच्चे
00:26के उ�
00:40है, कि आप उसे म्यूजिक में भेजें, काराटे में भेजें, कोई और किसी तरह की गतेविदी में भेजें, अच्छा है,
00:47पर यह चीज अगर माबाप के अपनी असुरक्षा से, या हीनता से, या कामना से निकल के आ रही है,
00:55तो फिर इसमें बच्चा पिस जाएगा, एक कस
00:59कसौटी का, कसौटी यह है, कि मैं जो कर रही हूँ, बच्ची है वो, कि जो मैं कर रही हूँ,
01:05वो उस बच्ची के लिए अपने लिए कर रही हूँ, बस यह कसौटी है, जो आप कर रही है, अगर
01:11सचमुच उस बच्ची के लिए है, तो शुब होगा, आप जो कर रही है, वो
01:15तो बच्ची के माध्यम से अपने लिए है, तो गड़बड़ो जाएगी।
01:18अचाहरे जी, हम लोग तो कभी इस तरीके का मतलब सोच रखी नहीं पाये थे
01:21सोच से नहीं होता, वो भीतर से कामना चुपचा पाजाती है, वो सोच पकड़ नहीं पाती है, तो इसलिए बहुत
01:27ध्यान से खुद को देखना पड़ता है, तब पता चलता है, कि जब हम दूसरों के लिए भी कुछ चाह
01:32रहे हैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि उसमें अपने लिए ह
01:37मैं अपनेघ।