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वीडियो जानकारी: श्रीमद्भगवद्गीता - 20.06.2026

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Transcript
00:00एक बार की बात है दर्या गंज की आउए था, तो वहाँ पर वो जमीन पर पिछाते थे, उन दिनों
00:05में अब पता नीं पिछाते हैं ये नी, पुरानी किताबें
00:08तो उसमें मैंने हिंदी साहिती की किताबें खरीदी कुछ
00:11खरीद ली उसके बाद
00:13वहाँ वो चौराहा है वहाँ पर एक
00:15किताब की बड़ी दुकान है वहाँ गया
00:17तो वहाँ से
00:20मैंने प्रोग्रामिंग की
00:21सॉफ्टेयर की किताबें खरीदी दो तीन
00:23तो जो हिंदी वाली किताबे थी और जो प्रोग्रामिंग की किताब थी
00:28वो मैंने एक ही जोले में डाल दी
00:29तो उसका जो मालिक था वो मेरे पासाथ बोलता है
00:32मैं पहली बार किसी को इन दो तरह की किताबों को
00:37एक ही जोले में डालते देख रहा हूँ
00:38ये मेरी जिन्दगी थी
00:41दिशा कुछ पता ही नहीं
00:43एक और जावा बीन से
00:45और दूसरी तरफ हजारी प्रसाद दुवेदी है
00:49तुम्हें जाना का है तुम कर क्या रहे हो
00:52अजीब सा था
00:53किसी को बता भी नहीं सकता था
00:55जिनको बताता उन्हें समझ में नहीं आना था
00:57उसी दुविधा
00:59उसी अंतरज़न्द के साथ खुदी जीता रहा
01:01और उस दौरान जिंदगी में और चीज़े भी चल रही थी
01:05जवान था
01:06ठीक ठाक दिखता था
01:08हटा कटा था
01:09मेरी भी जिन्दगी में वो सब हो रहा था जो
01:15पता नहीं तुम्हारी जिन्दगी में है
01:19सवावता रह की राहें खुली थी और
01:23अफसाने बन बिगड़ रहे थे
01:26उस सब एक साथ ही चल रहा था
01:29और बहुत लंबे समय तक
01:30उसी अंसर्टेनिटी से
01:34गुजरता रहा
01:36फिर उसका अगला साल आया
01:37उसके अगले साल में फिर दो राहें खड़ी हो गई
01:41इदर यूपेसी का भी रिजल्ट आ गया
01:43उधर कैट का भी आ गया
01:45अब यहां जाओ कि वहां जाओ कि क्या करो
01:48फिर से
01:51अंतरदुन्द
01:53फिर उसके बाद जब
02:03तेरे दरुदर करता रहा
02:05लेकिन आज
02:06कृतक की अनुभाव करता हूँ कि
02:09किसी भी राह पर
02:11जल्दी से जाकर के
02:12मैंने तंबू नहीं गाड़ दिया
02:15इतनी राहें खुली
02:16बाप रे बाप दरजनों
02:18चल कर देखा परक कर देखा
02:22कहीं भी अगर
02:23रुक गया होता
02:24तो आज आपके सामने नहीं खड़ा होता
02:28और
02:28यह जो पूरा
02:30अंतराल होता है इसमें थोड़ा सा ऐसा
02:32लगता है जैसे बेवकूफ बन गए
02:35यह हमी पीछे रह गए
02:37दुनिया आगे निकल गई
02:38यह सब हो रहा होगा
02:39और आप यहां बैठे हुए हो
02:40वो जो अकेला पन तब मिलता है न
02:42वो अकेला पन बड़े काम की चीज़ होती है
02:44वो दौर गुजर जाता है
02:47वो अकेला पन साथ रह जाता है
02:49वो अकेला पन जिन्दगी में बहुत काम आता है

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