00:08लेकिन भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकार्ची का महत्व कुछ खास है।
00:30लेकिन भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकार्ची का नाम परिवर्तनी यानि की करवट बदलने वाली एकार्ची पढ़ा।
01:00व्रत रखा जाएगा। और अगर आपने व्रत रखा है तो पारण यानि की व्रत खोलने का समय भी बहद महतोपून
01:06है।
01:0623 सितंबर को सुभे करीब 6 बच कर 10 मिनट से 8 बच कर 35-36 मिनट के बीच पारण
01:13का समय बताये गया है।
01:15हलाकि अपने शहर के पंचांग के अनुसार सही समय जरूर देखना चाहिए क्योंकि सुर्योदय और द्वार्शी की स्तिथी के कारण
01:22समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
01:24अब सवाल है कि आखिर परिवर्तिने कार्शी को इतना खास क्यों माना जाता है।
01:54शेश महत्व बताया गया है। यही वज़ा है कि परिवर्तिनी एकार्शी को वामन एकार्शी के नाम से भी जोड़ा जाता
02:00है।
02:01और यहां से जुड़ी है भगवान विश्नु के वामन आवतार की बेहत प्रसद कथा।
02:05कथा के अनुसार राजा बली, बिहच रक्तिशाली और दानी राजा थे।
02:09उन्होंने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार स्थापित कर लिया था।
02:14देवताओं ने भगवान विश्नु से सहाएता की प्रारतना की, तब भगवान विश्नु ने वामन आवतार लिया और राजा बली के
02:21सामने एक छोटे ब्रामबन के रूप में पहुँचे।
02:24वामन देव ने राजा बली से सिर्फ तीन पक भूमी मांगी
02:28राजा बली ने उनकी मांग स्विकार कर ले
02:32लेकिन इसके बाद वामन देव ने विराट रूप धारन किया
02:36पहले कदम में उन्होंने प्रत्वी और दूसरे कदम में पूरा आकाश नाप लिया
02:40अब तीसरे कदम के लिए कोई जगह ही नहीं बची
02:43तब राजा बली ने अपना सिर्भगवान के चरणों में रख दिया
02:47मानता कैनुसार भगवान विश्नु राजा बली की भक्ती और दान शेलता से प्रसंद हुए
02:53और उन्हें पाताल लोग का आधिपती बनाया
02:56इसी कदम के कारण परिवर्तनी एकार्शी पर भगवान विश्नु के वामन स्वरूप की पूजा का महत्व बताया जाता है
03:04अब बात करते हैं इस दिन पूजा कैसे की जाती है
03:07परिवर्थनी कार्शी पर सनान करने के बाद भगवान विश्नु का ध्यान किया जाता है
03:12व्रत का संकल्प लिया जाता है
03:14इसके बाद भगवान विश्नु की प्रतीमा या तस्वीर के सामने दीपक जराकर उनकी पूजा की जाती है
03:19भगवान को पीले फूल, तुलसी दल और नवैध्य अर्पित करने की परंपरा है
03:24इसके साथ भगवान विश्नु के मंत्रों का जाप, विश्नु सहस्त्र नाम का पाठ और भगवान की कथा सुनना भी शुब
03:32माना जाता है
03:33प्रमुख मंत्रों में ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप किया जाता है
03:38अब बात करते हैं व्रत के नियमों की
03:40एक आशी व्रत में अन्न यानि की अनाज का सेवन नहीं किया जाता है
03:44बहुत से श्रधालू फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं
03:50लेकिन निर्जला व्रत हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है
03:53अपनी शारे रिक्षमता और स्वास्त को ध्यान में रखकर ही कोई भी व्रत या फिर उसका स्वरूपताय करना चाहिए
03:59व्रत के दोरान इस व्रत की मानेता के अकॉर्डिंग चावल, गेहूं और दूसरे अनासे बचने की धार्मिक परंपरा है
04:06मानसहार और नशे जैसे चीजों से भी तू रहने की बात कही जाती है
04:11धार्मिक दृष्टी से इस दिन सैयम, ध्यान, पूजा और दान को विशेश महत्व दिया जाता है
04:16लेकिन परिवर्थनी एकाशी सिर्फ व्रत और पूजा तक सिमित नहीं है
04:21इसका एक बड़ा संदेश आत्म सैयम से जुड़ा हुआ है
04:24एकाशी का व्रत व्यक्ति को अपने एक्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रन रखने की साधना के रुप में भी देखा जाता
04:31है
04:32इसलिए इस दिन सिर्फ भोजन का त्याग ही नहीं बलकिन का रात्मक विचारों और गलत आच्रन से दूर रहने पर
04:38भी जोर दिया जाता है
04:39धार्मिक मानेता है कि परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता
04:47है और जीवन में सुक सम्रधी आती है
04:50हलाकि ये धार्मिक मानेताय हैं इनके आध्यात्मिक महत्व को श्रधा और परंपरा के संधर्व में ही समझना चाहिए
04:57तो अगर आप भी इस साल परिवर्तिनी एकार्शी कवरत रख रहे हैं
05:01तो तारीक तो आपको मालूम ही चल चुका है, 22 को बीट रही है
05:04लेकिन पारण का दिन जो है वो 23 सितंबर को 22 तिति में किया जाएगा
05:08अपने शहर के पंचांग के अरुसार पारण का 61 की समय एक बर क्रॉस चेक जरूर कर ले
05:13और इस एकार्शी का सबसे खास संदेश यही है भगवान विश्णों की करवट बदलने की मानेता के साथ
05:19इसे जीवन में भी एक सकरात्म का परिवर्तन का अवसर माना जाता है
05:23यानि सिर्फ भगवान की पूजा नहीं बलकि अपने भीतर भी एक अच्छी करवट लेने का दिन है
05:28परिवर्तनी एक आच्छी का दिन
05:30इस वीडियो में इतना ही इस वीडियो के इंफॉमिशन को ज्यादा लोगों तक पहुँचाईए
05:34और आपने वरत रखा है कि नहीं हमें कॉमेंट में जरूर बताईए
05:37और क्या इस वरत में आपना चोड़ते हैं गेहूं चावल क्या चोड़ते हैं ये भी कॉमेंट में बताईए
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