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Hindi Row in Supreme Court: Tamil Nadu में पढ़ाई जाएगी हिंदी? JNV Dispute पर आया सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी वी नागरत्ना ने साफ शब्दों में कहा कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी कभी न पढ़ाई जाए, ऐसा नहीं हो सकता। जानिए आखिर केंद्र-राज्य भाषा विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी!

The Supreme Court of India heard a crucial matter regarding the establishment of Jawahar Navodaya Vidyalayas (JNV) in Tamil Nadu. A bench comprising Justice B.V. Nagarathna and Justice A.G. Masih declined Tamil Nadu's plea to recall its earlier direction asking the state to identify land for central residential schools. The apex court highlighted the essence of cooperative federalism, stating that Hindi cannot be completely barred from being taught in the state, while granting 3 months' time to the state government to identify land and hold dialogue with the Centre.

#SupremeCourt #TamilNadu #HindiLanguageRow #OneindiaHindi

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Transcript
00:00सुप्रीम कोट के कोट रूम में 17 सितंबर को एक ऐसा वाक्य गुंजा जिसने तामिलनाडू की 58 साल पुरानी भाशा
00:06नीती के सामने सिधा सवाल खड़ा किया।
00:08जस्टिस बीवी नागरतना ने साफ कर दिया कि ये नहीं हो सकता कि तमिलनाडू की धर्ती पर हिंदी कभी पढ़ाई
00:14ही ना जाए और यहीं से वो बहस शुरू होती है जिसे सिर्फ हिंदी बनाम तमिल कहकर खत्म नहीं किया
00:20जा सकता।
00:39जवार नवाध siihen विद्याले कं सिर्कार की और से वित्पोशित आवाजय स्कूल है जिनने विद्याले समीती चलाती है।
00:46और जो शिक्षा मंत्राले के अधीन काम करती है तमिलनाडू में इन स्कूलों को लेकर रंबे वक्त से आपती दर्ज
00:52होती रही और वजह सिर्फ स्कूल खोलने की नहीं असली तक्राव वहां लागू भाशा और विवस्ता को लेकर है।
00:58नवोदे विद्यालों में तीन मुख्य भाशा का फॉर्मिला है और इस फॉर्मिले के तहट इन्दी समेत अन्य भाशाओं की पढ़ाई
01:05होती है जब कि तमिलनाडू 1968 से दो भाशा नीती पर चलता आया जोसमें तमिल और अंग्रीजी पर जोड़ दिया
01:12गया। अब यही अंत
01:28कर दी बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पंदर दिसमर दोजायर परचीज को सुप्रीम कोर्ट ने भी तमिलनाडू को
01:34और उसके हर जिले में नवोदे विद्याले के लिए उप्यूप्त जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया रजिस्तरगार इस आदी�
01:54कोर्ट में हिंदी पढ़ाई ही न चाहे कोर्ट में सिर्फ इतनी रहाद दी कि पालंग के लिए तीन महीने का
01:59अतिरिक्तव वक्त मिलेगा लेकिन जमीन की पहचान करने की प्रक्रिया से रज्या पीच्छे नहीं हो सकता सुनवाई में भाशा का
02:05मुद्द सबसे ज्यादा चर
02:24प्रमुकता मिलती है रज्य ने ये भी कहा कि नवदे की नीती वैकल्पिक है और अदालत किसी सरकार को किसी
02:30नीती का दिविकल्प को अपनाने के लिए बाध्या नहीं कर सकती इसके साथ ही वित्य चिंता भी जताई गए स्कूलों
02:36में शुक्षकों और दूसरी विवस्था�
02:38कर्च आकरकार राज्य पर आ सकता है और केंदर के साथ पहले से चल रही शक्षा यूजनाओं के भुगतान को
02:45लेकर भी विवाद मौचूद है दूसरी तरफ केंदर का रुक साफ था एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के
02:50एम नटराज ने कोट को साफ किया कि राज्य की मुख्य जमिदारी जमीन उपलब्द कराना है जबकि स्कूल के नर्मान
02:56और बांकि जरूरी विवस्थाओं का कर्च केंदर उठाएगा यानि केंदर का तर्ग था कि स्कूल बनाने की पहल उसकी है
03:02और बोज भी उसका ही होग
03:04बोज भी वही उठा रहा है कोट ने इस पूरी बायचीत में सबसे जाला जोड समवात पर दिया जस्टिस नागरतना
03:09ने कहा कि चिन्ने को दिल्ली से और दिल्ली को चिन्नी से अलग ना समझें रस्टपणी का आश्य यह था
03:14कि राज्य में पहले से चल रही अच्छी शक्�
03:29करने को कह रहा है योशना बना रहा है अदालत ने सहकारी संगवात की बाद उठाते हुए कहा कि केंद्र
03:35रज्जी के बीच मतभेद बादचीत से सुलजने चाहिए और अगर बादचीत के बाद भी कोई समस्या बनी रही तो पक्ष
03:41दुबारा कोट के सामने आए अपनी बा
03:57सकते हैं ये निर्दिश्ट दो चीजनों से जोड़ा है पहला ये है कि नवादय विद्याले के लिए हर जिले में
04:02जमीन के पहचान करना और दूसरा आदेश ये है कि भाश्या और नीती से जोड़े मतभेदों पर केंद्र रज्जी के
04:08बीच बादचीत चारी हो इसक लिए स
04:25का पहला पड़ा वगली सुनवाई है जो कि 4 है दिसंबर को होगी तब तक राज्या और केंद्र के अधिकारियों
04:29के वी बादचीत होने की उम्मीद है और इस बादचीत में भाश्या और स्कूलों के विवस्था जमीन और वित्या जिम्मेदारी
04:35जैसे मुद्दों पर रास
04:53और शिक्षा के अधिकारों के बीच संतुलंग की बड़ी कानूनी बहस बन गई है मामले को आप क्या से देखते
04:58हैं कॉमन बॉक्स आपके लिए अपनी राय अपनी सवाल अपनी टिप पनी वहां ज़रूर शोडएगा मेरा नाम है मुकुंदाथ बने
05:04रहिए वन इंडिया क
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