00:00सुप्रीम कोट के कोट रूम में 17 सितंबर को एक ऐसा वाक्य गुंजा जिसने तामिलनाडू की 58 साल पुरानी भाशा
00:06नीती के सामने सिधा सवाल खड़ा किया।
00:08जस्टिस बीवी नागरतना ने साफ कर दिया कि ये नहीं हो सकता कि तमिलनाडू की धर्ती पर हिंदी कभी पढ़ाई
00:14ही ना जाए और यहीं से वो बहस शुरू होती है जिसे सिर्फ हिंदी बनाम तमिल कहकर खत्म नहीं किया
00:20जा सकता।
00:39जवार नवाध siihen विद्याले कं सिर्कार की और से वित्पोशित आवाजय स्कूल है जिनने विद्याले समीती चलाती है।
00:46और जो शिक्षा मंत्राले के अधीन काम करती है तमिलनाडू में इन स्कूलों को लेकर रंबे वक्त से आपती दर्ज
00:52होती रही और वजह सिर्फ स्कूल खोलने की नहीं असली तक्राव वहां लागू भाशा और विवस्ता को लेकर है।
00:58नवोदे विद्यालों में तीन मुख्य भाशा का फॉर्मिला है और इस फॉर्मिले के तहट इन्दी समेत अन्य भाशाओं की पढ़ाई
01:05होती है जब कि तमिलनाडू 1968 से दो भाशा नीती पर चलता आया जोसमें तमिल और अंग्रीजी पर जोड़ दिया
01:12गया। अब यही अंत
01:28कर दी बाद में ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पंदर दिसमर दोजायर परचीज को सुप्रीम कोर्ट ने भी तमिलनाडू को
01:34और उसके हर जिले में नवोदे विद्याले के लिए उप्यूप्त जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया रजिस्तरगार इस आदी�
01:54कोर्ट में हिंदी पढ़ाई ही न चाहे कोर्ट में सिर्फ इतनी रहाद दी कि पालंग के लिए तीन महीने का
01:59अतिरिक्तव वक्त मिलेगा लेकिन जमीन की पहचान करने की प्रक्रिया से रज्या पीच्छे नहीं हो सकता सुनवाई में भाशा का
02:05मुद्द सबसे ज्यादा चर
02:24प्रमुकता मिलती है रज्य ने ये भी कहा कि नवदे की नीती वैकल्पिक है और अदालत किसी सरकार को किसी
02:30नीती का दिविकल्प को अपनाने के लिए बाध्या नहीं कर सकती इसके साथ ही वित्य चिंता भी जताई गए स्कूलों
02:36में शुक्षकों और दूसरी विवस्था�
02:38कर्च आकरकार राज्य पर आ सकता है और केंदर के साथ पहले से चल रही शक्षा यूजनाओं के भुगतान को
02:45लेकर भी विवाद मौचूद है दूसरी तरफ केंदर का रुक साफ था एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के
02:50एम नटराज ने कोट को साफ किया कि राज्य की मुख्य जमिदारी जमीन उपलब्द कराना है जबकि स्कूल के नर्मान
02:56और बांकि जरूरी विवस्थाओं का कर्च केंदर उठाएगा यानि केंदर का तर्ग था कि स्कूल बनाने की पहल उसकी है
03:02और बोज भी उसका ही होग
03:04बोज भी वही उठा रहा है कोट ने इस पूरी बायचीत में सबसे जाला जोड समवात पर दिया जस्टिस नागरतना
03:09ने कहा कि चिन्ने को दिल्ली से और दिल्ली को चिन्नी से अलग ना समझें रस्टपणी का आश्य यह था
03:14कि राज्य में पहले से चल रही अच्छी शक्�
03:29करने को कह रहा है योशना बना रहा है अदालत ने सहकारी संगवात की बाद उठाते हुए कहा कि केंद्र
03:35रज्जी के बीच मतभेद बादचीत से सुलजने चाहिए और अगर बादचीत के बाद भी कोई समस्या बनी रही तो पक्ष
03:41दुबारा कोट के सामने आए अपनी बा
03:57सकते हैं ये निर्दिश्ट दो चीजनों से जोड़ा है पहला ये है कि नवादय विद्याले के लिए हर जिले में
04:02जमीन के पहचान करना और दूसरा आदेश ये है कि भाश्या और नीती से जोड़े मतभेदों पर केंद्र रज्जी के
04:08बीच बादचीत चारी हो इसक लिए स
04:25का पहला पड़ा वगली सुनवाई है जो कि 4 है दिसंबर को होगी तब तक राज्या और केंद्र के अधिकारियों
04:29के वी बादचीत होने की उम्मीद है और इस बादचीत में भाश्या और स्कूलों के विवस्था जमीन और वित्या जिम्मेदारी
04:35जैसे मुद्दों पर रास
04:53और शिक्षा के अधिकारों के बीच संतुलंग की बड़ी कानूनी बहस बन गई है मामले को आप क्या से देखते
04:58हैं कॉमन बॉक्स आपके लिए अपनी राय अपनी सवाल अपनी टिप पनी वहां ज़रूर शोडएगा मेरा नाम है मुकुंदाथ बने
05:04रहिए वन इंडिया क
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