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भारत और चीन के रिश्तों में अचानक आई गर्माहट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गलवान के बाद तनावपूर्ण हुए रिश्ते अब फिर से सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं।

12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात में सीमा पर शांति, स्थिरता और दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। वहीं, उत्तरी सीमाओं पर PLA की तैनाती में कमी की खबरों ने भी नई बहस छेड़ दी है।

क्या चीन सच में भारत के साथ रिश्ते सुधारना चाहता है?
क्या यह चीन की मजबूरी है या रणनीतिक जरूरत?
क्या भारत का दबाव काम कर रहा है?
और BRICS के मंच से लेकर LAC तक बदलती तस्वीर का असली मतलब क्या है?

इस वीडियो में समझिए India-China Relations, Galwan के बाद बदलते समीकरण, Border Tension, BRICS और मोदी-जिनपिंग मुलाकात की पूरी कहानी।

English Description

Why is China suddenly showing signs of improving ties with India? Is it a genuine diplomatic reset, a strategic necessity, or a compulsion driven by changing geopolitical equations?

After the Galwan clash, India-China relations witnessed one of their worst phases. But now, from the Modi-Xi Jinping meeting to BRICS and developments along the northern borders, signs of a possible thaw are emerging.

In this video, we decode the changing India-China relationship, the LAC situation, PLA deployment, border peace, BRICS and the strategic reasons behind China’s renewed engagement with India.

Is China moving closer to India because it needs India more than before? Watch the complete analysis.

#IndiaChinaRelations #ModiXi #PMModi #XiJinping #China #India #BRICS #LAC #Galwan #IndiaChinaBorder

~HT.410~PR.514~ED.276~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:08जो गल्वान में घटना हुई थी उसके बाद चीन सेना को लेकर काफी रोश है भारतिय सेना में तो अभी
00:14ये चर्चा किस तरफ चल रही है और सकारतमक्तर से किसे दिए हम भी जनता में गुंते हैं जनता को
00:20पूरा भरोसा है और कुछ जीजे इसी सम्वेधन सिल होती है जिसक
00:24प्रगट स्वरुप से बताने में ना देश का ही थे ना सेना का ही भारत और चीन के रिष्टों में
00:30अचानक आई गर्माहट को देखकर एक सवाल बार बार उठ रहा है क्या चीन सच में भारत के साथ रिष्टे
00:37सुधारना चाहता है या फिर उसके पीछे कोई बड़ी रणि
00:53रहाने बॉर्डर पर शांती बनाए रखने और रिष्टों को आगे ले जाने की बात कर रहा है इतना ही नहीं
01:00भारत के रक्षा मंत्राले की ताजा रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि उत्तरे सी माओं पर चीन की
01:06पीले तैनाती 2005 को दौरान काफी कम होई है तो क्या चीन
01:16को इस समय भारत की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही है नमस्कार मैं हूं रिचा पराशर और आप
01:23देख रहे हैं One India Hindi सबसे पहले बात करते हैं उस बदलाव की जिसने पूरी तस्वीर बदल दी है
01:2912 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्तधान मंत्री मोधी और चीन के र
01:46कि दोनों देशों के बीच मतभेद विवाद में नहीं बदलने चाहिए लेकिन साथ ही ये भी स्पष्ट कर दिया कि
01:52सीमा पर पीस एंड ट्रंक्वालिटी यानि कि शांति और स्थिर्ता रिष्टों को आगे बढ़ाने की बुनियादी शर्त है दोनों देशों
02:00ने सीमा वि�
02:15लेकिन असली सवाल है कि चीन इसके लिए तयार क्यों दिखाई दे रहा है इसका जवाब समझने के लिए हमें
02:222020 में जाना होगा गलवान में निंसक जड़ब के बाद भारत और चीन के रिष्टों में भारी गिरावट आई थी
02:30एलसी पर दोनों देशों ने बड़े पैमाने पर सैनिक देनात किये पैगोंग सो गोगरा हट स्प्रिंग्स गलवान देपसांग और डेम
02:41चोक जैसे इलाकों में तनाव बढ़ा दोनों देशों के भी इच बाची जारी रही लेकिन सैन तनाव पूरी तरह कत्म
02:48ही नहीं हु
02:50में देपसांग और डेम चोक को लेकर एक एहम पेट्रोलिंग एग्रिमेंट हुआ इसके बाद डिस इंगेजमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ी
02:58और लंबे समय से चले आ रहे हैं सैने गतिरोद को कम करने की दिशा में महत्वकून कदम उठाया गया
03:05अब 2026 में तस्वीर औ
03:17में उलेखनिया कमी आई है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चीन ने एलसी से अपनी सैने मौजूद की
03:25खत्म करती है रिपोर्ट के मताबिक अभी भी करीब 10 कॉमबाइंट आम्स ब्रिगेड साइज्ट फॉर्मिशन एलसी के आसपास और ट्रेडिशनल
03:35ट्रेनिंग एरिया
03:35में मौजूद है आनि की सैने कम हुए है लेकिन चीन की मिलिटरी कपैबिलीटी जो है और इंफ्रस्ट्रक्चर वहां बना
03:43हुआ है इसलिए से चीन का पूरी तरह पीछे हटना कहना जल्दबाजी होगी अब आते हैं उस बड़े सवाल चीन
03:51को भारत की जरुरत क्यों पड़
04:06निकरन साकरे के पीछे एक बड़ा इंबैलन्स भी है भारत ने चीन से करीब 112 अरब जॉलर का सामान आयात
04:14किया जबकि भारत का चीन को निर्यात काफी कम रहा यानि चीन भारत के लिए बड़ा सप्लायर है और भारत
04:20चीन के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में
04:23आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती हुई बड़ी अर्थवयवस्थाओं में है ऐसे समय में चीन के लिए भारत के
04:30बाजार से दूरी बनाना आसान नहीं है क्योंकि चीन भी बहुत पॉपिलेटेट कंट्री है और सिर्फ बाजार की बात नहीं
04:36है दुनिया सप्लाइ�
04:37चेंज को लेकर जिस तरह बदल रही है उसमें भारत की भूमी का तेजी से बढ़ रही है एलेक्ट्रोनिक्स फार्मास्यूटिकल्स
04:44ऑट्यमबिल्स केमिकल्स रेनवेबल एनरजी और मैनुफैक्ट्रिंग रसेक्षेत्रों में भारत निक्षमता बढ़ा रहा है चीन अगर
05:07अमेरिका के साथ टेक्नोलोजी ट्यार्स रेयरोड्स सप्लाई च्रेंज और स्ट्रेजिक कॉंपिटिशन जैसे चुनोतियों का सामना कर रहा है सितंबर 2016
05:16में भी अमेरिका और चीन के बीच विया पार और टेक्नोलोजी को लेकर तनाव बना हुआ है ऐसे समय में
05:22बीजिंग
05:36और टोनॉमी भी बरकरार रखी है यही चीन के लिए एहम है अगर चीन भारत के साथ रिष्टे सुधारता है
05:43तो वो सिर्फ भारत के साथ बाइलेटरल रिलेशन्स नहीं सुधार रहा बलकि एशिया में अपने स्ट्राडेजिक स्पेस को भी मजबूत
05:51कर रहा है तीसरी वज
06:05ब्रिक्स की अगली अज्यक्षता चीन के पास चली गई है याने वाले दौर में दोनों देशों को इसी मल्टी लेटरल
06:12प्लाटफॉर्म पर साथ काम करना होगा ब्रिक्स में ट्रेड लोकल करेंसे पेमिन सिस्टेम एयाई एनरजी और ग्लोबल साउट जैसे मुद्दे
06:21ते
06:3526 में चीन की एकनॉमी में कुछ ऐसे संकेत सामने आये हैं जब बताते हैं कि डिमस्टिक डिमांड अभी मजबूत
06:42नहीं है अगस्त में रीटेल सेंस ग्रोथ सिर्फ 0.4 प्तिशत रही जबकि प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी जारी रही ऐसे
06:51महाल में एक्सपोर्ट और ए
07:05साथ अपने सभी विवाद खतम कर दिये हैं बलकि ज्यादा सही तस्वीर ये है कि दोनों तेशों ने ये समझा
07:12कि लगतार टकराओ की कीमत दोनों के लिए भारी पड़ रहा है लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं है कि
07:18भारत ने चीन पर भरोसा करना शुरू कर दिया है क्योंक
07:35और उसे साथ तिबट यानि की जेंगनान कहता है भारत इंदाव को स्विकार नहीं करता इसके अलावा डोकलाम का मुदा
07:43भी याद कीजिए
07:442017 में भारत और चीन के बीच डोकलाम में करीब 73 दिन दर सैन ने गती रोध रहा था इसलिए
07:51भारत चीन का सीम अमावला नहीं था बलकि भूटान और रणनेतिक रूप से बेहत समय दंशील सिलीगोरी कॉरिडॉर जिसको हम
07:58अपना चिकन नेक भी कहते हैं उसके आस-पास की स
08:01रख्षा से भी जुड़ा था पिर 2020 का गल्वान इसलिए आज अगर चीन की सैनिकों की तैनाती कम हो रही
08:09है या भारत के साथ वेपार बढ़ाने की बात हो रही है तो भारत के लिए इसका मतलब यह नहीं
08:15है कि LSE पर खत्रा कम हो गया है या खत्म हो गया है भारत का रुप भ
08:30भारत एकनॉमिक कॉपरेशन चाहता है लेकिन बॉर्डर पीस की कीमत पर नहीं और अब इसका सबसे बड़ा उदारण है व्यापार
08:3914 सितंबर को भारत और चीन के कॉमर्स मनिस्टर्स की बीच बैठे खवी दोनों पक्षों ने एकनॉमिक और ट्रेड कंसर्न्स
08:48को बैलेंस्
08:49करीके से अड्रस करने पर सहमती जताई तो क्या भारत चीन की दोस्ती वापस आ गई है इसका जवाब पूरी
08:59तरह से हा तो नहीं हो सकता लेकिन नहीं जरूर हो सकता है यह शायद नहीं कह सकते हैं इसे
09:04इसे दोस्ती से ज्यादा स्ट्राजिक रीसेट कहना सही होगा चीन को �
09:09का बाजार चाहिए भारत को चीन से सप्लाई चेंज और व्यपारिक संतुलन पर बाचीत करनी है तो उनों को ब्रिक्स
09:15जैसे मंचों पर साथ काम करना है दोनों देश नहीं चाहते कि लेकिन दूसरी तरह भारत चीन की मिलिटरी के
09:25विबिलिटी बॉडर इंफ्रास्ट्रक्�
09:30यानि तस्वीर कुछ ऐसी है कि हाथ मिल रहे हैं लेकिन नजरें सीमा पर हैं चीन का भारत के करीब
09:37आना उसकी कमजोरी का प्रमाण नहीं है ये उसकी जरूरत और रणितिक गणित का हिस्सा भी हो सकता है और
09:43भारत के लिए भी चीन से बाचीत करना किसे जुकाव का संकेत न
09:59समय के लिए भरोसे मंद शांती कायम करेगा क्या देपसांग और देमचोक के बाद बाकी बाउंडरी नेगोसियेशन भी आगे बढ़ेंगी
10:08क्या व्यापार बढ़ेगा लेकिन भारत का ट्रेड डिफिसिट कम होगा और सबसे बड़ा सवाल क्या चीन भारत को एक कॉंपे�
10:28बढ़ेश्टों के असली कहानी अब सिर्फ दोस्ती या दुश्मनी की नहीं है यह कहानी है कॉंपेटिशन के बीच कॉपरेशन की
10:35और फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि ब्रिक्स के बाद चीन भारत के करीब आया है लेकिन भारत
10:42ने अपने दरवाजे खोले हैं अपन
10:45नहीं आखे बंद नहीं की है और यह बेहद ही जरूरी है कास करके चीन जैसे देश के साथ इस
10:53कबर में इतना ही नई अपडेट्स के लिए देखते रही है वने जैंदी
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