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Chinchpokli Cha Chintamani के दर्शन करने पहुंचे Pranav और Karan Adani, 107 साल की परंपरा ने जीता दिल! जानिए मुंबई के इस ऐतिहासिक गणेशोत्सव की वो खास बातें जो इसे स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी खास बनाती हैं।

मुंबई के सुप्रसिद्ध 'चिंचपोकली चा चिंतामणि' गणेशोत्सव मंडल ने अपने स्थापना के 107वें साल में कदम रख लिया है। इस खास मौके पर अडानी ग्रुप के प्रणव अडानी और करण अडानी ने सहकुटुंब बप्पा के दरबार में पहुंचकर माथा टेका और दर्शन किए। इस बार चिंतामणि का पंडाल दक्षिण भारतीय मंदिर की भव्य और आकर्षक थीम पर सजाया गया है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

चिंचपोकली गणपति उत्सव की नींव 107 साल पहले मुंबई के मिल मजदूरों द्वारा रखी गई थी। यह मंडल सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि गणेशोत्सव के साथ-साथ समाज सेवा, मुफ्त चिकित्सा सहायता और शिक्षा के क्षेत्र में भी पिछले कई दशकों से कई सराहनीय पहल चला रहा है। जानिए अडानी परिवार की इस खास यात्रा और चिंचपोकली चिंतामणि के 107 साल पुराने सुनहरे इतिहास के बारे में।


Pranav Adani and Karan Adani along with their family offered prayers at the iconic Chinchpokli Cha Chintamani Ganpati pandal in Mumbai during its 107th year of celebration. Built around a grand South Indian temple theme, the Chinchpokli Mandal holds a rich 107-year legacy tied to Mumbai's historical mill workers and actively contributes to social service, healthcare, and education.


#ChinchpokliChaChintamani #AdaniFamily #MumbaiGaneshotsav #GaneshChaturthi2026

~PR.514~ED.276~GR.508~HT.96~VG.HM~

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00:00मुंबई में गनेश उत्सों के शुरुवात होते ही शहर की गलियों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक भक्ती का रंग
00:06दिखाई देने लगा है।
00:08लेकिन इस बार मुंबई के एक बेहद खास गनपती पंडाल में पहुँचे अडानी परिवार ने सब का ध्यान खीचा है।
00:15अडानी एंटर्प्राइजिस के डिरेक्टर प्रणाव अडानी और अडानी पोर्ट्स के मैनेजिंग डिरेक्टर करन अडानी अपने परिवार के साथ मुंबई के
00:23मश्यूर चिंच पोकली चाचंतामनी के दर्बार में पहुँचे और भगवान गनेश के दर्शनकर पू�
00:35कानी मालू है क्यों आडानी परिवार का वहां पहुंचना इतना खास है चलिए आज आपको एक बहुत दल्चस्प कहानी बताते
00:42हैं नमस्कार मैं हूरिचा पराशर और आप देख रहे हैं वान इंडिया हिंदी गनेश चतुर्थि सिर्फिक धार्मिक त्योहार नहीं है
00:49मुं�
01:05सारवजनिक गनपती उत्सव अपने 107 वर्ष में प्रवेश कर चुका है खास बात यह है कि चिंजपोकली चाशंता मनी को
01:11मुंबई के दूसरे सबसे पुराने सारवजनिक गनपती के तौर पर जाना जाता है प्रणाव अडानी और करन अडानी ने परिवार
01:18के साथ वहां �
01:19बहुचकर भगवान गनेश के दर्शन किये, पूजन किये, तस्वीरे खचवाई और ये जो तस्वीरे हैं, विडियोज हैं, सोशल मीडिया पर
01:27इस वक्त वाइरल हैं। इस मौके पर प्रणाव अडानी ने चिंजपोकली सारवजनिक उच्सो मंडल के साथ साज़धारी को
01:33सम्मान की बात बताते हुए कहा कि चिंजपोकली चाशन्ता मनी के विरासत भक्ती एकता और मुंबई की सांस्क्रतिक धड़कन से
01:41जुड़े हुई है। लेकिन इस गनपती की कहाने सिर्फ आज के भवेपंडाल तक सिमित नहीं है। इसकी जुड़े उस मंबई
01:49में हैं जो स
01:49से कभी मीलों का शहर कहा जाता था। परेल, गरगाउं और लाल बाग जैसे इलाके उस दौर में कपड़ा मीलों
01:57और मजदूरों की वजह से शहर की बेहत महतोपुन हिस्से थे। शुरुवाती दौर में मील मजदूर इस गनेश उत्सव का
02:03एहम हिस्सा रहे। और यही वो �
02:05दौर था जब गनेश उत्सव घरों से निखलकर सार्वजनिक उत्सव का रूप ले रहा था। लोकमानेबाल गंगाधरतिलक ने 890 के
02:13दशक में गनेश उत्सव को सार्वजनिक स्वरूप देने में महतोपुन भूमिका निभाई थी। इसका उदेश्य धार्मिक आयोजन क
02:20साथ साथ समाज को एक मंच पर लाना और लोगों के बीच एकता की भावना मजबूत करना भी था। चंचपोकली
02:27चाचंता मनी ने इसी परंपरा को दशकों तक आगे बढ़ाया है।
02:311982 की मील हर्ताल के बाद मुंबई की अर्थ वेवस्थ था और शहर की तस्वीर तेजी से बदली। पुरानी मीले
02:39बंद हुई इलाकों का शहरी करन हुआ और मुंबई का स्वरूप बदलता गया। लेकिन चंचपोकली का ये कंटपती अपने आस
02:47पास के लोगों के लिए सां
03:01भाव्य थीम ही है। इस बार पूरा पंडाल दक्षिन भारतिय मंदिर वास्तुकला से प्रेडित है। भगवान वेंकिटेश्वर बालाजी की थीम
03:09पर गर्णपती की सजावट की गई है। गरून, किर्तिमुक, शंक, चक्र और कपूर तिलग जैसे पारंपरिक धार्वेक
03:15प्रतिकों को इसमें जगहे दी गई है। पंडाल में दक्षिन भारतिय मंदिरों की भव्यता को दोहराने की कोशिश भी की
03:21गई है। जिसमें उचे गोपूरम, दीपस्तम और याली यानि की मंदिरों में दिखाई देने वाली संरक्षक आकृतिया आकरशन का कींद्र
03:30है।
03:30लेकिन शायद रजगनपती के सबसे खास बात ये है कि इसका योगदान सिर्फ गन्वेश उत्सा दक्समत नहीं रहा है। करीब
03:37पांच हजार योगदान करताओं वाला चुंच पोकली सारवजनिक उच्सव मंदल स्वास्त और शिक्षा से जुड़े काम भी करता है। ब्ल
03:58स्वास्त चांच, मेजिकल सहायता और रगदान जासी गतिविधियों के जरिये समुदाय के साथ अपना जुड़ाव बनाई रखा। यानि चिंच पोकली
04:06चाचंता मनी की कहानी सिर्फ एक गणपती की कहानी नहीं है। ये उस मुंबई की कहानी है जो मील मजदूरों
04:12के द�
04:28जहां आस्था, इतिहास, कला और समाज सेवा सब एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं। इस खबर में इतना
04:36ही। मैं हुरिचा और आप देख रहे हैं One India Hindi.
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