00:06प्यारे मित्रो जैशियराम जैमातादी मित्रो आज आप से चर्चा करते हैं रिशी पंचिमी का शुब मुहूर्त और कथा 15 शितंबर
00:152026 को यह पावन पर्व मनाया जाएगा
00:18गणेश चतुर्थी के बाद में पंचिमी तिथी पर सब्ते रिशियों की पूजा और रजश्वला दोश का निवारन करने के लिए
00:28एक व्रत किया जाता है
00:30रिशी पंचिमी 2026 में मंगलवार 15 शितंबर को गड़ेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन अर्थात 14 को गड़ेश चतुर्थी है
00:42और 15 को रिशी पंचिमी का पावन पर्व मनाया जाएगा
00:46पूजा के सुब मुहूर्त की अगर हम बात करते हैं तो प्रातेकाल जारा बच करके 30 मिनट से ले करके
00:54दोपाहर में एक बच करके 40 मिनट तक यह पावन पर्व रहेगा
00:59मित्रों पंचिमी तिथी प्रारंब 15 सितंबर सुबए 7 बच करके 54 मिनट से 16 सितंबर को सुबए 8 बच करके
01:1150 मिनट तक यह तिथी रहेगी
01:14आज के दिन शप्त रिशियों का पूजन किया जाता है शप्त रिशियों में कश्यप, अत्री, भरत द्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदगनी
01:26और वसिष्ट जीती पूजा का पावन पर्व मनाया जाता है
01:31विसेश रूप से महिलाएं इस दिन पूजन करती हैं क्योंकि रजश्वला दोश को दूर करने के लिए यह अज्यानता बस
01:43किये हुए पापों का नास कर देता है आज का पूजन
01:48भाद्र प्रदमास के शुकल पक्ष की पंचमी तिथी का आयोजन होता है सब्तरिसी समाज कल्यान में उनके योगदान हेतु पूजित
02:01होते हैं
02:02यह ब्रत उद्देश रिश्यों के प्रति स्रद्धा को प्रगट करने का भी दर्शाता है
02:10महिलाएं विसेश लाब प्राप्त करती हैं अज्यात पापों का छै हो जाता है पती के प्रति भक्ती व्याप्त होती है
02:21और सभी वर्गों के लिए सुबदाई होता है
02:25तो रिशी पंचिमी का मूल उद्देश से है हिंदू परमपरा में मासिक धर्म के दवरान महिलाओं को धार्मिक कार्णियों से
02:35विरत रहना होता है
02:37रसोई के वर्तनों से भी परहेच करना होता है यदि अज्यानता वश यह नियम भंग हो जाए तो रजश्वला दोश
02:48लगता है
02:49रिशी पंचिमी के इसी दोश का निवारन करता है रिशी पंचिमी की प्रेरक कथा है कि बिधर्व देश में एक
02:58ब्रामण और उनकी धर्म पतनी निवास करते थे
03:03उनके एक पुत्र था और एक ही पुत्री थी
03:07पुत्री का विवाह शंशकार एक व्राम्मण परिवार में हुआ
03:11किन्तु यूवती कुछ ही समय के बाद में बैधब्य हो गई बिधुआ हो गई
03:18पिता के घर में लोट आई और कुछ दिनों बाद उसके सरीर में क्ले पड़ गए
03:24माता पिता चिंतित हो गए रिसी के पास गए रिसी ने पूर्व जन्म देखा
03:31बताया कि यूवती ने मासिक धर्म के दवरान रसोई के वर्तनों को शाप किया है
03:39रिसी पंचिमी वर्त नहीं रखा इसी कारण वर्त मान में यह जन्म कष्ट को इसको भोगना पड़ रहा है
03:47बिदिवत वर्त करने से मुक्ती को प्राप्त होगी और यूवती ने ऐसा किया शरीर के कीड़े शमाप्त हो गए
03:56यह कथा नियमों का पालन सिखाती है अग्यानता से हुए पापों का प्राश्चित यदि शम्भव है तो रिश्यों की क्रपा
04:06से जीवन शुद्ध हो जाता है
04:08रिसी पंचमी के पावन वरत की आप शबी को बहुत बहुत सुबकामना है इसके साथ ही रिसी पंचमी के दिन
04:17क्या ग्रहन करना चाहिए क्या नहीं ग्रहन करना चाहिए
04:21इसमें चौली, भाजी, सूजन, सकरकंदी, आलू, चिर्चिडा, मूंफली, कद्दू, अरबी के पत्ते, केले आदिका प्रयोग किया जाता है
04:34मैं पुना आपसे मिलता हूँ एक नई वीडियो में तब तक के लिए दीजिये इजाजत
04:40जै मातादी, जै मागंगे
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