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Rishi Panchami Vrat Katha 2026: पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 15 सितंबर, मंगलवार को सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 16 सितंबर, बुधवार को सुबह 9 बजे तक ऋषि पंचमी तिथि व्याप्त रहेगी। धर्म सिंधु नामक ग्रंथ में वर्णित है कि मध्याह्न (दोपहर की अवधि) व्यापिनी भाद्र शुक्ल पंचमी के दिन ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। ऐसे में इस वर्ष 15 सितंबर को मध्याह्न व्यापिनी होने से ऋषि पंचमी का व्रत 15 सितंबर को रखा जाएगा।Rishi Panchami Vrat Katha 2026: Puja Muhurt,Kahani In Hindi..

According to the calendar, the Panchami Tithi of the Shukla Paksha of the Bhadrapada month will begin on Tuesday, September 15th, at 7:45 am. Rishi Panchami Tithi will continue until 9 am on the next day, Wednesday, September 16th. The Dharma Sindhu treatise states that the Rishi Panchami fast is observed on Bhadra Shukla Panchami, which is prevalent during the midday (afternoon period). This year, since the midday period is prevalent on September 15th, the Rishi Panchami fast will be observed on September 15th.


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Transcript
00:06प्यारे मित्रो जैशियराम जैमातादी मित्रो आज आप से चर्चा करते हैं रिशी पंचिमी का शुब मुहूर्त और कथा 15 शितंबर
00:152026 को यह पावन पर्व मनाया जाएगा
00:18गणेश चतुर्थी के बाद में पंचिमी तिथी पर सब्ते रिशियों की पूजा और रजश्वला दोश का निवारन करने के लिए
00:28एक व्रत किया जाता है
00:30रिशी पंचिमी 2026 में मंगलवार 15 शितंबर को गड़ेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन अर्थात 14 को गड़ेश चतुर्थी है
00:42और 15 को रिशी पंचिमी का पावन पर्व मनाया जाएगा
00:46पूजा के सुब मुहूर्त की अगर हम बात करते हैं तो प्रातेकाल जारा बच करके 30 मिनट से ले करके
00:54दोपाहर में एक बच करके 40 मिनट तक यह पावन पर्व रहेगा
00:59मित्रों पंचिमी तिथी प्रारंब 15 सितंबर सुबए 7 बच करके 54 मिनट से 16 सितंबर को सुबए 8 बच करके
01:1150 मिनट तक यह तिथी रहेगी
01:14आज के दिन शप्त रिशियों का पूजन किया जाता है शप्त रिशियों में कश्यप, अत्री, भरत द्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदगनी
01:26और वसिष्ट जीती पूजा का पावन पर्व मनाया जाता है
01:31विसेश रूप से महिलाएं इस दिन पूजन करती हैं क्योंकि रजश्वला दोश को दूर करने के लिए यह अज्यानता बस
01:43किये हुए पापों का नास कर देता है आज का पूजन
01:48भाद्र प्रदमास के शुकल पक्ष की पंचमी तिथी का आयोजन होता है सब्तरिसी समाज कल्यान में उनके योगदान हेतु पूजित
02:01होते हैं
02:02यह ब्रत उद्देश रिश्यों के प्रति स्रद्धा को प्रगट करने का भी दर्शाता है
02:10महिलाएं विसेश लाब प्राप्त करती हैं अज्यात पापों का छै हो जाता है पती के प्रति भक्ती व्याप्त होती है
02:21और सभी वर्गों के लिए सुबदाई होता है
02:25तो रिशी पंचिमी का मूल उद्देश से है हिंदू परमपरा में मासिक धर्म के दवरान महिलाओं को धार्मिक कार्णियों से
02:35विरत रहना होता है
02:37रसोई के वर्तनों से भी परहेच करना होता है यदि अज्यानता वश यह नियम भंग हो जाए तो रजश्वला दोश
02:48लगता है
02:49रिशी पंचिमी के इसी दोश का निवारन करता है रिशी पंचिमी की प्रेरक कथा है कि बिधर्व देश में एक
02:58ब्रामण और उनकी धर्म पतनी निवास करते थे
03:03उनके एक पुत्र था और एक ही पुत्री थी
03:07पुत्री का विवाह शंशकार एक व्राम्मण परिवार में हुआ
03:11किन्तु यूवती कुछ ही समय के बाद में बैधब्य हो गई बिधुआ हो गई
03:18पिता के घर में लोट आई और कुछ दिनों बाद उसके सरीर में क्ले पड़ गए
03:24माता पिता चिंतित हो गए रिसी के पास गए रिसी ने पूर्व जन्म देखा
03:31बताया कि यूवती ने मासिक धर्म के दवरान रसोई के वर्तनों को शाप किया है
03:39रिसी पंचिमी वर्त नहीं रखा इसी कारण वर्त मान में यह जन्म कष्ट को इसको भोगना पड़ रहा है
03:47बिदिवत वर्त करने से मुक्ती को प्राप्त होगी और यूवती ने ऐसा किया शरीर के कीड़े शमाप्त हो गए
03:56यह कथा नियमों का पालन सिखाती है अग्यानता से हुए पापों का प्राश्चित यदि शम्भव है तो रिश्यों की क्रपा
04:06से जीवन शुद्ध हो जाता है
04:08रिसी पंचमी के पावन वरत की आप शबी को बहुत बहुत सुबकामना है इसके साथ ही रिसी पंचमी के दिन
04:17क्या ग्रहन करना चाहिए क्या नहीं ग्रहन करना चाहिए
04:21इसमें चौली, भाजी, सूजन, सकरकंदी, आलू, चिर्चिडा, मूंफली, कद्दू, अरबी के पत्ते, केले आदिका प्रयोग किया जाता है
04:34मैं पुना आपसे मिलता हूँ एक नई वीडियो में तब तक के लिए दीजिये इजाजत
04:40जै मातादी, जै मागंगे
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