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Padmini Ekadashi Vrat Vidhi 2026: पद्मिनी एकादशी को सभी एकादशियों में विशेष स्थान प्राप्त है. पुराणों के अनुसार जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करता है, उसे ‘विष्णु लोक’ की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि स्वयं श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत का महत्व बताया था. इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को यज्ञ, तपस्या और अनेक धार्मिक अनुष्ठानों के समान पुण्य फल मिलता है.26 मई 2026 दिन बुधवार एकादशी तिथि का आरंभ सुबह 07:40 से एकादशी तिथि का समाप्ति 27 मई 2026 दिन गुरुवार सुबह 07:50 तक. उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत 27 मई 2026 को मनाया जायेगा.Padmini Ekadashi Vrat Vidhi 2026: Padmini Ekadashi Vrat Vidhi,Nirjala Ya Falahar Kaise Kare,Kya Khaye ?



Padmini Ekadashi holds a special place among all Ekadashi fasts. According to the Puranas, those who observe this fast with devotion and regularity attain the abode of Vishnu. It is believed that Lord Krishna himself explained the significance of this fast to Arjuna. By observing this fast, one receives the same virtuous results as performing yagnas, austerities, and many other religious rituals.Ekadashi Tithi begins on Wednesday, May 26, 2026, at 07:40 am. Ekadashi Tithi ends on 27th May 2026, Thursday morning at 07:50. According to the Udaya Tithi, Ekadashi fast will be observed on 27 May 2026.

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~HT.318~ED.120~PR.111~VG.MX~
Transcript
00:03पद्मनी एकादशी जिसे पूरशोत्त में एकादशी भी कहते हैं हिंदु धर्म में बिहत दुरलव और अत्यंत फल्दाई माना गया है
00:10ये एकादशी आम दिनों में नहीं बलकि केवल अधिकमास में आती है
00:14साल 2026 में अधिकमास पढ़ने के कारण इस अवरत का महत्व और भी बढ़ गया है हिंदु पंचांग के अनुसार
00:22साल 2026 में अधिकमास के शुकल पक्ष की एकादशी तिती 27 जून दिन बुदवार को पढ़ रही है
00:31वहीं एकादशी तिती का प्रारंब 26 जून 2026 को सुबह 7 बचकर 40 मिनट से शुरू हो जाएगी तो एकादशी
00:40तिती की समापती 27 में 2026 दिन बुदवार को सुबह 7 बचकर 50 मिनट तक रहेगी
00:47उद्यातिती के आधार पर एकादशी का व्रत 27 में को ही रखा जाएगा वहीं 28 में को व्रत का पारिण
00:55होगा
00:56वहीं पोरानिक मानिताओं के मताबे पदमनी एकादशी का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए निर्जला व्रत रखने का विधान है
01:04बिना पानी पिये पूरे दिन और रात बिताना शाररिक और मानसिक निर्टरन की सबसे कठिन परिक्षा है
01:09जिसे उच्च कोटी का तप माना गया है
01:12मानिता है कि जो साधक इस दिन निर्जला रहकर भगवान विश्नु और माता लक्ष्मी की आरादना करता है
01:17उसके लिए कई जन्मों के संचित पाप नश्ट हो जाते हैं और अंत में मोक्ष की प्राप्ती होती है
01:23आई ये से वीडियो में जानते हैं पद्मिन एकादशी वरत विधी क्या होगी
01:2720 जून 2006 की सूर्यास के बाद से भूजन ना करें
01:31जनकांसे के बर्तन में भूजन, बांच, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल और चने का त्याग करें
01:3628 जून को ब्रह्मो मुहुर्त में उटकर स्थान कर पीले वस्तर पहन ले
01:41भगवान विष्णू की मूर्ती या चुत्र के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर अपनी इच्छा के नुसार, नर्जला या
01:47फलहारी वरत का संकल पले
01:49भगवान विष्णू और माता लक्ष्मी को पीले फूल, पीले फल, तुलसी दल, धूप दीप और नैवे द्यर्पित करें
01:56ओम नमो भगवते वासु देवाय मंत्र का जाप करें
01:59पद्मिने कादशी की वरत कता पढ़ें या सुने और आरती करें
02:02यसे वरत में रात को सोना नहीं है, रात के समय भजन कीतन या विष्णू शहस्त्र नाम का पाठ करते
02:08वे जागरन करें
02:0929 जून के सुबह स्नान के बाद ब्राम्हणों और जवरतमंदों को दान दक्षना दें
02:14और शुब महुरत में भोजन करके वरत खोलें
02:17यदि आप स्वास्तकारणों से पूर रूप से नरिजला वरत नहीं कर पा रहें
02:21तो आपने चीजों का सेवन फलहार वरत के दौरान कर सकते हैं
02:25जिसमें ताजे फल, सेव, केला, आम, अंगूर, अनार, पपीता, सूखे, मेवे, डेरी, उतपाद, सबजियां, वरत का नाज, सेंधा नमक, चाए,
02:35कॉफी, शर्बत
02:36लेकिन इसी के साथ कुछ चीजे नहीं भी खा सकते हैं जिसमें अन और अनाज, दाले, मसाले, तामसिक, भूजन, सबजियां
02:43एकादशी के दिन भगवान विश्न को तुलसी जरूर चड़ा है, लेकिन ध्यान रखें एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं
02:49तोड़ ले, इन्हें एक दिन पहले ही तोड़ कर रखें
02:52ध्यान रहे, शास्त्रों में नर्जला वरत को सर्वश्रेश्ट वरत माना गया है, लेकिन ये नियम केवल पूर्णता स्वस्त व्यक्तियों पर
02:59ही लागू होता है
03:00फिल्हाल इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें, साथी चानल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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