00:00भगवान श्री राम भगवान वश्नु के अवतार हैं, जिनका जन्म अयोध्या के राजा दश्रत के सबसे बड़े पुत्र के रूप में हुआ
00:08मार्गशीर शुमास की पंचमीतिति को श्री राम अपने छोटे भाई लक्षमन और गुरु विश्वामत्र के साथ मिधला की राजधानी जनकपुरी पहुँचे थे
00:17जनकपुरी में उस समय राजा जनक ने अपनी पुत्री माता सीता का स्वयमवर आयोजित किया था
00:23स्वयमवर में शामल होने के लिए कई वीर राजा और राजकुमार पहुँचे थे
00:29राजधा जनक के पास भगवान अश्रप का एक दिव्य धनुष था जिसे उठाने और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त पर स्वयमवर रखा गया था
00:37कहा जाता है कि ये धनुष इतना शक्तिशाली और भारी था कि कोई भी राजा उसे हिला तक नहीं सका
00:44एक एक कर्ज सभी प्रतिभागी उस परिक्षा में विफल होते गए
00:47लेकिन जब गुरु विश्वामत्र ने श्री राम को आगे बढ़ने का आदेश दिया तो नहीं सहजिता से धनुष को उठाया
00:54जैसे ही श्री नाम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ानी का प्रयास किया
00:58धनुष दो टुकडों में डूड गया
01:00इस अद्बुद घटना को देखकर उपस्थित सभी लोग आश्यर चकित रह गए
01:04परिक्षा पूर्ण होने के बाद राजा जनक ने अत्यंत हर्ष और श्रद्धा के साथ
01:09माता सीता का विवाह भगवान श्री राम के साथ कराया
01:13जनकपुरी की धर्ती पर वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच ये देव्य विवा संपन्न हुआ
01:18ये विवा भारतिय संस्कृती में आदर्श वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है
01:43कराद प्रतीक माना जाता है
02:13झाल झाल
02:43झाल झाल
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