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अनंत चतुर्दशी 2026 पर भायखला की हिन्दुस्तानी मस्जिद के सामने जब लालबागचा राजा का रथ रुका, तो मुंबई ने एक बार फिर भाईचारे की मिसाल पेश की। जानिए 1975 से चली आ रही इस अनूठी परंपरा का इतिहास कि आखिर क्यों बाप्पा का विसर्जन जुलूस यहाँ रुकता है और मुस्लिम समुदाय कैसे बाप्पा का स्वागत करता है। वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें!

Watch the beautiful tradition of Mumbai's Lalbaugcha Raja stopping at the Hindustani Masjid in Byculla during the 2026 Ganesh Visarjan. Discover the history behind this unique ritual of unity since 1975, where both communities celebrate together. Like, share, and subscribe for more amazing updates!


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~HT.318~ED.120~PR.115~VG.HM~
Transcript
00:03जब भी मुंबई के गणेश उत्सव की बात होती है तो सबसे पहला नाम जुबान पर आता है लाल बाख्चा
00:09राजा
00:09लेकिन क्या आप जानते हैं कि आनंद चतुरदेशी पर जब बपा अपने विसरजन के लिए निकलते हैं तो मुंबई की
00:16सडकों पर एक ऐसी अनूटी तस्विर दिखती है जो पूरे देश को भाईचारे का संदेश देती है
00:20एक ऐसी परंपरा जो सालों से बिना रुके चली आ रही है और 2026 में भी पूरे सम्मान के साथ
00:26निभाई जाएगी
00:27जी हाँ हम बात कर रहे हैं भाई खला की मशूर हिंदुस्तानी मस्जित की
00:32दशाकों से ये परंपरा चली आ रही है कि जब भी लाल बाक्चा राजा का विसरजन जुलूस इस मजजित के
00:38सामने से गुजरता है
00:39तो वहां कुछ पलों के लिए बप्पा का रत रुक जाता है
00:42अगर उस वक्त नमास का समय हो तो ढोल ताशे और संगीत को पूरी तरह से धीमा और शांत कर
00:48दिया जाता है
00:48मस्जित के सामने बप्पा का स्वागत करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग भूलों के हार और मिठाईया लेकर खड़े
00:54होते हैं
00:55वो बप्पा पर फूल बढ़साते हैं, आरती में शामिल होते हैं और हिंदू-मुसलिम दोनों एक दूसरे को गले लगा
01:00कर तेवहार की बढ़ाई देते हैं
01:02अब सवार उठता है कि ये परंपरा शुरू क्यों हूँ
01:05दरसल लाल बाक्षा राजा की स्थापना साल 1934 में वहां के स्थानिय मच्छवारों और व्यपारियों की मनत पूरी होने पर
01:12हुई थी
01:12इस बाजार को बनाने और यहां सोहार्द बनाए रखने में हिंदू और मुसलिम दोनों समुदाएं का बड़ा योगदान रहा है
01:19जब विसरजन का लंबा रूट तै किया जाता है तो सामप्रदाइक एक्ता को मजबूत करने और आपसी सम्मान दिखाने के
01:26लिए इस तहराव की शुरुवात की गई
01:27यह सिर्फ एक पड़ाव नहीं बलकि एक दूसरे के धर्म के प्रती सम्मान जताने का तरीका है
01:33मुस्लिम समाच के लोग बपा के स्वागत में महीनों पहले से तैयारियां करते हैं
01:38और गनेश मंडल के कारेकरता इस प्यार का पूरे दिल से सम्मान करते हैं
01:42साल 2026 में भी जब 25 सितंबर कौन चतुरदशी की दिन बपा गिरगाउं चपाटी की तरफ बढ़ेंगे
01:49तो भाई खला की ये हिंदुस्तानी मज़ित एक बार फिर से एतिहासिक बलकि गवाब बनेगी
01:53समय बदल गया साल बदल गये लेकिन मुंबई का ये प्यार और गंगा जमुनी तहजीब आज भी वैसी ही अटूट
02:00है
02:00ये परंपरा सिखाती है कि तेवहार दिलों को जोड़ने के लिए होते हैं तोड़ने के लिए नहीं
02:05यही है असली मुंबई और यही है भारत की खुबसूरत संस्कृती
02:10अगर आपको मुंबई की इस खुबसूरत परंपरा की कहानी पसंद आई हो तो इसे वीडियो को लाइक और शेयर जरूर
02:15करें
02:15कॉमेंट में गड़पती बपा मोरया लेकना ना पूले
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