00:00भारत और रूस की दोस्ती अब सिर्फ रक्षा सौदो और कुटनितिक रिष्टों तक सीमित नहीं रहने वाली।
00:06ब्रिक्स समिट 2026 के दोरान प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी और रूस के राष्टपती ब्लादिमीर पुतिन की मुलाकात में दोनों देशों
00:13ने ब्यापार परमान उर्जा रक्षा तेल रेलवे मैनुफेक्चरिंग और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे कई रणनेतिक शेत्रों में
00:20सहयोग बढ़ानी के दिशा तैकर ली है और इस पूरी मुलाकात का सबसे बड़ा आर्थिक लक्षे है 2030 भारत और
00:28रूस के बीच दूइपक्षिये ब्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना रिपोर्ट के मुताबिक अभी दोनों देशों के बीच ब्यापार
00:35करीब 65 अर
00:50पहले कुछ सालों में और गहरे हो सकते हैं भारत को इसका क्या फाइदा होगा और सबसे बड़ा सवाल है
00:56कि क्या 100 अरब डॉलर का प्यापार लक्ष हासिल करना इतना आसान होगा तो चलिए बताएंगे सब कुछ इस वीडियो
01:03में अंतक चरूर बने रही सबसे पहले इस मु
01:20यानि की लचीला पर नवाचार और सहयोग और टिकाव विकास पर हैं ब्रिक सब सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं
01:27रागया इसके विस्तार के बाद इसमें मिस्र एथ्योपिया इरान यूएई और सौधी अरब जैसे देशों के नाम शामिल है अब
01:34यह ऐसा मंच बन च�
01:48भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षिय वियापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष रखा है।
02:18तूलन एक तरफ छुका हुआ है। इसलिए अगर भारत और रूस को 100 अरब डॉलर का लक्ष हासिल करना है
02:24तो सिर्फ रूस ते और ज्यादा तेल खरीदने से काम नहीं चलेगा। व्यापार की पूरी इस्ट्रक्चर को ज्यादा बैलेंस बनाना
02:30होगा। भारत रूस को फा
02:48बने रह सकते हैं। अगर मौजूदा ब्यापार करीब 65 अरब डॉलर और लक्ष 100 अरब डॉलर माना जाए तो करीब
02:5454 फिस्ती की अतरिक्त बढ़ोतरी चाही। दो हजार तीस तक चार साल की योधी में इसे हासिल करनी के लिए
02:59लगबग गारा से 12 फिस्ती सलाना औसत ग्रो�
03:03पड़ेगी यानि लक्ष वड़ा है लेकिन पूरी तरह असंभव नहीं है। लेकिन इसके लिए एक और बड़ी प्रोब्लम को सॉल्व
03:09करना होगा पेमेंट और लोजिस्टिक्स। रूस पर पश्चमी प्रतिवंधू के बाद भारत और रूस ने लोकल करेंसीज और अल्�
03:31पेमेंट व्योस्था में कॉम्प्लीकेशन बढ़ जाती है। आगे दोनों देश रुपए और रुबल में डाइरेक्ट पेमेंट को बढ़ावा देने, बैंक्स
03:38के बेच सुरक्षित फाइनेंसियल चैनल्स बनाने, शिपिंग और इंसुरेंस व्योस्था को मजबूत करने
03:44और नए लोजिस्टिक रूट्स विक्सित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही इंटरनेशनल नौर्ट साउथ ट्रांसपोर्ट
03:51कोरिडोर का इस्तेमाल बढ़ाना भी एहम हो सकता है। अगर पेमेंट और लोजिस्टिक की ये दिखते कम होती है तो
03:56100 अरब डॉ
03:57सिर्फ एक पॉलिटिकल अनौंसमेंट नहीं रहेगा। बलकि दोनों देशों की कमपनीज के लिए रियल बिजनेस ऑपुंचिनिटी बन सकता है। अब
04:05आते हैं दूसरे बड़े शेत्र पर प्रमानु उर्जा भारत के लिए न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम में रूस
04:10लंबे समय से एक महत्पून पार्टनर रहा है। तामिल नाडू के कुडन कुलम प्रमानु उर्जा सन्यंत्र में रूस की बड़ी
04:17भूमिका रही है। और आने वाले समय में न्यूक्लियर एनर्जी भारत के लिए सबसे ज्यादा महत्पून हो सकती है। क्योंकि
04:23देश में �
04:24विजली की डिमांड तेजी से बढ़ रही है इंडस्ट्री इलेक्ट्रिक वीकल्स डेटा सेंटर्स और ओवर ओल एकोनॉमिक ग्रोथ के साथ
04:31आने वाले वर्षों में भारत को लगतार बड़ी मात्रा में रिलेवल पावर की चरूरत होगी। सोलार और विंड एनर्जी ते
04:49साइब, मेंटेरेंस टेक्नोलोजी और भारतिये कंपनीज की लोकल पार्टिसिपेशन जैसे शेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है। स्मॉल मोडुलर डियक्टर्स जैसे
04:58नए एरियाज में भी भविस्त में कोर्प्रेशन की संभाव ना हो सकती है। हाला कि नुकलियर प्रो�
05:04पूरे होने वाले प्रोजेक्ट्स नहीं होते हैं। इन्वे सेफटी कोस्ट, इंसुरेंस, टेक्नोलोजी ट्रांसफर और लोकलाइजेशन जैसे कई बड़े मुद्दे होते
05:12हैं। इसलिए ये पार्टनर्शिप शॉर्ट टर्म नहीं बलकि आने वाले कई दश्कों की इनर
05:34का इकोसिस्टम हैं। लेकिन अब डिफेंस रिलेशन्सिप को सिर्फ रेडी मेड वेपन्स खरीदने तक सीमित रखने की वजाये ज्वाइन्ट प्रोडक्शन
05:41की तरफ ले जाने की कोशिश हो रही है। भारत की प्राइडिटी है कि डिफेंस एक्पिप्मेंट का ज्वाइ
06:00जा सकती है। यह बदलाव भारत के आत्म निर्भर डिफेंस प्रोडक्शन के लिए काफी इंपॉर्टेंट है। अगर रसिया के साथ
06:06ज्वाइंट प्रोडक्शन बढ़ता है तो भारत अपनी डोमेस्टिक रिक्वाइर्मेंट पूरी करने के साथ कुछ डिफेंस प्रोड
06:30भारत अपनी क्रूड ओयल रिक्वाइर्मेंट का बड़ा हिस्सा इंपॉर्ट करता है ऐसे में रूस से आने वाला ओयल इंडियान रिफाइनिज
06:36के लिए काफी इंपॉर्टेंट है। भारत के लिए रसियान ओयल का फायदा तीन स्तरों पर मिलता है। पहला एनरजी सिक्र
06:42के तोर पर और दूसरा रिफाइनिज के लिए कॉंपॉर्टेटिव क्रूड एबबिलिटी और तीसरा ग्लोबल ओयल मार्केट में सप्लाइ सोर्चेस को
06:50डाइवर्सिफाइ करनी के लिए वहीं रसिया के लिए इंडिया एक बड़ा और रिलिटेबली स्टेवल वायर से इस
07:11एक कंट्री या सप्लाइ पर डिपेंडेंसी इसलिए भारत की स्टेट्जी सिर्फ रसिया पर निर्वर रहनी की नहीं होगी रसिया के
07:17साथ इनर्जी कोर्प्रेशन जारी रखते हुए मेडिलिस्ट अमेरिका अफ्रीका और दूसरे रिजन से भी कुरूड सप्लाइब बना
07:37ज्यादा है लेकिन जिसकी सप्लाइ लिमिटेड होती है या कुछ चुनिंदा देशों पर ज्यादा डिपेंड करती है इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक
07:44वीकल्स बैटरीज सेमी कंड़क्टर्स इलेक्ट्रोनिक्स सोलर पैनल विंड टर्वाइन्स एरोए स्पेस डिफेंस इ
08:04पॉस्टिबिलिटीज पर भी काम कर सकता है और यहां भारत के लिए सबसे बड़ा ओपर्चुनिटी सिर्फ रॉव मेटेलियर खरीदने में
08:11नहीं है असल फायदा तब होगा जब इंपोर्टेट मेंडल्स की प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग भारत में हो बैटरी और कॉं
08:31दिफेंस और इनर्जी में आगे बढ़कर रेलवेय मैंटस्टिंग और हेवी इंड़स्टि में भी कोर्प्रेशन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं
08:37रसिया के पास हैवी इंजिनियरिंग रेलवेjs मेसिंद्रि के वहीं इंडिया के पास बारा डोमेस्टिक मार्केट चल्ड
08:46manpower or tajy se expand hoota manufacturing ecosystem hai hai hai hai hai hai hai hai hai
08:51dhono dèšo ke bici railway engines and conchage ke saath kai equipment or metals auto components
08:57industrial robotics pharmaceuticals or agriculture machinery jayse shetro me corporation ke
09:03saath opportunity by sakti is kata bilateral investment trading yarni ki bit ki disha
09:09mein bhi aagye bada ne par vichar kiya jara hai hai hai hai aci treaty se investors ko legal
09:13protection dispute resolution or investment rules में ज्यादा clarity मिल सकती है
09:19इससे रसिया में Indian companies का investment बढ़ सकता है और इंडिया में
09:23Russian companies के लिए भी नई opportunity खुल सकते हैं हलाकि final
09:27agreement और उसकी condition सामने आने के बाद ही इसके investment impact को
09:32पूरी तरह access किया जा सकेगा और अकर पूरी तस्मीर को देखें तो
09:35समेट 2026 में भारत और रूस के रिष्टों का अगला फेज सिर्फ डिफेंस और ओयल तक सीमित दिखाई नहीं देता
09:412030 तक 100 अरब डॉलर का trade targets है nuclear energy में long term corporation है defense में खरीच से
09:48आगे बढ़कर joint production की बात है
09:50oil gas और fertilizer के जरिए energy security है critical minerals और rare earth के जरिए future industries पर focus
09:57है railway manufacturing और heavy industry में नई opportunity है और investment तथा technology partnership के जरिए relationship को और
10:05ब्यापक बनाने की कोशिश है
10:07लेकिन इन सबकी असली सफलता सिर्फ announcement से तै नहीं होगी तीन चीजे सबसे ज़्यादा important होगी payment system कितना
10:14smoothly काम करता है trade balance कितना improve होता है और जमीन पर actual projects कितनी तेजी से execute होते
10:21हैं
10:22हाला कि इस पूरे मामले पर आपको क्या लगता है या इंडिया और रसिया के रिष्टे नई उचाई पर पहुच
10:26सकते हैं अपनी राय कमेंट सेक्सर में जरूर बताएं और ऐसे ही तमाम अपडेट्स और share market से जुरी तमाम
10:31जानकारी के लिए आप बने रहें good returns टिश्टल क
10:35साथ.
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