00:00सुप्रीम कोट के आदेश के बाद भी अगर किसी छात्र को नोटिस भेज दिया जाये तो सवाल उठनाता हैं।
00:07लेकिन इस बार सवाल सिर्फ उठा नहीं बलकि सुप्रीम कोट में CJI सुरिकांट ने नोटा के एक मजिश्टेट से ही
00:14पूछ लिया के ऐसा करने की हिम्मत कैसे हुई।
00:37सोधिया के कार्याले से अक्षत को एक नोटिस भेजा गया। इसमें उन से 5 लाक रुपे का निजी बॉंड भरने
00:44और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था।
00:49नोटिस में कहा गया कि अक्षत विश्विद्याले के छातरों को दिल्ली में होने वाले सीजेपी पदर्शन में शामिल होने के
00:56लिए प्रोथसाहित कर रहे थे।
00:58प्रशासन को आशंका थी कि उनकी गत्विद्यों से तनाव बढ़ सकता है और सारजनिक विवस्था प्रभावित हो सकती है।
01:06नोटिस में ये भी पूछा गया कि क्यो ना अक्षत को 6 महिने तक शांती बनाये रखने के लिए पाबंध
01:12किया जाए।
01:13इसके लिए 5 लाक रुपे के निजी मुचलके और इतनी ही राशी के दो जमानतदारों की मांग की गई थी।
01:19मामले की सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीक तै की गई थी।
01:23इसके बाद अक्षत ने एक वीडियो जारी किया उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें परदर्शन
01:30में शामिल होने को लेकर डराया और धमकाया जा रहा है।
01:34यहीं से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया।
01:37बोद्वार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दोरान सीनियर एडवोकेट विशुजीत भटाचार ने ये मामला सीजे आई सुरिकांत की अध्यक्षता
01:46वाली बेंच के सामने उठाया।
01:48उन्होंने बताया कि एक छात्र को शांती बनाए रखने के नाम पर पांच लाक रुपे का बॉन्ड भरने का नोटिस
01:55दिया गया था।
01:55वकील ने कहा कि बाद में ये नोटिस वापस ले लिया गया लेकिन सिर्फ नोटिस वापस लेना इस पूरे मामले
02:02को खट्म नहीं करता है।
02:25CGI सुरकांत ने सक्त रुख अपनाया।
02:56दरसल इस पूरे मामले की जड़ CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी हुई है।
03:00चात्र अक्षट पर आरोप लगाया गया था कि वो चात्रों को प्रस्तावित परदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर
03:07रहे थे।
03:08और सरकार के खिलाफ ब्रहामक जानकारी फैला रहे थी। प्रशासन ने इन गत्विदियों से कानुन वियोस्था बिगरने की आश्रंका जताई
03:16थी।
03:16लेकिन चात्र की तरफ से सवाल उठाया गया कि जब सुप्रीम कोट पहले ही इस मामले में चात्रों के खिलाफ
03:23जबरदस्ती की कारवाई पर रोक लगा चुका है तो फिर नया नोटिस किस आधार पर जारी किया गया।
03:30अब इस मामले में सबसे एहम बात ये है कि सुप्रीम कोट इस कारवाई को किस नजर से देखता है
03:37एक तरफ प्रशासन कानुन वियोस्था बनाए रखने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ छात्र पक्ष सुप्रीम कोट के
03:44आधेश का हवाला दे रहा है।
03:46फिलहाल नोटिस वापस लिया जा चुका है लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोट की नजर अब इस बात
03:52पर है कि आखिर ऐसा नोटिस जारी क्यों किया गया और क्या ये अदालत के आदेश की अंदेखी थी।