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सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने नोएडा मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। CJP Protest मामले से जुड़े नोटिस को लेकर CJI ने सवाल उठाए और पूछा कि निचली अदालत की ओर से ऐसा आदेश कैसे जारी किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद नोएडा मजिस्ट्रेट की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के रुख पर चर्चा तेज हो गई है। आखिर पूरा मामला क्या है? मजिस्ट्रेट ने कौन सा नोटिस जारी किया था और CJI सूर्यकांत ने इस पर क्या कहा? इस वीडियो में जानिए Supreme Court Hearing, CJI Surya Kant की नाराजगी, Noida Magistrate Controversy और CJP Protest मामले से जुड़ी पूरी कहानी।

The Supreme Court witnessed a sharp exchange after CJI Surya Kant questioned the action taken by a Noida Magistrate in connection with a notice issued during the CJP protest matter. The Chief Justice expressed strong displeasure and questioned how such an order could be passed. The case has now raised important questions about judicial authority, court orders and the role of lower courts. In this video, we explain the complete Supreme Court hearing, CJI Surya Kant’s remarks, the Noida Magistrate controversy, the CJP Protest case and why the matter has attracted attention. Watch the full video for the latest developments and key details.

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Transcript
00:00सुप्रीम कोट के आदेश के बाद भी अगर किसी छात्र को नोटिस भेज दिया जाये तो सवाल उठनाता हैं।
00:07लेकिन इस बार सवाल सिर्फ उठा नहीं बलकि सुप्रीम कोट में CJI सुरिकांट ने नोटा के एक मजिश्टेट से ही
00:14पूछ लिया के ऐसा करने की हिम्मत कैसे हुई।
00:37सोधिया के कार्याले से अक्षत को एक नोटिस भेजा गया। इसमें उन से 5 लाक रुपे का निजी बॉंड भरने
00:44और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था।
00:49नोटिस में कहा गया कि अक्षत विश्विद्याले के छातरों को दिल्ली में होने वाले सीजेपी पदर्शन में शामिल होने के
00:56लिए प्रोथसाहित कर रहे थे।
00:58प्रशासन को आशंका थी कि उनकी गत्विद्यों से तनाव बढ़ सकता है और सारजनिक विवस्था प्रभावित हो सकती है।
01:06नोटिस में ये भी पूछा गया कि क्यो ना अक्षत को 6 महिने तक शांती बनाये रखने के लिए पाबंध
01:12किया जाए।
01:13इसके लिए 5 लाक रुपे के निजी मुचलके और इतनी ही राशी के दो जमानतदारों की मांग की गई थी।
01:19मामले की सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीक तै की गई थी।
01:23इसके बाद अक्षत ने एक वीडियो जारी किया उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें परदर्शन
01:30में शामिल होने को लेकर डराया और धमकाया जा रहा है।
01:34यहीं से मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया।
01:37बोद्वार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दोरान सीनियर एडवोकेट विशुजीत भटाचार ने ये मामला सीजे आई सुरिकांत की अध्यक्षता
01:46वाली बेंच के सामने उठाया।
01:48उन्होंने बताया कि एक छात्र को शांती बनाए रखने के नाम पर पांच लाक रुपे का बॉन्ड भरने का नोटिस
01:55दिया गया था।
01:55वकील ने कहा कि बाद में ये नोटिस वापस ले लिया गया लेकिन सिर्फ नोटिस वापस लेना इस पूरे मामले
02:02को खट्म नहीं करता है।
02:25CGI सुरकांत ने सक्त रुख अपनाया।
02:56दरसल इस पूरे मामले की जड़ CJP प्रोटेस्ट से जुड़ी हुई है।
03:00चात्र अक्षट पर आरोप लगाया गया था कि वो चात्रों को प्रस्तावित परदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर
03:07रहे थे।
03:08और सरकार के खिलाफ ब्रहामक जानकारी फैला रहे थी। प्रशासन ने इन गत्विदियों से कानुन वियोस्था बिगरने की आश्रंका जताई
03:16थी।
03:16लेकिन चात्र की तरफ से सवाल उठाया गया कि जब सुप्रीम कोट पहले ही इस मामले में चात्रों के खिलाफ
03:23जबरदस्ती की कारवाई पर रोक लगा चुका है तो फिर नया नोटिस किस आधार पर जारी किया गया।
03:30अब इस मामले में सबसे एहम बात ये है कि सुप्रीम कोट इस कारवाई को किस नजर से देखता है
03:37एक तरफ प्रशासन कानुन वियोस्था बनाए रखने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ छात्र पक्ष सुप्रीम कोट के
03:44आधेश का हवाला दे रहा है।
03:46फिलहाल नोटिस वापस लिया जा चुका है लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोट की नजर अब इस बात
03:52पर है कि आखिर ऐसा नोटिस जारी क्यों किया गया और क्या ये अदालत के आदेश की अंदेखी थी।

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