00:00और सवाल आगे की कारवाई को लेकर कि अब मेजिस्ट्रेट कोट में बचाव पक्ष के लिए क्या विकल्प है और
00:05जमानत को लेकर कितनी सा भावना बंती नजर आ रही है
00:12तो उसके अगेंस्ट वो जुरिजडिक्शनल अपिलेट कोट में जा सकते हैं रिजेक्शन के खिलाफ रिवीजन साइल कर सकते हैं लॉग
00:21में जिसके लिए कोट ने भी कहा तो अब ऐसा नहीं है कि विकल्प बंद हो जाते हैं विकल्प भारत
00:27देश में किसी का बंद नहीं हो �
00:29एक हाथ दिन की बात है आज नहीं तो जमानत होगी ही होगी जैसे क्रिडेंशल पूर्ण होगी जे एक अंदिम
00:37सवाल आपसे भी शिविन जी क्योंकि आप लंबे वक्त तक ग्राउंड पर रहे हैं और सीजेपी के पूरे प्रोटेस्ट में
00:42हो या फिर S.I.R. के खिलाफ जो
00:59ग्राउंड पर क्या रियालिटी से आपने देखी क्या सच मुछ प्रोटेस्ट का कह सकते हैं जो मकसाद था वो अफीका
01:04पढ़ रहा है जबसे ये दोनों राशुतों श्रांका और सौरफदास भी हिरासत में है लेकिन इसमें मैंने जो ग्राउंड पर
01:13रियालिटी देखी ज
01:25स्थानी लोग निकलाए थे बहुत उनके बीच में एक तरीके से पत्तरवाजी तक हो गई थी जड़ा हो गया था
01:32अब ये लगातार दिल्ली का बंद रहना रोज रोज प्रोटेस्ट होना रोज पुलिस का हर तरफ बैरियर लगा देना फुल
01:38मिलाकर ये तिवहार के मौसम म
01:41जो ब्यापारिक गजविदियें ठख पड़ जोगी थी मेरी पालिका मार्केट के जो बहां की पैस्विशन है उनके अज़्ड़ चाबला जी
01:48से जब बात ली तो उनने का ही कमारा अनुमान है कि दो सो कुरोण पड़डे का ब्यापारिक लॉस यहां
01:53पर हो रहा है तो निश
02:10के सासा लोगों के अंदर नाराजगी बढ़ रही बहां पर इसकी थी यहाई कि ब्यापारी वहां पर ऐसे नारे भी
02:15लगाने लगे कि भई दिल्ली पुलिस तुम लट चलाओ हम तुमारे साथ यह जब अबसात दे यह उनके अबसात का
02:22प्रतीक था मतलब हो सकता है कि वो ख�
02:39क्रों की बात हो गई है उसमें कई तरहे के बोट है और मैं फिर भी बार बार कहता हूं
02:44कि जब चुनाओ के जो SIR की पिरकिरिया हुई है और वैसे भी कभी बोट बनता है हर चुनाओ से
02:50पहले बुकुन पूरा चुनायो कोई भी हो पूरी जो है मौका देता है सभी पार्टी
02:56स्थीनाओ को पूरी देता है और हर पार्टी बोल Zach तो करेंगे उसको चैलेंज करते समय
03:07नहीं हैं, तो इसमें कई बार ये भी लोग कह रहा है कि जिन लोग का बोट नहीं बनायों, वो
03:12शान्ने क्यों नहीं आतीऊ? लेकिन ये भी बात है कि पार्म सिक्स में कुछ भिकते हैं, तो इसकी लडाई जो
03:19इतनी बड़ी हो गई है, ये आम जद्धा के ये वाई लडाई उ
03:37साथ जो हुआ उस तरह की चीज़ें आम लोगों से जोड़ी होती है और उस पर जनता साथ में होती
03:42है आती है लेकिन ये मसला उस तरीके से बोट चोड़ी की इस तरह सड़क पे आया है मुझे ग्राउंड
03:48पे लगा कि जो आम लोग हैं खास्तों से दिल्ली के वो इस पर उतना
03:53साथ नहीं है जितना वो उस समय जो नीट पेपर लीक का मामला था या अभी देख लीजे जो लड़कियों
04:03के साथ में गलत हुआ ये तमाम चीजें उनके साथ में जो सड़क पर जिस तरह की समर्थम दिखाई दे
04:09रहा था इस पर उतना समर्थम मुझे उस दिन नहीं दिखा
04:23झाल