00:00जहन्जी वाली टिपनी को लेकर हाइकोट थे क्या दिपने की कोशिश कर रही है…. यह मैसेज कैसे लेना चाहिए स्वाल
00:07है?
00:08है कि इस्फष्ट सब्दों में के पिलिए पार इनके सांथ इस्टूडेंट्स पार के पेरेंट्स
00:19ख और जनता का सेंटीमेंट ठाक्र कि मामला नीट से चुड़ा हुआ और सांत ही
00:28तिये था कि यह जो मुमेंट चला रहे हैं उस मुमेंट पे देश को युगाओं का भला होगा फायदा होगा
00:34इसे बहुत बड़ा समर्पन है लेकिन जब वो संगठन फिर देश में अन्य लोगों का आस तोर से पॉलिटिकल जो
00:43इशूस हैं उनी इशूस में इस्तीफा मांगन
00:45लगे तो यह सब बाते तो आएंगी तो पब्लिक के सिंपने तो खड़न होगी कि एक प्रोटेस्ट जो यूथ की
00:51बातों को लेकर शुरू हुआ वो बाद में दिश्रमित हो करके वो दिख्रमित हो करके वो लगा लोगों का इस्तीफा
00:58मांगने कभी अभी शाजी का इस्ती�
01:03दूसरा आज की बाद पर अगर हम कन्फाइन करें तो कोड ने कहा जब मावला शांते करने का हुए तो
01:09यह जानना जरूरी हो जाता है कि आप कौन है और क्या करते और अगर आप जेंजी नहीं हैं 1997
01:16के बाद पैदा हुए है क्योंकि जो लोग 1997 के बाद पैदा होते होते हैं �
01:21तो आप जब जेंजी नहीं है, मकसद आपका बदल गया है, पहले छात्रों का विरोथा, आपका मकसद कुछ हो रहा
01:28है, मकसद बदल रहा है, तो सवाल होगा ना कि आप कौन है, आपका संगठन का उद्देश ही क्या है,
01:35और ऐसे समय पर जब दुनिया में आग लगी हुई, आ
01:50अगर जब एक तरह के प्रोटेस्ट हो रहा है, उसके पहले भी देखे पुलिस वाले मारे गए, भाला कि मुकदमे
01:55वापस हुए, तमाम चीजे हुई, तो दुबारा से एकदम से आना और उसी जगे क्यों प्रोटेस्ट करना, कौन सी प्रोटेस्ट
02:02साइट होगी, ये देख
02:16फैक्टर है, लेकिन अगर कानून में कोई दूसरा मुका, उपाय मौजूद है, तो फिर उसको एक्स्क्लोर करना चाहिए, यही आज
02:24के डिस्क्रिशन के जो में टॉपिक था, वो यह था, जे, अश्विणी जी फिल लॉटेंगे आपके बास हमारे स्वयोगी शिविंद
02:30ग
02:46जैसे देशियों का उसमें जिक्र है, क्या टिपड़ी आई आज कूट के भीतर, और कैसे सीजेपी के दोने माइंदों को
02:52घिरने कोशिश की गई, उनसे सवाल जवाब हुए, देखे, कूट में दो दो तीन बातें जिस पर हुई, उसके बाद
03:00उन्होंने अपना आज का बा�
03:14करके थी, तो उसको दोराना तो मेरे खाल से सही नहीं है, लेकिन मुक बात ये थी कि प्रोसेस को
03:19लेकर थी, आप सीधे घाई कोट की होई, एक सवाल ये था, आपके पास दूसरे भी रास्ते थे, आप बहाँ
03:25जा सकते थे, सहसनपूर जा सकते थे, वो सारी बाते थी, तो य
03:29ये महदपूर चीज है और इसी वजह से उनको बहाँ पर याज का मैं जो सुनवाई या जो कटोर सब्वी
03:35कहे जैन जी वाली बात है, मैं हाला कि उस पर ये भी कह सकता हूं, कि जमानत के मुद्दों
03:40पर जैन जी होना ना होना एक अलग बात है, लेकिन चुकि उनके बकील इ
03:58नाम पर उसके बाद लूट और आगजनी की बात दिनों ने कही जैसा कि हम फ्रांस होएं, तो साइध उसका
04:03तरभाव उसको देख के भी बात कर रहा है, लेकिन कानूनी पहलू में कुछ गरत नहीं है, लेकिन अगर किसी
04:10अगर आपको पीस बॉन्ड आप भरते हैं उसका अ�
04:28बयान और मीडिया में बोल रही हैं, वो बयान एक बकील के बयान नहीं हो, वो टोटल पॉलिटिकल बयान होंगे,
04:34इसको बेहतर हमारे साथ में चुकि असनी दोबेजी जोड़े हैं, अगर उनसे भी इस बात को और क्लिर करेंगे, जिस
04:40तरह से उनका कहना कि वो फोन पर बात
04:43करते रहें, और जजज डो डील हो रहे हैं, वो सारी चीज़े एक तरीके से हर जगे आरोप लगाना, लेकिन
04:49सचाई ये थी, कि जो जमानती थे, उनका जब पूछा गया, उनसे जब बात की गई, तो उन्हें अगर नहीं
04:57पता है, वो किसकी जमानत ले रहे हैं, उसके पिता
05:13हैं, जानते भी हैं, नहीं जानते हैं, एक तरीके कि यहीं पिर्किलिया है, और इसमें अगर वो फेल होता है,
05:18तो वो जमानती जो है, नहीं सही माने जाएंगो, उनके सवाल खड़े होंगे, इसलिए सब दिक्कते होई हैं, दूसरी बात,
05:26जजज जो मजिस्टेट हैं, उन्
05:42सब्सक्राइब के लिए मामना केथना गंपी रहे होई।