00:04भादरपद महीने की अमावस्या को कुश ग्रहनी अमावस्या कहते हैं
00:08इसे पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जानते हैं
00:11पित्रों की तरपण और उनकी शांती के लिए ये अमावस्या बेहद खास माने जाती है
00:16इस दिन कुशा का इस्तमाल करना भी बेहद शुब होता है। वेद पुराण में पित्रों की तरपन और पूजा पाट
00:22में कुशा का विशेश महत्व है।
00:23मानिता है कि कुश द्रहनी अमावस्या के दिन कुशा तोड कर रखी जा सकती और फिर पूरे सालस का इस्तमाल
00:29उजा, तरपन और धार्मिक कार्यों में करते हैं।
00:53स्नान दान का मुहूर्त सुबह 4 बचकर 31 मिनट से लेकर सुबह 5 बचकर 17 मिनट तक रहेगा। जो की
01:0111 सितमबर की सुबह की जाएगी।
01:23और सब्त मातप्रतिकात में मूर्तिया बनाई जाती हैं जिन्हें लाल वस्तर बिच्ची चोकी पर स्थापत कर गणेश पूजन के साथ
01:30रोली, हल्दी, कुमकुम, दूर्वा, लाल पुश्प और सुहाग सामगरी अर्पत की जाती है।
01:35इसके बाद आटे के बने पक्वान और खीर पूरी का भोग लगा कर पिठोरिय मवस्या की कथा सुरी जाती है।
01:42और अंत में आरती के बाद वरिष्ट महलाओं और ब्राम्भनों को अन्न, वस्त्र और दक्षना देकर संतान की रक्षा का
01:48अशरवाद दिया जाता है।
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