00:02हिंदू पंचांग के नुसार इस साल 10 अक्टूबर को सर्वपित्री मोक्ष अमावस्या पढ़ रही है।
00:30पित्रों का तरपन श्राथ करने के साथ साथ दानपून करना लापकारी हो सकता है।
00:35मानेता है कि इस दिन पित्रों की त्रिप्ति के लिए किये गए कर्मों के साथ साथ शनी देव की पूजा
00:41अर्शना करने से शनी ग्रह से जुड़ी परिशानियों में राहत मिल सकती है।
01:00शुब मुहुरत की साल दोहुजारशबिस की आखरी शनी अमावस्या 10 अक्टूबर को है यह अमावस्या बेहत खास है क्योंकि यह
01:07सर्व पित्री मोक्ष अमावस्या के साथ पढ़ रही है जिसे शनी देव और पित्रों दोनों का एक साथ आश्यवात प्राप्त
01:16करने का दुर
01:16लबसा योग है अमवस्या तिथी की शुरुवात 9 अक्टूबर 2026 को रात 9 बच कर 25 मिनट से हो रही
01:24है वह इस तिथी का समापन 10 अक्टूबर 2026 को रात 9 बच कर 19 मिनट पर खत्म होगी उद्या
01:31तिथी के हिसाब से 10 अक्टूबर को शनी अमावस्या यानि की सर्व पित्री �
01:35मवस्य मनाई चाहिए की इस दिन पूजा का शुम हुरत है सुभा 11 बच कर 45 मिनट से लेकर दो
01:42पहर 3 बच कर 30 मिनट के बीच बात करें पूजा विधी की तो इस दिन सुभा जल्दे उठकर पवित्र
01:48नदी में स्नान करें पेनहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिलाकर स्
01:58करें शनी मंदिर जाकर शनी देव की प्रतिमा पर सर्सों का तेल और काले तिल चड़ाए ध्यान रखें पूजा करते
02:06समय शनी देव की आँखों में सीधाना देखें वहीं ओम शन शन शनिचराय नमह मंत्र का 108 बर जाप करें
02:14वहीं इसके साथी इस दिन सर्व पित्रिय मवस
02:17तो इसलिए आप इस दिन अपने पित्रों का श्राद तरपन और पिंड़दान भी कर सकते हैं कहते हैं गर आपके
02:24परिवार में किसी पित्र की तीथी याद ना हो तो उसका श्राद सर्व पित्रिय मवस्या के दिन ही किया चाता
02:31है मैं अब आपको बता दे कि आर्थिक तंग
02:45और साथ परिक्रमा करें इससे गर्ज और आर्थिक तंगी से राहत मिलती हैं वहीं गरीब या जरुतमन व्यक्ति को काले
02:53जूते काली उड़त की दाल काला कपड़ा या लोहे के बरतन दान करें शनीदेव दान से अती प्रसन होते हैं
03:01वहीं इस दिन सर्व पित्रिय मवस्या
03:03भी है इसलिए शाम को घर के मुखे द्वार पर दक्षिन दिशा की और मुख करके सर्सो के तेल का
03:10दीपक जलाए इससे पित्र दोष शान्त होता है और रुके हुए कारें तेजी से बनने लगते हैं उमीद करते हो
03:17आपको जानकारी पसंद आई होगी फिलाल अमारी इस वी�
03:22का अपको जापते हुए भी हुए झालphones है में फसलिए जार दोड़ घर क्यों हैं