00:03हर साल भद्रपद महा के कृष्ण पक्ष में आने वाली तृतिया दिथी पर कज्री तीज का व्रत रखा जाता है
00:09सुहगी महिलाय पती की लंबी उम्र, संतान संबंधी समस्याओं से मुक्ती और विवाहिक जीवन में सुक्षान्ती के लिए इस व्रत
00:17को करती है
00:18साथी ये व्रत कुवारी करने आये भी मच जहवर्फ प्रापते करने के लिए करती है
00:23ऐसे में अगर आप भी कज्री तीज का वरत रख रहे हैं तो चलिए बताते हैं आपको कि कज्री तीज
00:29में पूजा समागरी क्या चाहिए, पूजा कैसे करें और पूजा का शुव मुहरत क्या है
00:34सबसे पहले बात करते हैं कज्री तीज में पूजा समागरी की
00:38तो भगवान शिव और माता पारवदी की तस्वीर या मूर्थी
00:42तीज माता ये निम्डी माता की तस्वीर
00:44पुजा की चौकि, चौकि प्रबिशाने के लिए साफ सुत्रा लाल वस्त्र
00:48मूर्दी बनाने के लिए मिट्टी, गाय का दूद, गंगा जल, दही, मिश्री, शहद और पंच्छाम्रित, केले के पत्ते, बेल पत्र,
00:57नीम की डाली, कुमकुम, रोली, धोप, हल्दी और दीपग, माता पारवदी को अर्पित करने के लिए सोलर शिंगार का समा,
01:04धतूरा, �
01:06दुर्वा, जनेयो, सुपारी, अच्छत, नार्यल, कलश, फूल, और फूल, माला, इन जीजों को अपने पूजा समागरी में शामिल करें, वहीं
01:15भद्रपद महा की तृतिया तिथी को सुभा जल्दी उठकर स्नान करें, फिर पूजा का संकल्प लेते हुए भगवान शि�
01:33दूद, शहद, दही और बेलपत्र अर्पित करें, इसके बाद माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी और सोल और शिंगार
01:42का समाना अर्पित करें, कजरी तीज पर नीम की डाली या नीम की पेड यानि की निमडी माता की पूजा
01:48करने का विशेश महत
02:03दूद, पूजा महरत की तो ब्रहम महरत सुभवा, चार बच कर उननतिस मिनट से शुरू होगा और पांच बच कर
02:09चौदर मिनट तक है, वह अब जीत महरत सुभवा, ग्यारह बच कर चपन मिनट से, दो बहर बाररह बच कर
02:1547 मिनट तक है, साथी संध्यकाल में पूजा का श�
02:30कि अबस्क्राइब करना भूले