00:04हमारे देश में राजनीती और सोशल मीडिया का संगम अक्सर अध्वुत नमूने पेश करता है।
00:30बेंच आ गई। मैंने अपनी जिन्दगी में पहली बार अपने गाउं के बच्चों को जमीन के बजाए बेंच पर बैठे
00:36देखा। ये मेरे जिन्दगी के सबसे खुशी के पलों में से एक है। वाह क्या विजन है। क्या त्याग है।
00:43ऐसा लगा मानुच देब के जी ने अ
00:59तू ही मेरा पिता। लेकिन रुकिये कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी है। अभी जी दीब के ये भूल गए कि
01:07आज का इंटरनेट गूगल डिटेक्टिव से भरा बड़ा है। ठीक तीन दिन पहले महाशे उसे स्कूल में रील बनाते नजर
01:13आये थे। जन्ता ने तीन दि
01:16वीडियो निकाली और ध्यान से देखा। अरे गी क्या। जिन हरे रंग के बैंचों को दीब के जी अपनी पहली
01:24बार की क्रांती बता रहे थे। वो पैंच तो तीन दिन पहले भी वही रखी हुई धूल फाक रही थी।
01:30यानि स्कूल में बैंच पहले से थे। बच्चे पह
01:45रहे होंगे एक तीन दिन पहले की वीडियो जिसमें दीब के स्कूल का सर्वे कर रहे हैं और उस टाइम
01:52भी वह ग्रीन कलर की बैंच वही रखी है। उसके बाद आप दूसरी तरफ देख सकते हैं कि अभिजी दीब
01:58के ने कहा कि पहली बार मेरे गाउं के बच्चों को बैं�
02:14जाकुडाते हुए कहा अरे उसने ग्रीन पेंट कराया यार बोलना भूल गया तो एक ने कहा सेम टू सेम अपने
02:21बाप जैसा जूटा तो एक ने कहा दिमागी नकसलवादी देश द्रोही का गैर इरादा पूरा नहीं हो पाया अपना पापा
02:29पपू की तरह फिर फेल हो गया
02:31वैसे अभी जीत दीपके के लिए हमारी तरफ से एकी सला है कि अगली बार जब किसी चीज का क्रेडिट
02:36लेना हो तो कम से कम अपना पिछला सबूत तो डिलीट कर दे जिसकी वज़े से उनकी जूटी बात लोगों
02:43को सच लग सके वैसे आपका इस पर क्या कहना है हमें कमें�
02:46बॉक्स में जरूर बताएं फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना
02:51ना भूले
Comments