Skip to playerSkip to main content
  • 4 hours ago
मक्का में सात अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' ने इन देशों को आपस में जोड़ दिया है. इनमें केवल पाकिस्तान ही एकमात्र परमाणु हथियारों वाला मुस्लिम देश है, वहीं सऊदी अरब इस्लाम के सबसे पवित्र जगहों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है, जबकि तुर्किये नाटो का सदस्य देश है. इन तीनों देशों के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैनिक और करीब 3,415 सैन्य विमान हैं.  ग्लोबल फायरपावर 2026 इंडेक्स में तुर्किये नौवें, पाकिस्तान 14वें और सऊदी अरब 25वें पायदान पर है. उनका संयुक्त रक्षा खर्च लगभग 124.4 अरब अमेरिकी डॉलर सालाना के होने अनुमान है. पाकिस्तान परमाणु क्षमता और मजबूत सैन्यशक्ति वाला देश है, वहीं तुर्किये एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी में महारथ रखता है और नाटो का सदस्य देश है, जबकि सऊदी अरब आर्थिक ताकत, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के हिसाब से मजबूत मुल्क है. तीनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक इस समझौते का मकसद किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है और इसमें ये प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी होने वाले किसी भी सशस्त्र हमले को उन सभी मुल्कों पर हमला माना जाएगा.  

Category

🗞
News
Transcript
00:23
00:25इन तीनों देशों के पास कुल मिला कर लगभग 14 लग सक्रिय सैनिक और करीब 3415 सैने विमान है।
00:54नाटो का सदस्य देश है जिबकि सओधी अरब आर्थिक ताकत इंफ्रस्ट्रक्चर और रन्नीतिक भोगालिक स्थिती के हिसाब से मजबूत मुल्क
01:00है।
01:03तीनों देशों के सर्यक्त बयान के मताबएकिस समझोते का मकसद
01:06किसी भी तरह की आकरामक्ता के खिलाफ सामोहिक प्रतिरोद को मضبوط करना है
01:10और इसमें ये प्राफधान है कि
01:12तीनों देशों मैंसे किसी एक पर भी होने वाले ये ये किसी भी श्रिशिस्त्र हमले को
01:16उन सभी मुलकों पर हमला माना जाएगा
Comments

Recommended