00:28।
00:30पाच घंटे तक मंत्र गूंजते रहे और दूर बैठी बेटी अपने पिता और भाई की आत्मा की शांती के लिए
00:38फ्राथना करती रही।
01:00के निर्देश पर एक-एक मंत्र दोहराती रही।
01:25नैना को सलहा मिली थी कि पिशाज मोचन में त्रिपेंडी श्रधा और नारायन बाली कराया जाए।
01:33हिंदू मानेताओं के मुताबिक ऐसे अनुष्ठान असमय या अप्रत्याशित मृतियों के बाद दिवंगत आत्मा की शांती और मुक्ती की कामना
01:42के लिए किये जाते हैं।
01:44सबसे पड़े नारायन बली हुई है।
01:47नारायन बली में जो है।
01:49यहां पर सक्टेश विष्टू के साथ प्रमा विष्टू महिशादी देखाओं के साथ जो है।
02:16हाला कि आत्मा की मुक्ती और शांती से जुड़ी बाते आस्था का विष्टू के लिए ऐसी रस में मन को
02:26धांधस और दिल को सुकून दे सकती है।
02:29जब काशी में अंतिम प्राथना पूरी हुई तब भी नैना हजारो किलो मीटर दूर थी।
02:35लेकिन उन पाच घंटों में दूरी सिर्फ नक्षे पर थी।
02:39भावनाए काशी में थी, यादे काशी में थी और एक बेटी की प्राथना भी काशी की पवित्र अगनी के साथ
02:48थी।
02:48Bureau Report, ETV Bharat
Comments