Skip to playerSkip to main content
  • 21 minutes ago
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने डुप्लीकेट वोटिंग रोकने के लिए बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और राज्यों से जवाब मांगा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा विधानसभा चुनावों में इसे लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन भविष्य के चुनावों के लिए इस पर विचार जरूरी है. याचिका में दावा किया गया है कि फर्जी वोटिंग, रिश्वत और डुप्लीकेट मतदान अब भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं. बायोमेट्रिक सिस्टम से “एक व्यक्ति, एक वोट” सिद्धांत को मजबूत करने की बात कही गई है.

Category

🗞
News
Transcript
00:01चुनावी पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोट ने एहम कदम उठाया है।
00:04डुप्लिकेट वोटिंग को रोकने के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने की मांग पर कोट ने सुनवाई के लिए हामी भर
00:10दी है।
00:11सुप्रीम कोट ने सोंवार को उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमती जताई जिसमें मतदान केंद्रों पर उंगली और आईरिस
00:18आधारित बायोमेट्रिक पहचान सिस्टम लागू करने की मांग की गई है।
00:22इस सिस्टम का मकसद डुप्लिकेट वोटिंग और फर्जी मतदान को रोकना है। मुखे नायधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोए मालिया
00:31बाक्ची की पीठ ने साफ कहा कि मौजुदा विधान सभा चुनाव में इस मांग पर अमल संभब नहीं है। लेकिन
00:42भव
00:52किया गया कि तमाम सकती के बावजूद रिश्वत खोरी, फर्जी वोटिंग और डुप्लिकेट मतदान के मामले अब भी सामने आ
00:58रहे हैं। जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है। याचिका में कहा गया है
01:05कि उंगली
01:06और आइरिस आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करने से एक नागरिक एक वोट का सिधान्त पूरी तरह सुनिश्चित किया जा सकता
01:13है और चुनावों की निश्पक्षता को और मस्बूत बनाया जा सकता है।
Comments

Recommended