00:00इतने भारती हैं सम मिलकर की एक जिगा थूक भी दें
00:03तो ये जितने आतकरांता हैं डूम मरें इसी में
00:09बितानवी सल्तनत के लिए कहा था
00:13हम इतने सारे हैं और हारते गए
00:15ये गीता पढ़ने वालों के साथ तो नहीं हो सकता
00:19ये क्रिष्ण के वास्तविक प्रेमियों के साथ तो नहीं हो सकता
00:23और क्रिष्ण का प्रेमिय होने का दावा तो हम रोज करते हैं
00:27वो दावा जूठा है प्रिक्रिष्ण माने गीता
00:31गीता माने आत्मग्यान
00:33और आत्मग्यान माने जीवन के संघर्ष से कोई पलायन नहीं
00:38मर सकते हैं
00:40हार थोड़ी मानेंगे
00:41मर सकते हैं
00:44पर हार थोड़ी मान लेंगे
00:47मुठी भर लोगों को अपने उपर छा थोड़ी जाने देंगे
00:50पर ये आप तभी कह सकते हो
00:52जब आपको पता होता है कि आपका जीवन धर्म सम्मत है तब आप कहते हो कि मेरा जीवन मेरे लिए
00:57नहीं है मेरा जीवन धर्मिक है मेरा जीवन धर्म के लिए है तो मेरी हार मेरी हार नहीं होगी मेरी
01:04हार धर्म की हार होगी इसलिए हारना मंजूरी नहीं है हमने हारना मंजूर
01:09कर लिया क्योंकि भीतर भीतर हम को पता था कि हमारे जीवन में धर्म तो ऐसे भी नहीं मौजूद है
01:13तो हमने बड़ी आसानी से हार मान ली बड़ी आसानी से हमने भुटने टेक दिये
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