00:00एक दो लोग आकर के युद्ध में हरा करके आपका शोशन कर ले जाएं तो आप कह सकते हो सही
00:06होगे पर एक दो लोग नहीं दसियों अलग अलग तरफ के अलग अलग राश्ट्रीता के अलग अलग अलग लोग आ
00:13रहे हैं और हमारा शोशन करते ही जा रहे हैं तो यह सही हो सकत
00:29से पूछना बढ़ेगा वो कारण क्या है जिसने भारत को इतने बुरे दिन देखने पर विवश करा
00:35वो कारण क्या है क्या वो कारण राजनेतिक हो सकता है नहीं कोई राजनेतिक कारण इतने दिनों तक नहीं चलता
00:57और संस्कृत बनकर बैठ गई है और हम उसको पहचान नहीं पा रहे
01:01कुछ ऐसा है जो हमें भीतर से ही कमजोर बना रहा है
01:05पर हम उसको बहुत पवित्र माने बैठे हैं
01:07हम उसको हटा नहीं पा रहे है अपने भीतर से
01:09मैं उसको लोकधर्म कहता हूँ
01:12वो है भारत की परतंत्रता का कारण
01:14और वो जब तक रहेगा तब तक भारत को दुर्बल ही रखेगा
01:18और जो दुर्बल होता है उसका शोशन करने तो कोई भी चला आता है
01:23दुनिया में इतने स्वार्थी लोग हैं वो सब लगे हुए हैं
01:26कोई कमजोर दिखे जाकर गए उस पर जबटा मार दो दुर्बल नागरिकों के साथ क्या बली राष्ट्र हो सकता है
01:33नायम आत्मा बलहीनेन लभ्यो आत्मा और बल का बड़ा गहरा रिष्टा है और अगर कहीं पर आत्मा की ही परिभाशा
01:44विक्रत कर दी गई हो
01:45तो बल कैसे बचेगा बोलो बल कैसे बचेगा और मनुष्य में बल नहीं तो फिर राष्ट्र में बल नहीं और
01:53मनुष्य का बल होता है वास्तविक धर्म वास्तविक धर्म गया तो मनुष्य का बल गया मनुष्य का बल गया तो
01:59राष्ट्र का बल गया तो राष्ट्र का बल
02:02गया तो राष्ट परतंत्र हो गया
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