00:01मैं चाहूंगा स्वाधीनता दिवस को हम आत्म अवलोकन दिवस की तरह मनाएं
00:05और पूछें अपने आपको कि स्वतंतरता तो ठीक है पर पहले ये बताओ पर तंतरता कैसे आ गई थी
00:11वो ज्यादा जरूरी सवाल है स्वतंतरता के लड़ू खा लेंगे बेशक
00:16पर रखो अभी उने इंतजार करने तो पहले मैं ही समझना चाहता हूँ
00:20कि इतना विशाल देश इतने सालों तक इतने अलग-अलग लोगों के अधीन
00:27रहा कैसे बाद क्या थी कारण क्या थे मैं उन कारणों को जानना चाहूँगा
00:33क्योंकि अगर आपने उन कारणों को नहीं जाना तो ये कैसे आपको निश्चित पता है कि वो कारण आज भी
00:39मौजूद नहीं है
00:40बोलो बोलो अगर वो कारण 1000 साल तक मौजूद थे
00:47तो अभी तो राजनेतिक आजादी मिले कुल 75 साल हुए
00:5147 से अभी तक तो 100 साल भी नहीं बीते नहीं बीते न वो चीज आपको सचमुष लगता है कि
00:58इधर 78-80 साल में चली गई होगी
01:00चली गई होगी वो आज भी मौजूद है और वो आज भी मौजूद है तो कितना बड़ा खतरा है भारत
01:06के उपर
01:09हम वो खतरा नहीं देख रहे हैं हम बिलकुल शुतर मुर्ख की तरह रेत में सर गाड करके उत्सव मनाना
01:17चाहते हैं कि लो आजादी आ गई हैं बहुत अच्छी बाते आजादी आ गई हम भी नाचना चाहते हैं हम
01:21भी जूमना चाहते हैं हम भी खुश होना चाहते हैं पर मै
01:25कैसे जो सर पर तलवार लटक रही है उसके प्रति अन्भिग्य होने का आभिनाय कर लूँ मुझे वो तलवार लटकती
01:34दिखाई दे रही है एक दो लोग आकर के युद्ध में हरा करके आपका शोशन कर ले जाएं तो आप
01:41कह सकते हो सही होगे बीच बीच में कोई आता है कभी
01:43हार होती है कभी जीत होती है वही चलता रहता है पर एक दो लोग नहीं दसियों अलग अलग तरफ
01:50के अलग अलग राश्ट्रिता के अलग अलग लोग आ रहे हैं और हमारा शोशन करते ही जा रहे हैं तो
01:56यह संयोग नहीं हो सकता ना क्या हो सकता है पर हम खुद को यह जताना
02:01चाहते हैं कि ये तो बस ऐसे ही हो गया हो गया जी हो नहीं गया डर मुझे ये है
02:09कि वो आज भी हो रहा है
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