00:00प्लासी की लडाई तो सीधे-सीधे घूस देकर उन्होंने जीती है
00:02वो लडाई मालूम है
00:04वो लडाई जीती हुई मानी ही नहीं जाती है
00:07वो लडाई खरीदी हुई मानी जाती है
00:08The British
00:11bought the battle of प्लासी
00:14जो घूस पर इमान बेच दे
00:16उसकी जिन्दगी में धर्म रहोगा क्या कहीं
00:20उसके बाद बक्सर की लडाई लड़ रहे हैं
00:22उसमें तीन राजा ही कठे हो रहे हैं
00:24वहाँ अस्री लडाई हुई थी
00:25उन तीनों में आपस में मन मुटा हुए फूट है
00:29वह तीनों अपना-पना स्वार्थ देख रहे हैं
00:31तीनों कोही राष्ट से धर्म से सत्य से कोई मतलब नहीं
00:35अंगरेजों ने फिर हराया
00:37क्या हम वास्तव में गीता का देश हैं
00:40क्या हम वास्तव में धर्म का देश हैं
00:41हम लोकधर्म का देश हैं
00:44और वो लोकधर्म आज भी हावी है
00:46दूसरों का दोश बेशक है
00:47जो लोग यहां आ रहे थे
00:49वो कोई हमें गले लगाने नहीं आ रहे थे
00:50वो हमारा शोशनी करने आ रहे थे
00:52पर क्या हम अपनी कमजोरी अपनी बीमारी
00:55अपनी बेमानी की जर्चा नहीं करना चाहेंगे
00:59बोलो
00:59और अतीत में वो सब हमने
01:02कमजोरियां दिखा दी
01:03उससे भी मुझे कोई बहुत मतलब नहीं
01:06पर अतीत की ये बात अतीत की नहीं है
01:08ये अतीत की बात आज भी है
01:10बहुत अर्थ में हम आज भी
01:12बिल्कुल वैसे ही है
01:13जैसे सोलवी और सत्रवी और अठारवी शताब्दी में थे
01:17अबलकि आज और कोशिशे हो रही है
01:20कि हमें बारवी शताब्दी में डाल दिया जाए
01:22तो बताओ पहले उत्सव मनाओं
01:24या पहले और चौकन्ना हो करके
01:28नजर घुमाओं
01:29बोलो
01:31सुतंतरता दिवस को सतरकता दिवस की तरह मनाईए
01:34खतरा बराबर का है
01:37खतरा अभी बाकी है
01:39और खतरे का कारण आंतरिक है
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