00:00आज से दस साल पहले इसी रिशिकेश की मेरी एक तस्वीर है
00:04वहाँ मैं बिलकुल गंगा खिनारे लेट गया हूँ पत्थरों पर
00:07और मोजे पहन रखे थे धूप खिली हुई थी जाड़े के दिन थे तो मोजे पहन किस वह से निकला
00:12हूँगा पर धूप आ गई
00:13तो दोनों मोजे मैंने अपने उतारे और उपर ऐसे धूप आ गई है
00:18चश्मा नहीं ले रखाता तो दोनों मोजे लेकर के दोनों आखों पर डाल लिए
00:24वो किसी ने कम्यूनिटी पर पोस्ट कर दी
00:28उसके नीचे ततकाल महापंडितों के कॉमेंट आ गए
00:31करें ऐसी घिनोनी तस्वीर
00:35आचारे जी ने पाउं से निकाले गंदे मोजे
00:40अपने चेहरे पे रखे हुए
00:42क्रिपा करके इनका ये रूप मुझे मत दिखाओ
00:47करें तुम इसी रूप से घबरा गए
00:52मेरे तो नजाने कितने और रूप है
00:56मैं मिट्टी हूँ भाई
00:58मुझे मिट्टी में लथफत होने में कोई तकलीफ नहीं होती
01:01वो मा है मेरी
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