कर्नाटक ने तमिलनाडु को रोजाना 12 हजार क्यूसेक पानी देने के कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश को गलत बताया है. सुप्रीमकोर्ट में दायर अपनी याचिका में कर्नाटक ने कहा कि CWMA ने कावेरी जल विनियमन समिति यानी CWRC के उस निर्देश को मंजूरी देने में गलती की है. जिसमें कर्नाटक को अगले पंद्रह दिनों तक रोजाना 12 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने के लिए कहा था. कर्नाटक का कहना है कि कावेरी बेसिन एक मौसमी बेसिन है जो भौगोलिक रूप से कावेरी बेसिन कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में फैला हुआ है और इसमें पानी का बहाव उत्तर-पश्चिमी मानसून पर निर्भर करता है. कर्नाटक का तर्क है कि अल नीनो की वजह से इस साल वैसे भी कम बारिश हुई है. जल वर्ष पानी की कमी वाला साल रहा है, जिसकी वजह से कावेरी बेसिन में मौजूद चार जलाशयों में पानी की आवक 28 जुलाई तक करीब 66 फीसदी कम रही है. कर्नाटक का कहना है कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने 11 जुलाई 2026 को हुई बैठक में कावेरी जल विनियमन समिति की गलत सिफारिश के आधार पर कर्नाटक राज्य को अगले 15 दिनों तक हर दिन 12 हजार क्यूसेक पानी सुनिश्चित करने का गलत निर्देश दिया. ऐसे में राज्य इस फैसले को इस अदालत में अलग से चुनौती देने का अपना अधिकार सुरक्षित रखता है.
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